मैं सोकर उठती हूं तो पति बिस्तर पर नहीं होते सोनम

 

सोनम कपूर इस वक्त अपनी अपकमिंग फिल्म द जोया फैक्टर के प्रमोशन में बिजी हैं। उन्होंने बात की अपनी शादी, पति, फिल्म और फिल्म इंडस्ट्री के बारे में। सोनम कपूर एक अरसे से नए प्रयोग करती आ रही हैं। आनंद आहूजा से खुशहाल शादी की चमक उनके चेहरे पर देखी जा सकती है। उन्होंने हमसे अपनी शादी, करियर, फिल्म और हिरोइनों के साथ होने वाले भेदभाव पर बातचीत की…
शादी के बाद आप एक इंसान के तौर पर खुद में कितना बदलाव महसूस करती हैं?
शादी के डेढ़ साल बाद मैं इतना कह सकती हूं कि आपको अपने बेस्ट फ्रेंड से शादी करनी चाहिए, जैसे कि मैंने की है। देखिए प्यार तो होता है, मगर यदि दोस्ती न हो तो आप एक-दूसरे की इज्जत नहीं कर पाते। इसके अलावा आपकी विचारधारा और मूल्यों का भी एक जैसे होना जरूरी होता है, वरना दोनों के बीच द्वंद्व चलता रहता है।
कामयाब शादी का कोई रॉकेट साइंस तो हो नहीं सकता, मगर खुशहाल शादी के लिए आप क्या टिप्स देना चाहेंगी?
मेरे पति आनंद बहुत ही शांत प्रवृत्ति के इंसान हैं। वह मेरे समय को लेकर बहुत पजेसिव नहीं हैं और मुझे भरपूर स्पेस देते हैं। वह मेरे काम को भी अपने काम जितना ही महत्व देते हैं। मैंने बहुत सारे पतियों को देखा है कि वे अपनी पत्नी से मोहब्बत तो बहुत करते हैं, मगर उनके काम को कम आंकते हैं। लेकिन मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं है। मुझे और मेरे काम को मेरे पति से पूरी इज्जत मिलती है। मगर जैसे आनंद की प्राथमिकताएं बदली हैं, वैसे ही मेरी भी बदली हैं। अब मेरी प्राथमिकता आनंद व मेरा परिवार है। उसी तरह आनंद की प्राथमिकता भी मैं ही हूं। हमारे रिश्ते में काफी समानता है, मगर आपकी जिंदगी शादी के बाद बदल जाती है। आपको एक नया परिवार मिलता है। नए लोग मिलते हैं। आप बदल जाते हो, नई खुशी और नई जिम्मेदारियों के साथ।
आपके और आनंद के बीच किस बात को लेकर असहमति होती है?
असल में आनंद सुबह चार या कभी-कभी साढ़े तीन बजे सोकर उठते हैं। उनका काम बहुत सुबह से शुरू हो जाता है। हालांकि मैं भी देर से उठनेवालों में से नहीं हूं, मगर साढ़े तीन-चार बजे तो उठ नहीं पाती। मैं जब भी सुबह उठती हूं, तो मेरा पति बिस्तर पर नहीं होता। यही एक चीज है, जो हमारे बीच सहमति नहीं बनाती। उनको रात को कहीं बाहर जाना पसंद नहीं है। मुझे भी नहीं है, मगर वह तो बिलकुल भी नहीं जाते, क्योंकि उन्हें अल सुबह उठना पड़ता है। दस बजे तो वह नींद की दुनिया में पहुंच चुके होते हैं। हम रात को पार्टियों में भी नहीं जाते।
सोनम आप नीरजा, वीरे दी वेडिंग जैसी फिल्मों में नजर आईं और अब आपकी जोया फैक्टर जैसी नायिका प्रधान फिल्म में आ रही है, तो क्या मौजूदा दौर को आप हिरोइनों के लिए अच्छा मान रही हैं?
हिरोइनों के लिए थोड़ा बदलाव तो है, मगर इतना नहीं है, जितना लोग देख या समझ रहे हैं। हिरोइनों का संघर्ष अब तक जारी है। आज भी हम हिरोइनों को इतनी इज्जत या जिम्मेदारी नहीं दी जाती। मुझे लगता है कि हम ज्यादा डिजर्व करते हैं, मगर हमें उतना मिलता नहीं। अभिनेत्रियों के लिए क्वालिटी वाले रोल कम लिखे जाते हैं। बॉलिवुड पुरुषप्रधान इंडस्ट्री है, तो उन्हीं को ध्यान में रखकर रोल्स लिखे जाते हैं। कहानियां भी मर्दों द्वारा मर्दों के लिए लिखी जाती हैं। महिला निर्देशक भी सिर्फ नायिकाओं को ध्यान में रखकर फिल्में कहां बनाती हैं? उनकी फिल्में भी तो हीरो प्रधान होती हैं। फराह खान हो या जोया अख्तर हों, सभी हीरोज के साथ फिल्में बनाती हैं। मुझे लगता है कि अभी हिरोइनों को और आगे आने की जरूरत है।
सोनाक्षी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि हीरोइनें जब लीड रोल करती हैं, तो बड़े स्टार्स उनके साथ काम नहीं करना चाहते। आप क्या कहना चाहेंगी?
उन्होंने एकदम सही कहा। वह गलत नहीं कह रही हैं। बहुत बार मेरे साथ ऐसा हुआ है। कई बार मेरी नायिका प्रधान फिल्मों के लिए लगातार हीरोज को ढूंढते ही रहना पड़ता है। आपको पता है जोया फैक्टर 2-3 हीरोज को ऑफर हुई थी, मगर इस नायिका प्रधान फिल्म में उन्होंने काम करने से इंकार कर दिया। अब आप क्या कर सकते हैं? मैंने कई नायक प्रधान फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए हैं, मगर मेरी नायिका प्रधान फिल्म में कोई बड़ा हीरो काम करने को राजी नहीं होता।
आपकी फिल्म जोया फैक्टर रिलीज होने वाली है। आपको कब महसूस हुआ कि आपका लक जोरदार है?
मुझे लगता है कि अनिल कपूर की बेटी होना ही सबसे बड़ा लक फैक्टर है। हां, जब मैं फिल्मों में आई, तो मैंने कड़ी मेहनत की और बहुत बार मेरे हाथ से अच्छे-अच्छे मौके भी चले गए, क्योंकि किस्मत ने साथ नहीं दिया। मैं तो यही कहूंगी कि किस्मत जब अच्छी चलती है, तो मेहनत का फल मीठा मिलता है, जब किस्मत अच्छी नहीं चलती, तो मेहनत बेकार हो जाती है। आप सिर्फ किस्मत के सहारे हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे रह सकते।
इंडस्ट्री में हमने देखा है कि जब लक साथ नहीं देता, तो उसे संवारने के लिए लोग न्यूमरोलॉजी या ज्योतिष शास्त्र का सहारा लेते हैं। आप इन चीजों में विश्वास करती हैं?
मैं भारतीय हूं और ज्योतिष में यकीन करना हमारे स्वभाव में है। मैं ज्योतिष में गहरा विश्वास रखती हूं। मैं पामेस्ट्री में भी विश्वास करती हूं। यह एक विद्या है और अगर आप किसी कुशल हस्त विशेषज्ञ या ज्योतिष शास्त्री से मिलें, तो आपको बहुत मदद मिल सकती है। यह भी एक तरह का साइंस है। मेरा नाम सोनम भी न्यूमरोलॉजी के हिसाब से रखा गया है। मेरी मम्मी इन बातों में काफी यकीन करती हैं।

 

 

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