मैंने कॉम्प्रोमाइज किया होता, तो कहीं और होती रिचा चड्डा

रिचा से हमारी यह मुलाकात बेंगलुरु के खूबसूरत और एंटीक सेट पर हुई। शकीला के खूबसूरत और सेक्सी गेटअप में सजी रिचा झूले पर बैठनेवाला सीन एक ही टेक में ओके कर देती हैं। रिचा के अलावा, सेट पर निर्देशक इंद्रजीत लंकेश और पूरी कास्ट व क्रू मौजूद थी। इस अवसर पर फिल्म का लोगो भी लॉन्च किया गया। रिचा शकीला की भूमिका को लेकर बेहद उत्साहित हैं। शकीला 90 की दशक की उस अडल्ट स्टार पर आधारित है, जिनकी फिल्में 16 भाषाओं में डब की गई थीं। एक समय शोहरत की बुलंदियों पर राज करनेवाली शकीला के जीवन की त्रासदी यही है कि आज वे वैसा ही फटेहाल जीवन जीने के लिए अभिशप्त हैं, जैसा उनका बचपन गुजरा।
अडल्ट स्टार शकीला की बायॉपिक में आप शीर्षक भूमिका में हैं। क्या आपको यह डर है कि इसकी तुलना विद्या बालन की डर्टी पिक्चर से होगी, क्योंकि सिल्क स्मिता भी अडल्ट स्टार थीं?
देखिए, उस तुलना को मैं रोक नहीं पाऊंगी। मुझे खुशी है कि कम से कम मेरी फिल्म की तुलना अच्छी फिल्म और एक प्रतिभावान अभिनेत्री के साथ हो रही है। अगर वे यह समझ रहे हैं कि ये दोनों फिल्में एक ही जोन की हैं, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं, मगर मैं जानती हूं कि ये दोनों फिल्में एक-दूसरे से मुख्तलिफ हैं। आज जब मेरे करियर में सब कुछ ठीक चल रहा है, तो मैं एक खराब फिल्म करने का रिस्क क्यों लूं? ‘शकीला’ की कहानी में ऐसे तथ्य हैं, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। वह बहुत कुछ झेल चुकी हैं।
फिल्म जगत में शकीला की तरह रातों-रात स्टार बन जाने या एक पल में जमीन पर आ जाने का डरवाना सच सामने है। आपको इंडस्ट्री यह पहलू डराता है?
नहीं, मुझे कभी टॉप की होड़ थी ही नहीं, तो वह मुझे डराता नहीं है। मेरा मकसद है कि 10 साल बाद लोग मेरी फिल्मॉग्रफी देखें, तो उन्हें 3-4 कल्ट फिल्में नजर आएं। मैं मसान, गैंग्स ऑफ वासेपुर, ओये लकी ओये जैसी फिल्मों पर गर्व करती हूं। मैंने देखा है कि हमारी इंडस्ट्री में लोग कैसी-कैसी बातें करते हैं कि वह हीरोइन ढल गई, उसका टाइम चला गया। इस मौके पर मुझे कैफी आजमी साहब का एक शेर याद आता है, तेरी हस्ती भी है एक, चीज जवानी ही नहीं, तो मेरी जिंदगी में सिर्फ मेरा काम नहीं और भी बहुत कुछ है। मैं यहां क्या लेकर आई थी, जिसे खोने का डर हो? न मैंने कोई कॉम्प्रोमाइज किया है, न मुझ पर कोई केस चल रहा है, न मैंने कोई अवैध संपत्ति खरीदी है। मुझे किसी चीज का डर नहीं। मुझे डर लगता है, अपनों के खो जाने का, जिन्हें मैं बहुत शिद्दत से चाहती हूं। मेरे हाथ पर मेरे माता-पिता का टैटू है। मेरे लिए मेरा परिवार बहुत अहमियत रखता है। मैं अपनी शांति के साथ कभी समझौता नहीं करती।
डर्टी पिक्चर के लिए विद्या बालन ने वजन बढ़ाया था? आपने शकीला के किस तरह की तैयारी की?
मैं थोड़ी चौड़ी हो गई हूं। मैंने भी अपना वजन बढ़ाया, मगर 5 किलो। मैंने शर्म छोड़ दी है। मेरे पेट का टायर छूट गया है, लेकिन मैंने शकीला जितना वजन नहीं बढ़ाया।
आप जब वास्तविक अडल्ट स्टार शकीला से मिलीं, तो उनका रिऐक्शन कैसा था?
मैं जब उनसे मिली, तो वह मुझे पहचानती ही नहीं थी। उनसे मिलना एक प्लेन स्लेट की तरह साबित हुआ। आप जब उनसे मिलती हैं, तो आपको चुलबुली, मोटी, मगर बेबी फेसवाली एक 45-50 साल की औरत नजर आती है। उनमें दर्द भी है, जख्म भी, मगर आप को-रिलेट नहीं कर पाते कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? मेरी नजर में ऐसा था कि मैं अपने जमाने की सुपरस्टार से मिल रही हूं। शुरू के दो-तीन मिनट बहुत ऑकवर्ड थे, पर उन्होंने मुझे अपनी जिंदगी की ऐसी बातें बताई, जो इंसान शायद सायकॉलजिस्ट को ही बता सकते हैं। मुझे लगा कि यह मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं उनकी कहानी लोगों तक पहुंचाऊं। उनका मानना है कि उनकी जिंदगी में जो कुछ हुआ, उसमें उनका कोई दोष नहीं। हम पिछले 5 सालों से फेमिनिज्म की बातें सुन रहे हैं और समझ रहे हैं, मगर यह औरत नब्बे के दौर में उस फेमिनिज्म को जी चुकी हैं। बिना पढ़ी-लिखी एक ऐसी औरत फर्श से अर्श तक पहुंचती है और शोहरत की दुनिया में राज करती है, मगर आज सालों बाद वह उसी एक कमरे के घर में पाई जाती है, जहां से उसने अपनी जर्नी शुरू की थी। इसके बावजूद, वह लड़ती है और फाइटर बनती है, तो मेरी नजर में सच्चा फेमिनिज्म वही है। उनके बचपन का ग्राफ बहुत ही रोचक है। उनके बारे में ऐसी कई रहस्य हैं, जो लोगों को पता ही नहीं हैं। अभी भी दुबई के शेख उन्हें अपने कार्यक्रमों में महज चीफ गेस्ट की तरह बुलाते हैं कि वह आकर बैठी रहें और वे उन्हें देखते रहें। किसी मेल सुपरस्टार से उनकी टक्कर भी फिल्म में दर्शाई गई है। मैंने उनसे पूछा था कि उन्हें कैसा लगता है कि एक बंगले से वह उसी घर में जा पहुंची, जहां से उन्होंने अपनी शोहरत की यात्रा शुरू की थी। उनके जवाब ने मुझे सिहरा दिया। वह बोलीं, ‘बेटा मैं यहां नहीं रहती, (अपने दिमाग की ओर इशारा करते हुए) मैं यहां रहती हूं। वह इस कदर सुलझी हुई हैं।
आप मीटू मूवमेंट के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
बहुत अच्छा है यह मूवमेंट। अच्छे-अच्छों के नकाब उतर गए। आपको शक करना है, बेशक कीजिए क्योंकि इसका एक पहलू यह भी रहा है कि लड़कियों के लिए कोई बैड डेट थी और आपने गुस्सा निकालने के लिए ट्विटर पर उसे मीटू के साथ टैग कर दिया। बैड डेट, मीटू नहीं है। हैरसमेंट की परिभाषा को स्पष्ट करना होगा। इसके बहाने बहुत कुछ हो रहा है। उसमें जेन्यूइन केसेज दब रहे हैं।
मीटू के जरिए जितने चेहरे सामने आए, उसमें सबसे ज्यादा शॉकिंग आपके लिए क्या था?
मेरे लिए आलोक नाथ की असलियत का सामने आना किसी सदमे से कम न था। मैं दाद देती हूं विंता नंदा की, जो उन्होंने इस उम्र में आकर अपने साथ घटे भयानक सच को लोगों के सामने लाने की हिम्मत की। इतना आसान नहीं है, इस बात का खुलासा करना। मुझे तो घिन आ गई। संध्या का बयान पढ़कर रोंगटे खड़े हो गए। वह उनके पिता की भूमिका कर रहे थे और ये हरकत? गिरावट की हद कर दी उन्होंने।
आपको लगता है कि इंडस्ट्री के बड़े स्टार्स इस मामले में आगे नहीं आए?
मेरे लिए इस विषय पर बोलना आसान है। मुझपर 400 सौ करोड़ नहीं टंगे हुए हैं, मगर किसी बड़ी हस्ती के लिए यह बोलना मुश्किल है। अक्षय कुमार, अजय देवगन और आमिर खान ने स्टैंड लिया और लिखा कि वे दोषियों के साथ काम नहीं करेंगे।
आपके साथ कभी मीटू जैसा अनुभव गुजरा है?
मैं समझती हूं कि इंडस्ट्री में कोई भी लड़की ऐसी नहीं है, जो हैरसमेंट से न गुजरी हो और यह बात मुझ पर भी लागू होती है। मीटू को लेकर जिस तरह के जघन्य सच सामने आ रहे हैं, वैसा मेरे साथ कुछ घटा नहीं है, मगर मैं आपको इतना जरूर कहूंगी कि मेरे टैलंट को देखते हुए मेरा करियर शायद वहां गया नहीं, जहां जाना चाहिए था। जाहिर है, मैंने भी कॉम्प्रोमाइज किया होता, तो मेरा करियर कुछ और होता। जो लोगों को ना बोलेगा, वह धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *