विधेयक के विरोध में पत्रकारों ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन

काले कानून पर हुआ पुर्नविचार तो नहीं करेंगे बर्दाश्त
श्रीगंगानगर, 25 अक्टूबर (नि.स.)। राजस्थान सरकार की ओर से विधानसभा में पेश किए गए लोक सेवक संरक्षण संबंधी विधेयक के विरोध में बुधवार को हनुमानगढ़ में एकजुट हुए पत्रकारों ने सरकार को चेतावनी दी है कि लागू करना तो दूर यदि सरकार ने लोक सेवक संरक्षण संबंधी विधेयक पर पुर्नविचार करने का कदम उठाया तो बर्दाश्त नहीं होगा। इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब के बैनर तले क्लब सदस्यों ने इस विधेयक के विरोध में रा’यपाल के नाम अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रकाश चौधरी को ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष बालकृष्ण थरेजा के नेतृत्व में एडीएम से मिले सदस्यों ने बताया कि राजस्थान सरकार की ओर से भ्रष्टाचार करने वाले राजनेताओं एवं नौकरशाह के खिलाफ मीडिया की ओर से समाचार प्रकाशित नहीं करने को लेकर लाए जा रहे विधेयक से न केवल लोकतंत्र कमजोर होगा वरन राजस्थान में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा किसी भी दागी लोक सेवक को यह एक प्रकार से बचाने के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा।यह विधेयक भारतीय संविधान भी भावना के अनुकूल न होने के कारण अनैतिक व असंवैधानिक है। अगर ऐसा होता है तो यह आपातकाल के समय की याद दिलाएगा। इस विधेयक से पत्रकारिता और पत्रकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। यही नहीं इस विधेयक के पारित होने से पत्रकारिता के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराएंगे। क्लब सदस्यों ने विधेयक की पुरजोर तरीके से निंदा करते हुए इस विधेयक को ठंडे बस्ते में डालने की बजाए इसे रद्द कर स’चाई उजागर करने की आजादी को बरकरार रखने की मांग की। इस मौके पर क्लब के पूर्व अध्यक्ष मदन अरोड़ा, महासचिव राजू रामगढिय़ा, दीपक भारद्वाज, गुलाम नबी, कपिल शर्मा, अदरीश खान, अश्वनी डूमरा, निर्मल सिंह, विश्वास भटेजा, विशु वाट्स, ललित मोहन पारीक, पुरुषोत्तम झा, विक्रम सिंह, राकेश सहारण, बलजीत सिंह, पंकज मिश्रा, हरदीप सिंह, शक्तिसिंह, राजेश अग्रवाल, रामनिवास सिंवर, मनीष शर्मा, जाकिर खान, भवानी तिवाड़ी, हिमांशु मिड्ढा, विकास आचार्य, गुरमीत सिंह आदि मौजूद थे।

 

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