लड़कों से ज्यादा किशोर लड़कियों को प्रभावित करता है सोशल मीडिया

 

आज-कल सोशल मीडिया के यूज ने लोगों की जिंदगी बदलकर रख दी है। हर कोई सोशल मीडिया पर अपनी हर एक्टिविटी पोस्ट करने और साथियों की एक्टिविटीज के बारे में जानकारी हासिल करने में लगा है। मगर, सोशल मीडिया का युवाओं के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले असर के बारे में शायद ही किसी ने सोचा है।हाल ही में हुए शोध के अनुसार, सोशल मीडिया के इस्तेमाल का किशोर लड़कों की तुलना में किशोर लड़कियों के स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रतिकूल असर पड़ता है। यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स और यूसीएल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि शुरुआती किशोरावस्था (10 वर्ष) में सोशल मीडिया पर खर्च किए गए समय का बाद की किशोरावस्था (उम्र 10-15) के अच्छे स्वास्थ्य के बीच एक संबंध है।लेखक कारा बुकर ने कहा कि हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि सोशल मीडिया के साथ शुरुआती जुड़ाव की निगरानी करना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से लड़कियों में। कारण, इसका लड़कियों की किशोरावस्था और संभवतया उनके वयस्क हो जाने पर भी उन पर काफी असर पड़ता है।लेखकों ने पाया कि किशोरावस्था में लड़कों की तुलना में लड़कियां सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिता रहे थे। 13 वर्ष की उम्र में सोशल मीडिया में लड़कियां, लड़कों से एक घंटा ज्यादा समय बिताती थीं। हालांकि, उम्र बढऩे के साथ ही लड़के और लड़कियों के सोशल मीडिया पर समय बिताने के समय में इजाफा हुआ। मगर, तब भी लड़कों से कुछ अधिक समय लड़कियां सोशल मीडिया में दे रही थीं।शोध में पाया गया कि 59 फीसद लड़कियां और 46 फीसद लड़के सोशल मीडिया पर प्रतिदिन एक या अधिक घंटे बिताते हैं। इससे लड़के और लड़कियों के सुख-प्रसन्नता में गिरावट देखी गई।अध्ययन में यूके हाउस होल्ड पैनल स्टडी के डाटा का इस्तेमाल किया गया। इसमें साल 2009 से 2015 के बीच सालाना घर के सभी सदस्यों का साक्षात्कार किया गया था। इसमें 10 से 15 वर्ष के 9,859 किशोरों से पूछा गया था कि स्कूल के आम दिनों में वह कितने घंटे सोशल मीडिया में बिताते हैं। लेखकों ने पाया कि लड़कियों में हैपीनेस स्कोर तीन अंक गिरकर 36.9 से 33.3 हो गया और लड़कों में यह दो अंक गिरकर 36.02 से 34.55 पर पहुंच गया।

 

 

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