शैल्बी हॉस्पिटल के नये सेंटर की घोषणा

अहमदाबाद, 7 जुलाई (एजेन्सी)। शैल्बी हॉस्पिटल, जो पूरे भारत में मल्टी-स्पेशैलिटी अस्पतालों की एक चेन का संचालन करता है, जिसका उद्देश्य लिवर प्रत्यारोपण से उन लोगों के जीवन की रक्षा करना है जिसे इसकी बेहद जरूरत है, इसके लिए एक सेंटर फॉर लिवर डीज़ीज़ एंड ट्रांसप्लांट की सुविधा एसजी हाइवे, अहमदाबाद में शुरू की गई है। हॉस्पिटल ने अब सभी प्रकार के लिवर ट्रांसप्लांट जैसे डिसीस्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, बच्चों या बड़ों के लिए, ईलेक्टिव या एमर्जेंसी ट्रांसप्लांट में विशेषज्ञता हासिल की है। हाल ही में शैल्बी की एक विशेषज्ञ टीम ने भारत में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति का लिवर प्रत्यारोपण किया, सूरत के 80 वर्षीय ब्रेन-डेड डोनर ने अहमदाबाद में एक लिवर पेशेन्ट जो क्रिटिकल स्टेज में था उसे जीवनदान दिया। ग्रीन कॉरिडॉर के माध्यम से लिवर को सूरत से अहमदाबाद लाया गया। वहीं दूसरी तरफ, उदयपुर के श्री कल्याणसिंह का सेंटर में एक सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। सर्जरी में मुख्य भूमिका डॉ आनंद के खखार एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी), और डॉ विनय कुमारन एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी) की रही इसके साथ ही अन्य टीम के सदस्य डॉ. भविन वासवड़ा और डॉ हार्दिक पटेल शामिल थे। एक रिपोर्ट के अनुसार देखा गया है कि हर साल 200,000 भारतीय में लिवर की बीमारी मृत्यु का कारण हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि उनमें से 25,000 से 30,000 को लिवर प्रत्यारोपण द्वारा बचाया जा सकता था। हालांकि, हर साल लिवर प्रत्यारोपण की वास्तविक संख्या इस के दसवें हिस्से से भी कम है। लिवर प्रत्यारोपण भारत में अपेक्षाकृत नया विकास है और यह पिछले 10 वर्षों में विश्वसनीय परिणामों के साथ नियमित प्रक्रिया बन गया। इसके अलावा, डोनर्स की कमी के कारण, ज़्यादातर लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट हो जाते हैं जिसमें परिवार का कोई सदस्य लिवर का एक हिस्सा कर दे। इस अवसर पर डॉ आनंद के खखार, एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी), एम पी शाह मेडिकल कॉलेज, जामनगर ने कहा कि गुजरात में, प्रशिक्षित प्रत्यारोपण सर्जनों की कमी के कारण लिवर प्रत्यारोपण धीमा हो गया था। पहले अहमदाबाद के कुछ सेंटर पर लिवर प्रत्यारोपण किया गया है जो डिसीस्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (एक सरल ऑपरेशन) थे, और वो भी दिगी या चेन्नई के सेंटर से आए सर्जन के द्वारा किया गया। ऐसी परिस्थितिमें, शाल्बी की यह पहल गुजरात और उसके आसपास लिवर मरीजों के लिए एक वरदान है। इससे पहले, जिन मरीज़ो को लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती थी, उन्हें मुंबई, दिगी या चेन्नई में जाना पड़ता था। इसके अलावा, रा’य में पर्याप्त लिवर प्रत्यारोपण सेवाओं की कमी के कारण कई मरीजों की मृत्यु हो गई। हेल्थकेयर डिलीवरी में इस अंतर को कम करने के लिए, शैल्बी हॉस्पिटल ने एसजी रोड अहमदाबाद में, एक लिवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम विकसित करने का फैसला किया, और वे अंतत: अन्य शैल्बी हॉस्पिटल शाखाओं में ऐसे कार्यक्रम विकसित करने की योजना बना रहे हैं, जिसे आने वाले समय में जल्दी ही राजस्थान के जयपुर में भी शुरू किया जाएगा। लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता के बारे में बात करते हुए डॉ. विनय कुमारन, एमबीबीएस और एमएस (सर्जरी), मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिगी ने कहा कि शराब पीना सिर्फ उन कारणों में से एक है जो लिवर के खराब होने का कारण बन सकता हैं। हेपेटाइटिस बी और सी भी लिवर सिरोसिस या फिर लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। बल्कि अब क्रोनिक लिवर डिज़ीज़ का सबसे आम कारण नॉन-अल्कोहलिक-स्टीटो-हेपेटाइटिस है। इसके अलावा, एक फैटी लिवर ठीक तरह से नियंत्रित नहीं हो रहे डायबीटिस के कारण विकसित हो सकता है, अधिक वजन होने के कारण, कार्बोहाइड्रेट के साथ एक अनहेल्थी डाइट लेना (दूसरे शब्दों में एक सामान्य गुजराती आहार) और पर्याप्त एक्सर्साइज़ नहीं करना इसकी वजह हो सकती है। यदि फैटी लिवर का पता नहीं लग पता और समय रहते इलाज नहीं किया जाता है, तो लिवर रोग सिरोसिस बढ़ जाता है।

 

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