प्रोटीन बच्चों के विकास के लिये क्यों हैं आवश्यक

हम हमेशा कहते है कि बच्चों में पता नहीं कहां से इतनी ऊर्जा आती है कि वह कभी भी एक जगह टिककर नहीं बैठ सकते। सारा दिन उनकी उछल कूद चलती रहती है तो सोचने वाली बात है कि उनमें कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा कहां से आती है ? क्या यह ऊर्जा उन्हें जो वह खाते है, उससे मिलती है ? जी, अगर आप भी यही सोचते है तो यह सिर्फ आधा सच है। गौरतलब है कि आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे शरीर को ताकत व काम करने की क्षमता मिलती है। इसलिए तो कहा जाता है कि बचपन और किशोर अवस्था में बच्चों को सबसे ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है।स्कूल जाने वाले बच्चे खासतौर से 6 से 12 साल के बच्चों के कद, वजऩ और शरीर तेज़ी से बढ़ता है। करीब 18 साल की उम्र तक के बच्चों में हर साल औसतन करीब 3 किलो वजऩ और 6 सेमी कद में बढ़ोतरी होती है। ऐसे में उन्हें स्वस्थ व संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल व प्रोटीन की प्रचुर मात्रा की जरूरत होती है। हालांकि इन पोषक तत्वों में प्रोटीन बढ़ते बच्चों के लिए सबसे ज्यादा अनिवार्य है और भारतीय भोजन इस पोषक तत्व को पूरा नहीं कर पाता।
विकास के लिए प्रोटीन – प्रोटीन सभी जीवित कोशिकाओं के प्राथमिक संरचनाओं व फंक्शनल ब्लॉक बनाता है। हमारे शरीर में करीब आधा प्रोटीन मांसपेशियों में मौजूद है जबकि बाकी हड्डियों, कार्टिलेज और त्वचा में पाया जाता है। इस बारे में क्लिनिकल न्यूट्रिशन व डायटिशियन विभाग की रीजऩल हेड रितिका समादार का कहना है, ” प्रोटीन शरीर के विकास में सहायक है और यह स्कूल जाने वाले बच्चों की मांसपेशियों की मज़बूती को बनाए रखने में भी मदद करती है। इसलिए जैसे आपके बच्चे की उम्र बढ़ती है, वैसे ही उनकी प्रोटीन की दैनिक जरूरत बढ़ती जाती है।” प्रोटीन विभिन्न प्रकार के अमिनो एसिड से बनते है। इसमें से कुछ अमिनो एसिड को ”आवश्क” कहा जाता है क्येांकि यह मानवीय शरीर में नहीं बनते बल्कि इन्हें विभिन्न तरह के आहार से प्राप्त किया जाता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि प्रोटीन जैसे पोषक तत्व को पाने के लिए सही प्रकार के स्त्रोत को चुना जाए, खासतौर से पौधों से जुड़े आहार क्योंकि यह ज्यादातर भारतीय आहार का हिस्सा होते है। पौधों पर आधारित प्रोटीन में सोया से जुड़े उत्पाद, अनाज जैसेकि क्वनिया, बीज जैसे चिया बीज और हेंम के बीज शामिल है।
प्रोटीन और कैल्शियम- अगर आपके बच्चे में प्रोटीन प्रचुर मात्रा होगा तो शरीर में कैल्शियम भी तेज़ी से अवशोषित होगा। हड्डियां सिर्फ कैल्शियम से नहीं बनी होती बल्कि प्रोटीन भी महत्वपूर्ण मात्रा में हड्डियों में होता है। प्रोटीन हार्मोमोन के विकास में महत्वपूर्ण कारक होता है जो स्कूली बच्चों के विकास को प्रभावित करता है। अगर बच्चों में प्रोटीन की कमी हो जाए तो उनमें ओस्टियोपोरिसस और फ्रेक्चर होने का रिस्क बढ़ जाता है। प्रोटीन सामान्य शारीरिक विकास और शरीर के टिशू बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए बच्चों के रोज़ाना के आहार में दो से तीन सर्विंग प्रोटीन शामिल करना जरूरी है। प्रचुर मात्रा में प्रोटीन से हड्डियां सेहतमंद बनती है। हालांकि अगर प्रोटीन का स्तर बढऩे पर हड्डियों से कैल्शियम खत्म होने लगता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए बच्चों के आहार में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम शामिल करना जरूरी है।
विकल्प चुनें- ये देखा गया है कि बढ़ती उम्र में कुपोषण के शिकार बच्चे व्यस्क होने पर शरीर की लंबाई और गठीलेपन में कमी रह जाती है। नेशनल न्यूट्रिशन मॉनिटरिंग बोर्ड पिछले 25 सालों से शहरी व ग्रामीण भारतीयों में प्रोटीन सेवन पर अध्ययन कर रहा है। बोर्ड का कहना है, ” करीब एक तिहाई अस्वस्थ ग्रामीण जनसंख्या की जरूरते पूरी न होने से वह रिस्क पर है। जिन लोगों की डाइट में अपर्याप्त फल और सब्जियां है, उनमें कमी के रिस्क का स्तर अपेक्षाकृत कम बी एम आई है।” ग्रामीण भारत में ज्यादातर कैलोरी अनाज और बाजरे से पूरी की जाती है। कुछ प्रोटीन युक्त आहार सभी को अपनी डाइट में शामिल करने चाहिए और खासतौर से बच्चों के आहार में तो जरूर होने चाहिए। यह मेवे, ओट्स, अंडे, डेयरी उत्पाद, ब्रोकली, क्वनिया, टूना और दाल है।
ऐसे करें मदद – क्लिनिकल न्यूट्रिशन व डायटिशियन विभाग की रीजऩल हेड रितिका समादार कहती है, ” बच्चों को शुरूआत से ही पोषण, स्वस्थ भोजन के विकल्प और कसरत के महत्व को बताना चाहिए। इससे बच्चों को जंक आहार और अस्वस्थ जीवनशैली से दूर रखा जा सकता है। बच्चों को कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार खाने के लिए प्रेरित करें ताकि उसकी सिफारिशी डायटरी अलांउस पूरा हो सकें।” तो बच्चों को समझाए कि जो वह खा रहे है, उसका प्रभाव उनके शरीर पर कैसा पड़ेगा। जब वह इस प्रक्रिया को समझ जाएगें तो उन्हें पोषक तत्वों से युक्त आहार खाने और पीने के लिए प्रेरित करें। जब आपका बच्चा बड़ा होने लगे तो उसके साथ मिलकर पोषक तत्वों से युक्त आहार तैयार करें जिसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और अन्य खनिज शामिल हो।

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