#Metoo के सपोर्ट में सामने आईं रवीना टंडन, कहा-महिलाएं चुप्पी तोड़ रहीं

 

सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री जैसा ग्लैमर जगत ही क्यों, इंडस्ट्री, कॉरपोरेट, मीडिया से लेकर कौन सा क्षेत्र ऐसा है जहां महिलाओं का शोषण नहीं होता। यह आज के समय का वह सवाल है जिसका सच सभी जानते हैं। महिलाएं कदम-कदम पर शिकार बनती हैं। महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बीच समाज और व्यवस्था की यह खोखली सच्चाई है मगर इसमें एक सुखद पहलू यह है कि महिलाएं अब चुप्पी तोड़ रहीं हैं। भले ही 10 साल बाद ही सही मगर सच सामने लाना अपने आप में हिम्मत का काम है। एक कार्यक्रम में शिरकत करने मुजफ्फरपुर आयीं फिल्म अभिनेत्री रवीना टंडन ने वॉलीबुड के साथ ही अन्य क्षेत्रों में हो रहे महिलाओं के शोषण से लेकर मी टू पर अपनी बेबाक राय दी। ‘ से बातचीत में रवीना टंडन ने महिलाओं के शोषण के विरोध में मी टू को एक ऐसा मंच करार दिया जहां महिलाएं अपनी बात रख सकती हैं।अभिनेत्री ने महिला सशक्तीकरण के बीच इस तरह के शोषण की बात सामने आने को समाज का कड़वा सच बताते हुए कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा होता है। यह सच है मगर क्या यह झूठ है कि कौन सा दफ्तर या क्षेत्र ऐसा है जहां महिलाओं का शोषण नहीं होता। ऐसी महिलाएं जो अपनी बात अदालत या प्रशासन तक नहीं पहुंचा पाई, उनके लिए मी टू पूरे समाज और व्यवस्था तक अपनी बात पहुंचाने का माध्यम बना है। सशक्त महिलाएं चुप्पी तोड़ रही हैं मगर अभी बदलाव आना बाकी है। रवीना ने कहा कि महिलाओं को इसका सपोर्ट करना चाहिए। किसी को भी यह हक नहीं कि हमें वस्तु समझे। रवीना ने कहा कि मैं भी बेटी हूं और बेटियों की मां भी हूं। आज के समय में भी लड़कियों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है, यह सोच ही मुझे झकझोर देती है। मातृ जैसी फिल्म मैंने इसी वजह से की।

 

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