टाइमपास वाला प्यार नहीं कर सकती : : Rakul Preet Singh

जल्द ही फिल्म दे दे प्यार दे लेकर आ रहीं बॉलिवुड ऐक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह का कहना है कि एक दिन वह अपने लिए सही इंसान ढूंढ़ लेंगी। उन्होंने कहा कि वह टाइमपास वाला प्यार नहीं कर सकती। ऐक्ट्रेस रकुलप्रीत सिंह ने फिल्म यारियां से बॉलिवुड में शानदार डेब्यू किया था। इसके बावजूद, हिंदी फिल्मों के नजर आने के बजाय वह साउथ की ओर मुड़ गईं। साउथ इंडियन सिनेमा में 3 साल तक धमाल मचाने के बाद पिछले साल फिल्म अय्यारी से लौटीं रकुल जल्द ही अजय देवगन और तब्बू जैसे मंजे हुए कलाकारों के साथ फिल्म दे दे प्यार दे में नजर आएंगी। पेश है उनसे खास बातचीत
फिल्म दे दे प्यार दे में जिस तरह 50 साल के आदमी और 26 साल की लड़की के रिलेशनशिप को सब्जेक्ट बनाया गया है, उसकी काफी चर्चा हो रही है। आपने जब पहली बार कहानी सुनी, तो क्या रिएक्शन था?
मुझे तो सब्जेक्ट बहुत इंट्रेस्टिंग लगा था। लव रंजन (फिल्म के राइटर) की खासियत ही यही होती है उनका सब्जेक्ट रेग्युलर नहीं होता है, फिर भी बहुत रिलेटेबल होता है। हमारी कहानी से भी लोग रिलेट करेंगे, क्योंकि आज ऐसे रिलेशनशिप हो रहे हैं, जहां उम्र का फासला ज्यादा है। हम भले ही इसे ह्यूमर में कह रहे हैं, पर यह बहुत ही प्रोग्रेसिव फिल्म है। मेरे हिसाब से फिल्में अपने समय को दिखाती हैं। जैसा समाज में हो रहा होता है, वैसी फिल्में बनती हैं। जैसे दोस्ताना बनी, क्योंकि लोग गे अधिकारों वगैरह की बात कर रहे थे। अगर आपके बीच कनेक्शन है, तो उम्र में अंतर से फर्क नहीं पड़ता।
फिल्म के ट्रेलर में आपका एक डायलॉग है, ज्यादा परफॉर्मेंस प्रेशर लो, लेकिन क्या फिल्म में अजय और तब्बू जैसे सीनियर ऐक्टर्स के साथ काम करते वक्त आप पर परफॉर्मेंस प्रेशर था?
मैं प्रेशर नहीं लेती। मैं हमेशा से ये करना चाहती थी। बड़ी फिल्म का हिस्सा बनना चाहती थी, अच्छे ऐक्टर्स के साथ काम करना चाहती थी। अगर मैं दो नैशनल अवॉर्ड विनिंग ऐक्टर्स के साथ काम कर रही हूं, तो मैं भी अपना बेस्ट दूंगी न। मेरे लिए यह काफी एक्साइटिंग था कि मैं भी अच्छे सीन्स कर रही हूं, दो बेहतरीन ऐक्टर्स के बीच भी लोग मुझे नोटिस कर रहे हैं, तो मेरे लिए इससे ज्यादा बड़ी खुशी नहीं हो सकती।
यह तो आपके किरदार आयशा की सोच है कि प्यार हो, तो उम्र में फासला मायने नहीं रखता। रकुल इस का इस बारे में क्या मानना है?
रकुल तो अभी सिंगल है, बहुत टाइम से तो मैं इस बारे में क्या राय दे सकती हूं (हंसती हैं ), जब तक मैं खुद प्यार में पड़ूं या जब तक यह मेरे साथ यह न हो। हां, मेरे दोस्त हैं, जिनके पार्टनर और उनके बीच में दस-पंद्रह साल का एज गैप है। मेरी एक दोस्त है, जिसने अपने फादर की उम्र के शख्स से शादी की है। इसीलिए, मैं जजमेंटल नहीं हूं, अगर वे खुश हैं। यह उनकी लाइफ है।
फिल्मों में बड़े उम्र के लड़के और कम उम्र लड़की की प्रेम कहानी तो दिखाई जाती है, पर लड़की अगर बड़ी हो तो उसे एकतरफा प्यार या लस्ट की तरह पेश किया जाता है। क्यों?
यार, मुझे लगता है कि अगर कोई बनाना चाहता है, तो उस पर भी लव स्टोरी बना सकता है। मैं अब भी यही कहूंगी कि अगर दो लोग खुश हैं, तो उम्र से कुछ फर्क नहीं पड़ता है। ऐसी कितनी जोडिय़ां हैं, जिसमें लड़की बड़ी है। सबसे बड़ा उदाहरण प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस हैं। वे साथ में इतने खूबसूरत लगते हैं और ये केवल एक केस नहीं है। ऐसे बहुत सारे हैं तो अगर कोई उससे इंस्पायर होकर फिल्म बनाना चाहता है तो ठीक है। मैं अब भी यही बोलूंगी कि प्यार उम्र से परे है। प्यार में दो लोग के बीच कनेक्शन जरूरी है।
