ई-सिगरेट पर रोक नहीं बल्कि उसे विनियमित करने की अपील

जयपुर, 6 जून (एजेन्सी)। एसोसिएशन ऑफ वैपर्स इंडिया (एवीआई) ने राजस्थान में ई-सिगरेट और वैपिंग को विनियमित करने के लिए एक अच्छी नीति तैयार करने में राज्य सरकार को मदद की पेशकश की है। इसमें कहा गया कि प्रतिबंध से जहां लोग सुरक्षित विकल्पों से वंचित हो जाएंगे, वहीं तम्बाकू उद्योग को संरक्षण मिलेगा। ग्लोबल एडल्ट टोबाको सर्वे (जीएटीएस)-2 के मुताबिक राजस्थान में 68 लाख लोग सिगरेट और बीड़ी पीते हैं। अगर समय से उनकी इस लत को छुड़ाया नहीं गया तो उनकी समय पूर्व मृत्यु हो सकती है। भले ही राज्य सरकार ने करारोपण और तम्बाकू नियंत्रण के उपायों के माध्यम से लोगों को धूम्रपान के प्रति हतोत्साहित करने के सराहनीय प्रयास किए हैं, लेकिन इसका असर अपर्याप्त रहा है। मौजूदा वक्त में धूम्रपान में कमी की महज 5.6 फीसदी की दर से कई लोगों की जान नहीं बच सकती है। एवीआई के डायरेक्टर सम्राट चौधरी ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि सरकार को अब अतिरिक्त प्रयास करने चाहिए। चौधरी ने कहा कि धूम्रपान करने वालों को ई-सिगरेट के इस्तेमाल की मंजूरी संभावित तौर पर अच्छा प्रयास होगी, जो धूम्रपान करने वालों के जीवन की रक्षा की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। धूम्रपान की तुलना में ई-सिगरेट एक कम नुकसानदायक विकल्प है। ऐसा अमेरिका, यूके और यूरोपियन यूनियन जैसे विकसित देशों में देखने को मिला है। एवीआई पदाधिकारी ने सुझाव दिया कि कोई नीति बनाते समय राजस्थान सरकार को इस तथ्य को ध्यान में रखना चाहिए कि ई-सिगरेट को अपनाने से धूम्रपान करने वालों को होने वाला संभावित नुकसान 95 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि रॉयल कॉलेज ऑफ फिजीशियंस, यूके पब्लिक हैल्थ इंग्लैंडय नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग मेडिसिन, यूएसएय कैंसर रिसर्च यूके और अमेरिकन कैंसर सोसाइटी सहित कई अग्रणी स्वास्थ्य संगठनों ने तुलनात्मक रूप से धूम्रपान करने वालों के लिए ई-सिगरेट की सुरक्षा को प्रमाणित किया है। एवीआई के को-डायरेक्टर प्रतीक गुप्ता ने कहा कि हम सरकार को ऐसे पुराने धूम्रपान करने वालों से भी रूबरू कराएंगे, जिन्होंने ई-सिगरेट के इस्तेमाल से धूम्रपान छोड़ दिया और उनके जीवन में खासा सुधार देखने को मिला। सरकार को धूम्रपान छोडऩे से उनके स्वास्थ्य में हुए सुधार पर भी गौर करना चाहिए।

 

 

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