एटीएम में कागज का टुकड़ा फंसाकर लाखों निकाले

श्रीगंगानगर, 14 मई (एजेन्सी)। एटीएम मशीनें बनाने वाली कम्पनियों के लिए यह चौका देने वाली खबर है कि वे जिन मशीनों को न जाने कितने प्रकार के सिक्योरिटी चैक और फीचर्स के साथ निर्मित करते हैं कि कोई उनमें किसी भी तरह से सेंध न लगा सके। मगर श्रीगंगानगर जिले के दो युवकों ने महज एक कागज के टुकड़े से इन एटीएम मशीनों के तमाम सिक्योरिटी चैक और फीचर्स पर सवालीय निशान लगा दिया है। गिरफ्तार किये हुए इन दोनों युवकों से पुलिस, बैंक के अधिकारियों-एक्सपर्ट इंजीनियर्स और कैश लोडिंग करने वाली कम्पनी के ऑफिसरों ने क्राइम सीन को रि-क्रिएट करवाकर देखा, तो भौचक्के रह गये। सिर्फ कागज के एक टुकड़े को इन युवकों ने एटीएम मशीन को ऐसी जगह फंसाया कि जिससे मशीन ने डिपोजिट हुए कैश की इलेक्ट्रोनिक गणना की और अकाउंट में कैश जमा हो जाने की स्लिप भी प्रिंट कर निकाल दी, लेकिन कैश, एटीएम के कैश बिन तक नहीं पहुंचा। वह रास्ते में ही अटक गया।वहीं से इन युवकों ने कैश को वापिस निकाल लिया। स्थानीय कोतवाली पुलिस ने बैंक ऑफ बड़ौदा की एटीएम मशीनों में कैश लोडिंग करने वाली एक निजी कम्पनी सीएमएस इंफ्रोसिस्टम लिमिटेड के सम्भागीय प्रबंधक राहुल स्वामी द्वारा चार मई को दर्ज करवाये गये मुकदमे की तफ्तीश के तहत गिरफ्तार दोनों मुल्जिमों राजेश बिश्रोई निवासी चक 3 एमएसडी और योगेश बिश्रोई निवासी रायसिंहनगर से क्राइम सीन को क्रिएट करवाकर देखा। इसकी बाकायदा वीडियोग्राफी भी करवाई। पुलिस ने बताया कि रिमांड पर चल रहे राजेश और योगेश को विगत दिवस रायसिंहनगर में बैंक ऑफ बड़ौदा की रि-साइकिलर एटीएम पर लेकर गये, जिसमें विद्ड्रॉल के साथ कैश डिपोजिट की भी सुविधा है। दोनों ने बैंक एवं निजी कम्पनी के अधिकारियों व एक्सपर्ट्स इंजीनियर्स के सामने अपनी कारास्तानी का प्रदर्शन किया। इन युवकों ने पासवर्ड से एटीएम के नीचे वाले पैनल और फिर सेफ के लॉक को खोला। इसके बाद डिपोजिट करने वाले स्लॉट से मशीन के अंदर जिस जहां से होकर नकदी नीचे कैश बिन में आती है, उसके बीच वहां कागज का एक टुकड़ा फंसा दिया, जहां गणना होने के बाद एक-एक कर नोट केश बिन में जाते हैं। पुलिस ने बताया कि कागज का टुकड़ा फंसे होने के कारण ऊपर स्लॉट में डिपोजिट के लिए डाला गया कैश इलेक्ट्रोनिक गणना होने के बाद एक-एक कर नीचे कैशबिन में आता है। कैश बिन में जाने से पहले यह नोट जहां से एक-एक कर नीचे आते हैं, वहीं पर ही इन युवकों ने कागज का टुकड़ा लगा दिया, जिससे नोट नीचे न जाकर वहीं इक_े होते रहे। एटीएम मशीन ने नोटों की गणना हो जाने के बाद अकाउंट में पैसा जमा हो जाने की स्लिप निकाल देती है। नकदी कैश बिन में जाती है या नहीं, यह जानने का कोई तरीका एटीएम में नहीं होता। इसी बात का फायदा इन युवकों ने उठाया। उसी जगह से रुपये वापिस लेकर अपनी जेब में डाल लेते थे। इस तरह उनके अकाउंट में कैश डिपोजिट भी हो जाता था और कैश वापिस उसी समय वापिस उन्हें मिल जाता था। यह कारास्तानी देखकर अधिकारी हैरान रह गये।
ऐसे तरीका हुआ इजाद
