संजय दत्त को थप्पड़ मारना बहुत मुश्किल था जिमी शेरगिल

अभिनेता संजय दत्त की बायॉपिक को लेकर फिल्म मेकर्स और दर्शकों के अलावा बॉलिवुड के तमाम सितारे भी बेहद उत्साहित हैं। संजय के साथ मुन्ना भाई, एकलव्य और पिछले दिनों ‘साहब बीवी गैंगस्टर 3 शूट कर चुके जिमी शेरगिल ने हमसे बातचीत में संजय दत्त से जुड़ा किस्सा सुनाते हुए बताया कि मुन्ना भाई की शूटिंग के दौरान थप्पड़ वाला सीन उनके गले की हड्डी बन गया था, लेकिन जिस सीन ने रात-दिन कई महीनों तक परेशान किया, वह एक शार्ट में पूरा हो गया था। जिमी कहते हैं, संजय दत्त के साथ अभी-अभी मैंने साहब बीवी और गैंगस्टर कंप्लीट की है। मैं जब उनसे बात करता हूं तो वह पंजाबी में मुझसे बात करते हैं। उनकी बात करने, चलने और उठने-बैठने का अपना स्टाइल है। वह सेट पर अपने पंजाबी अंदाज में पुराने किस्से सुनाते हैं। उनके साथ जब भी बैठने का मौका मिलता है, खूब कहानियां सुनने को मिलती हैं। वह बहुत हंसी मजाक भी करते हैं, हंस-हंस के आपका पेट फूल जाता है। संजय दत्त बहुत मजेदार आदमी है।
बॉस मैं संजय दत्त को कोई थप्पड़ नहीं मार सकता हूं
‘संजय दत्त के साथ मेरा सबसे मजेदार और यादगार किस्सा फिल्म मुन्ना भाई में थप्पड़ वाला है। राजू हिरानी मुन्ना भाई बना रहे थे तो मुझे इसकी कहानी सुनाई थी और स्क्रिप्ट में वह थप्पड़ वाला सीन भी सुनाया था। मैंने पहली बार ही स्क्रिप्ट सुनने के बाद कहा था कि बॉस मैं संजय सर को कोई थप्पड़ मारने वाला नहीं हूं। मैं थप्पड़ मार ही नहीं पाऊंगा। फिल्म को लेकर जब भी कोई सिटिंग होती है, मीटिंग होती या फिर लुक टेस्ट होता तो मैं हर बार, हर जगह अच्छी तरह हिस्सा लेता था, लेकिन जब भी बात थप्पड़ वाले सीन की आती, मैं राजू को मना कर देता था कि मैं वह थप्पड़ वाला सीन नहीं कर पाऊंगा, मुझसे कभी भी नहीं हो पाएगा।
वह समय भी आ गया, जब मुझे थप्पड़ वाला सीन करना था
मेरे बार-बार मना करने के बाद भी राजू कुछ कहते नहीं थे। अब फिल्म शूटिंग शुरू हो रही थी, सब कुछ सही चल रहा था। फिल्म धीरे धीरे पूरी होने लगी थी और एक दिन वह समय भी आ गया, जब मुझे थप्पड़ वाला सीन करना था। मैं तो सुबह से ही अपने वैनिटी वैन से निकला ही नहीं, मैंने राजू को साफ कहा की मुझसे यह सीन नहीं हो पाएगा। मैंने राजू को साफ कहा मैं तो गाड़ी से बाहर निकलूंगा ही नहीं, मैंने तो शुरु से ही मना कर दिया था कि मुझसे यह सीन कतई नहीं हो पाएगा। मुझे मनाने के लिए सबसे पहले राजू आए, मैंने कहा आओ बैठो और कॉफी पियो, लेकिन मैं साफ कह देता हूं, मैं संजय दत्त को थप्पड़ नहीं मार पाऊंगा। मुझे समझाने-बुझाने के बाद राजू वापस चले गए, मैं फिर भी बाहर नहीं निकला।
संजय खुद राजू के साथ मेरी गाड़ी में आए और मुझे समझाना शुरू किया
थोड़ी देर के बाद राजू फिर से वापस आए, फिर भी मैं बाहर नहीं निकला। फिर कुछ और भी लोग आए, मैंने सब को मना कर दिया और मैं गाड़ी से बाहर नहीं निकला। कुछ समय के बाद अरशद वारसी आए और वह मुझे सीन का महत्त्व समझाने लगे, लेकिन मैंने अरशद को अपनी बातों से प्रभावित कर दिया और बता दिया कि यह सीन मेरे लिए बहुत मुश्किल है, मैं संजय दत्त को थप्पड़ नहीं मार सकता। अरशद शायद मेरी बात समझ गए थे। अरशद के जाने के बाद फिर से राजू आए और उन्होंने कहा कि इस सीन में वह कुछ सेटिंग कर लेंगे। जिससे थप्पड़ मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब यह बात निर्माता विधु विनोद चोपड़ा और संजय दत्त को भी पता पता चल गई थी कि मैं थप्पड़ वाला सीन करने के लिए तैयार नहीं हो रहा हूं, तो संजय खुद राजू के साथ मेरी गाड़ी में आए और उन्होंने मुझे समझाना शुरू किया कि यह सीन फिल्म के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इस सीन के बाद मुन्नाभाई का किरदार बदल जाता है। संजय ने कई तरह से समझाने की कोशिश की, बहुत मनाया कि प्लीज यार यह सीन कर लो, मैंने भी संजय दत्त को आपकी बात समझाने की कोशिश की।
सबकी जिद के आगे मुझे वह सीन करना पड़ा
लंबी बातचीत के बाद यह तय हुआ कि इस सीन में कुछ चीट कर लिया जाएगा। सीन की तैयारी हुई संजय दत्त अपने इस सीन को लेकर बहुत ज्यादा इमोशनल थे, क्योंकि इस सीन के बाद ही उनके कैरक्टर में बदलाव आता है। मैं वैन से बाहर निकला तो देखा राजू ने सीन की पूरी तैयारी कर ली है और कैमरा इस तरह सेट किया है, जिसमें चीटिंग की गुंजाइश ही नहीं है। राजू यहां मुझे मूर्ख समझ रहे थे, मैंने कहा यह क्या है राजू? यह सब संजय दत्त, अरशद और राजू सबकी मिलीभगत थी। सबकी जिद के आगे मुझे वह सीन करना पड़ा और बिना किसी भी तरह के चीट के एक शार्ट में वह पूरा सीन शूट भी हो गया। अब तो संजय दत्त की कहानी फिल्म में देखने को मिलेगी। उनकी पूरी कहानी बहुत ही दिलचस्प है। रणबीर कपूर मुख्य भूमिका में हैं, मैं बेसब्री से संजू का इंतजार कर रहा हूं।

 

 

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