पुस्तक प्रांजलि किसी धरोहर से कम नहीं : माहेश्वरी

जयपुर, 22 नवम्बर (एजेंसी)। उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने राम कृपालु शर्मा की काव्य-कृति प्रांजलि के लोकार्पण के बाद कहा कि छायावाद – रहस्यवाद जैसी गूढ़ काव्यशैली की 82 कविताओं से सजी यह पुस्तक अपने भावपूर्ण कथ्य एवं स्तरीय मुद्रण की दृष्टि से किसी धरोहर से कम नहीं है। वे मंगलवार को संजय शर्मा संग्रहालय परिसर में आयोजित लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थी। पुस्तक लोकार्पण से पूर्व माहेश्वरीने संजय शर्मा संग्रहालय का अवलोकन करने के उपरांत कहा कि हस्तलिखित पांडुलिपियों और पुरा महत्त्व की दुलर्भ कलावस्तुओं का विशाल संग्रह किसी एक व्यक्ति द्वारा किया जाना अद्भुत, अकल्पनीय एवं अभिवन्दनीय है। उन्होंने कहा कि एक निजी संग्रहालय में ऐसी अनमोल एवं दुलर्भ कृतियों का विपुल संकलन अपने आपमें एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। शिक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संग्रहालय में उपलब्ध प्राच्य महत्त्व की समृध्द सामग्री आने वाली पीढ़ी के लिए भी उपयोगी होगी। काव्यकृति के लेखक वयोवृध्द राम कृपालु शर्मा ने अपनी 18 वर्ष की आयु में लिखी प्रांजलि के प्रथम प्रकाशन के समय 1954 में उपस्थित हुई कठिनाइयों और सृजन के साहित्यिक मूल्यांकन हेतु तत्कालीन मूर्धन्य साहित्यकारों सुमित्रानन्दन पंत, रामकुमार वर्मा एवं रामकृष्ण शुक्ल से भेंट के अनुभवों का साझा किया। शर्मा ने संग्रहालय के लिए प्राचीन वस्तुओं एवं प्रामाणिक ग्रन्थों के संकलन हेतु किये गये प्रयासों और यात्राओं का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के संयोजक व संग्रहालय के सचिव तिलक शर्मा ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि मेरे पिता राम कृपालु शर्मा कवि हृदय होने के साथ-साथ प्राच्य विद्याओं के भी संरक्षक एवं संग्रहकर्ता है। उन्होंने अपने पिता के पुरा सामग्री के पुरोधा के रूप में किये गये कार्यों पर भी प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. नेरन्द्र शर्मा कुसुम ने कहा कि साहित्य कभी भी बासी नहीं होता, वह अपने प्राणतत्व के कारण सदैव ताजा होने के कारण पाठकों को सुकून देता है। पुस्तक की काव्य शैली और सामग्री की विवेचना करते हुए उन्होंने कहा कि ताजगी लिए हुए प्रांजलि आज भी प्रासंगिक है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए संस्कृत विद्वान् कलानाथ शास्त्री ने कहा कि राम कृपालु जी ने अपना जीवन को भारतीय साहित्य, संस्कृति और कला वस्तुओं के प्रति समर्पित कर दिया । शास्त्री ने पुस्तक के लेखक और उनकी रचनाशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह सभी को आश्चर्य से अभिभूत करता है कि पुरा सम्पदा संरक्षक रामकृपालु जी ने साठ वर्ष पूर्व ऐसी कविताएं लिखीं। इस अवसर पर हिन्दी भाषा के विद्वान् और कवि डॉ. हरिराम आचार्य ने भी राम कृपालु जी की सृजनशीलता का सरस शब्दों में विश्लेषण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति जे.के. रांका ने समारोह की सुन्दर काव्यमयी शैली में समीक्षा की। अंत में त्रिचा शर्मा ने आगन्तुकों का अभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. आशा शर्मा
ने किया।

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