पुलिस को पूछताछ में राजेश और योगेश ने बताया कि वे सीएमएस कम्पनी में बतौर कस्टोडियन काम करते थे। कम्पनी उन्हें बैंक ऑफ बड़ौदा की एटीएम मशीनों में कैश भरने के लिए देते थे। इसके लिए उन्हें कम्पनी की ओर से एटीएम के पैनल बोर्ड के पीछे सेफ को खोलने के लिए पासवर्ड देती थी। लगभग तीन महीने पहले पदमपुर में जब वे रि-साइकिलर एटीएम में कैश लोड कर रहे थे, तभी वहां एक शख्स अपने अकाउंट में कैश जमा करवाने के लिए आया। इस मशीन में पहले से ही कुछ फाल्ट था। उसके कैश जमा डिपोजिट करने पर नकदी, कैश बिन में न जाकर बीच में फंस गई। तब उन्होंन इस शख्स से कहा कि उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है। उसके अकाउंट में यह कैश डिपोजिट हो जायेगा। उसके मोबाइल पर मैसेज आ जायेगा। पुलिस के मुताबिक उक्त शख्स को कुछ समय बाद अकाउंट डिपोजिट होने का मैसेज मोबाइल फोन पर मिल गया। वह वापिस एटीएम पर आया, तब तक यह दोनों उस एटीएम को ठीक करने में लगे हुए थे। राजेश-योगेश जानकर हैरान रह गये कि नकदी, कैश बिन तक पहुंची नहीं और उक्त ग्राहक को अकाउँट डिपोजिट होने का मैसेज भी मिल गया। तब उनकी समझ में आया कि अगर मशीन में नकदी को केश बिन तक जाने से रोक दिया जाये, तो वे नकदी उड़ा सकते हैं। इन दोनों ने इस मशीन को ठीक तो कर दिया, लेकिन मशीनों में गड़बड़ी करने का रास्ता इनको समझ में आ गया। इसके बाद इन्होंने विगत 5 मार्च से 23 अप्रेल के बीच पदमपुर व रायसिंहनगर में लगी रि-साइकिलर मशीनों में कागज का टुकड़ा फंसाकर नकदी निकालनी शुरू कर दी।
अब तक 17 लाख की पुष्टि
पुलिस ने बताया कि सीएमएस के सम्भागीय प्रबंधक राहुल स्वामी ने कम्पनी के इन दोनों कर्मचारियों पर 5 मार्च से 23 अप्रेल के बीच लगभग 25 लाख रुपये की चोरी करने का आरोप लगाया है। अब तक की जांच-पड़ताल में इनके द्वारा 17 लाख रुपये एटीएम से निकालने की पुष्टि हो चुकी है। इस राशि को बरामद करने के लिए जहां, पुलिस प्रयास कर रही है, वहीें सीएमएस के अधिकारी भी इनके परिवार वालों पर दबाव बनाये हुए हैं। इन पैसों की चिंता बैंक से ‘यादा इस कम्पनी के अधिकारियों को है, क्योंकि बैंक ने एटीएम के लिए कैश कम्पनी को दिया हुआ था। आगे कम्पनी की ही जिम्मेवारी होती है। अगर एटीएम में केश कम भरा जाता है या उसमें कोई गड़बड़ी-हेराफेरी की जाती है, तो इसके लिए यह निजी कम्पनी ही जिम्मेवार है। बैंक हर महीने अपनी बैलेंस शीट को चैक करता है। बैलेंस में कुछ गड़बड़ हो तो उसकी कटौती कम्पनी को किये जाने वाले भुगतान से कर ली जाती है। इसलिए इस मामले में बैंक से ‘यादा कम्पनी वाले भागदौड़ कर रहे हैं। आज सोमवार को दोनों मुल्जिमों की रिमांड अवधि समाप्त होने पर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस के दरयाफ्त करने पर इनकी रिमांड अवधि 17 मई तक बढ़ा दी है।
यह लापरवाही भी रही
एटीएम मशीनों में गड़बड़ी कर लाखों रुपये निकालने के इस मामले में एक बड़ी लापरवाही और भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार निजी कम्पनी एटीएम में कैश भरने के लिए देते समय अपने कस्टोडियन कर्मचारियों को एटीएम मशीनें खोलने के लिए पासवर्ड नहीं बदलती थीं। एक ही पासवर्ड कईं-कईं दिन तक चलता रहता था। इस बात का फायदा भी इन कर्मचारियों ने उठाया। अगर रोज पासवर्ड बदला जाता तो शायद इन कर्मचारियों केा इतनी बड़ी गड़बड़-हेराफेरी करने का मौका नहीं मिलता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *