ग्रामीणों ने दो हजार पशु अनूपगढ़ कस्बे में छोड़े दिनभर बने रहे खींचतान के हालात, कस्बावासी चिन्तित

श्रीगंगानगर, 17 जनवरी (नि.स.)। शासन-प्रशासन द्वारा आवारा पशुओं की समस्या का समुचित प्रबंधन न करने से उद्वेलित किसान संगठनों ने अपनी घोषणा पर अमल करते हुए बुधवार को लगभग दो हजार पशु ग्रामीण क्षेत्रों से एकत्रित कर अनूपगढ़ कस्बे में लाकर छोड़ दिये। इसे लेकर दिनभर प्रशासन-पुलिस के अधिकारियों के साथ ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिनिधियों की खींचतान चलती रही। इस खींचतान में सबसे ज्यादा चिंतित अब कस्बे के लोग हैं, जिनका कहना है कि अगर प्रशासन ने कोई कारगर कदम नहीं उठाया, तो आने वाले दिनों में इन आवारा पशुओं की वजह से अनूपगढ़ के हालात बद से बदत्तर हो जायेंगे। अनूपगढ़ में पहले से ही सैकड़ों आवारा पशु भटकते रहते हैं। ऊपर से ग्रामीणों ने करीब दो हजार पशु लाकर और छोड़ दिये हैं। इससे कस्बे में हालात विस्फोटक हो गये हैं। अब कस्बावासी प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने का विचार कर रहे हैं। कईं किसान संगठनों ने घोषणा कर रखी थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में अगर आवारा पशुओं को फाटक में करने की प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे आवारा पशुओं को लाकर कस्बे में छोड़ देंगे। जानकारी के अनुसार इस घोषणा को गम्भीरता सेे लेते हुए अनूपगढ़ में प्रशासन व पुलिस अधिकारियों ने दो-तीन दिन से गौशाला प्रबंधकों से वार्ताओं के दौर शुरू कर रखे थे। गौशाला प्रबंधकों को मना लिया गया था कि वे कुछ पशुओं को अपने यहां रख लेंगे।

यह थी गोपनीय योजना : गौशाला प्रबंधक डेढ़-दो सौ पशु लेने पर ही सहमत हुए थे। इसके बाद गोपनीय रूप से प्रशासनिक-पुलिस अधिकारियों ने आंदोलनकारी किसान संगठनों से अंदरखाने सैटिंग करने की कोशिश की कि वे बुधवार को लगभग इतने ही पशु लेकर आयें। गुप्त योजना यह थी कि डेढ़-दो सौ पशु सांकेतिक रूप से अगर किसान संगठन लेकर आयेंगे, तो उन्हें गौशालाओं के सुपुर्द कर मामले को शंात कर दिया जायेगा, लेकिन कईं दिनों से इस मसले को लेकर सक्रिय किसान संगठनों के आह्वान पर ग्रामीण बुधवार को इतनी बड़ी तादाद में पशुओं को ट्रेक्टर-ट्रॉलियों और पैदल हांककर ले आये कि प्रशासन-पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गये। प्रात: करीब 11 बजे अढ़ाई-तीन सौ पशुओं को ग्रामीण हांकते हुए कस्बे के अंदर ले आये, तब उन्हें नहीं रोका गया। इसलिए नहीं रोका गया कि प्रशासन-पुलिस को लगा कि उनकी गुप्त योजना के तहत इतने ही पशु आये हैं। लिहाजा मामला आसानी से निपट जायेगा।

प्रशासन के हाथ-पांव फूले : कुछ ही देर बाद आसपास के गांवों से ग्रामीण और पशुओं को लेकर आने लगे। इन पशुओं को उधमसिंह चौक तथा अम्बेडकर चौक की ओर से ग्रामीण लेकर एसडीएम कार्यालय की तरफ बढऩे लगे, तब पुलिस बल ने इनको रोकने की कोशिश की। इस खींचतान में दोनों पक्षों में हल्की झड़प भी हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिसकर्मियों की तादाद कम होने के कारण इन ग्रामीणों को रोकना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों ने पशुओं को आगे कर दिया, जिस वजह से पुलिस बल को वहां से हटना पड़ा। तत्पश्चात् एसडीएम कार्यालय के सामने कुछ ही देर में 1500-2000 पशु हो गये। एसडीएम कार्यालय के सामने की रोड पर जाम लग गया। कार्यालय के सामने ही वन क्षेत्र कीजमीन है, जिस पर तारबंदी की हुई है। पशु यह तारबंदी उखाड़ते हुए वन क्षेत्र की जमीन में चले गये। इधर, किसानों-ग्रामीणों ने कार्यालय के सामने मेन रोड पर अपनी आम सभा शुरू कर दी।

सिर्फ मंथन, कोई समाधान नहीं :एसडीएम कार्यालय में एसडीएम मनमोहन, डीएसपी सोहनलाल बिश्रोई, विकास अधिकारी दलीप मेघवाल आदि अधिकारी व कर्मचारी आपस में बैठक कर स्थिति से निपटने के तरीकों पर चर्चा करते रहे। अपराह्न लगभग 4 बजे रायसिहनगर से अवर एसपी भरतराज भी पहुंच गये। इन अधिकारियों ने बाहर सभा कर रहे प्रतिनिधियों से दो-तीन बार बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बातचीत का कोई मुद्दा भी नहीं रह गया था, क्योंकि इन प्रतिनिधियों ने सभा में घोषणा कर दी थी कि वे लाये हुए पशुओं को वापिस नहीं लेकर जायेंगे। सभा में आये हुए लोग भी इसी के पक्ष में थे। उनका कहना था कि अब यह पशु प्रशासन के हवाले है। वह जाने और उसका काम। सभा को जिला परिषद के पूर्व डायरेक्टर सुनील गोदारा, भूमि विकास बैंक रायसिंहनगर के पूर्व अध्यक्ष राकेश ठोलिया, माकपा के तहसील सचिव रोशनलाल लिम्बा, राकेश महला, सरपंच शैलेन्द्र मगी, जीतसिंह, रणवीर सेखों, युद्धवीर सिंह, प्रवीन मगी, किसान संघ के जसवंत सिंह चंदी आदि नेताओं ने सम्बोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि इन आवारा पशुओं के कारण न केवल किसानों की फसलें खराब हो रही हैं, बल्कि सड़क हादसों में लोग जानें भी गंवा रहे हैं। अभी दो दिन पहले ही अनूपगढ़ थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति की रात को मोटरसाइकिल आवारा पशु से टकराने के कारण मौत हो गई थी। उन्होंने साफ कहा कि अब यह पशु वापिस नहीें ले जाये जायेंगे। ग्रामीणों द्वारा इन पशुओं को अनूपगढ़ में इस तरह छोड़कर चले जाने से कस्बे के लोग चिन्तित हो उठे। लोगों का कहना है कि अब कस्बे की सड़कों पर आना-जाना मुश्किल हो जायेगा। बाजार आने-जाने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि स्कूल आने-जाने वाले बगाों के लिए भी यह पशु एक बड़ी मुसीबत बन जायेंगे। फल-सब्जियां तथा अन्य खाद्य वस्तुएं रेहडिय़ों व खोखों पर बेचने वालों की भी परेशानी बढऩे वाली है, जहां यह पशु मुंह मारने से नहीं टलेंगे। उत्पन्न हुई इस विकट स्थिति से निपटने के बारे में अब कस्बे के विभिन्न संगठन बैठक बुलाने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को यह पशु गौशालाओं के सुपुर्द करने चाहिए।

 

कैसे सम्भालेंं इतने पशु : गौशाला प्रबंधकों का कहना है कि उनके यहां इतनी जगह व संसाधन नहीं है कि इन सभी पशुओं को वे रख सकें। किसान संगठनों की दलील है कि जब राज्य सरकार हर वर्ष करोड़ों रुपये गौ कर के रूप में आम लोगों से वसूले जाते हैं और गौशालाओं को भी करोड़ों रुपये का अनुदान दिया जाता है तो फिर इन आवारा पशुओं के कारण मुसीबत और परेशानियां किसान एवं आम नागरिक क्यों भुगतें। इनका समुचित प्रबंधन करने का दायित्व भी सरकार का ही है। बता दें कि अभी तक इस वर्ष गौशालाओं को सरकार की ओर से प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के तौर पर दिये जाने वाला अनुदान भी नहीं दिया गया है। इस अनुदान को सरकार ने काफी समय से रोक रखा है, जबकि गौशाला प्रबंधक इसका भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। सरकारी ओर से अब कहा गया है कि गौशालाओं को यह अनुदान 25 जनवरी के बाद दिया जायेगा।

 

 

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