आप तेलंगाना में बेटी बचाओ मुहिम से जुड़ी हैं। जमीनी स्तर पर क्या दिक्कतें देखीं?
पहले तो, मैं फौजी हूं, मैं पूरे देश से हूं। औरतों के मुद्दों की बात करें तो जमीनी हकीकत तो दिल तोडऩे वाली है, जिस तरह का टॉर्चर औरतें झेलती हैं। हम टीवी पर इन योजनाओं का प्रचार करते हैं लेकिन इंटीरियर इलाकों तक नहीं पहुंचता।
आपने कहा, आप फौजी हैं। अपने देश को लेकर लोगों को बड़ी सारी शिकायतें हैं। लोग तमाम दिक्कतों का रोना रोते हैं। आप क्या सोचती हैं?
मैं अपने देश से बहुत प्यार करती हूं। मैं कहीं बाहर रह ही नहीं सकती हूं। मेरे पास ग्रीन कार्ड था, लेकिन मैंने उसे लौटा दिया। मैं दिल से देसी हूं। अगर आप अपने घर को घर मानते हैं, देश को देश मानते हैं, तो एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते कहीं न कहीं जो हो रहा है, उसके लिए आप भी जिम्मेदार हैं। अगर हर इंसान रेप करने से पहले सोचे कि ये मेरी बहन हो सकती है, तो प्रॉब्लम नहीं होगी। अगर हर इंसान मर्डर करने से पहले सोचे, तो क्राइम रुक जाएगा। अगर आप सड़क पर थूकने से पहले सोचो कि ये आप अपने घर में करेंगे? तो यह इतनी बेसिक चीज है, प्रॉब्लम यह है कि हम अपने घर को साफ रखते हैं, लेकिन देश को नहीं। मेरे हिसाब से फिल्में अपने समय को दिखाती हैं। जैसा समाज में हो रहा होता है, वैसी फिल्में बनती हैं।
आपकी पहली हिंदी फिल्म यारियां काफी हिट थी। उसके बाद फैंस आपको और ज्यादा हिंदी फिल्मों में देखने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन आप साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में चली गईं। ऐसा क्यों?
कोई बात नहीं, वे अभी देख लेंगे, होपफुली। देखिए, मेरा मानना है कि जो किस्मत में होता है, वह वैसे ही होता है। मैंने ब्रेक लेने का सोचा नहीं था। दरअसल, यारियां रिलीज होने से पहले मैंने अपनी पहली तेलुगू फिल्म की शूटिंग शुरू कर दी थी। वह यारियां से दो महीने पहले रिलीज हुई। फिर, जब यारियां आई और हिट हो गई, तो मेरे पास इतना काम आ गया कि मैंने ये सोचा नहीं कि इधर जाना है या उधर जाना है। मुझे जो काम मिल रहा था, मैं करती जा रही थी। मैं वहां ज्यादा बड़ी फिल्में कर रही थी। मैंने सोचा कि मैं उसे तब छोडूंगी, जब यहां उससे बड़ा मौका होगा। बाकी, यहां-वहां का मैंने ज्यादा सोचा नहीं, न मैं अब सोचती हूं। मेरा मानना है कि जो दिल को सही लगे, वह करना चाहिए। इधर, मैं धोनी बायॉपिक करने वाली थी, लेकिन डेट्स इश्यूज की वजह से नहीं कर पाई। शिमला मिर्ची शूट की थी, जो किसी प्रॉब्लम में फंस गई। उसके बाद अय्यारी की, अय्यारी रिलीज होने के पहले ही मैंने दे दे प्यार दे की शूटिंग शुरू कर दी थी और अब मरजावां कर रही हूं।
आपके लिए प्यार के क्या मायने है?
मुझे प्यार पर बहुत ज्यादा भरोसा है। मेरा मानना है कि यह बहुत ही खूबसूरत चीज है। अगर आप एक सही रिलेशनशिप में हैं, तो वह आपकी जिंदगी को और खूबसूरत बनाता है। आपका स्ट्रेस दूर करता है, न कि स्ट्रेस देता है, अगर वह इंसान सही हो। मुझे प्यार पर पूरा यकीन है और मुझे लगता है कि एक दिन मैं अपने लिए सही इंसान ढूंढ़ लूंगी। मैं टाइमपास वाला प्यार नहीं कर सकती।

 

 

 

 

 

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