अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन 11 साल के न्यूनतम स्तर पर

 

इंदौर। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन के भाव घटे हैं। इसका असर घरेलू बाजार में सोया डीओसी की कीमतों पर हुआ है। मई में अब तक बंदरगाह पर सोया डीओसी के भाव 8-9 फीसदी घटकर 32,500-33,000 रुपए प्रति टन रह गए हैं।चीन, अमेरिका से सालाना करीब 400 लाख टन सोयाबीन आयात करता है, लेकिन ट्रेड वॉर के कारण चीन की आयात मांग कम होने के कारण इस महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन के भाव घटकर 11 साल से न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं।शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबॉट) में 30 अप्रैल को सोयाबीन का भाव जुलाई वायदा में 8.64 डॉलर प्रति बुशल था, जो एक पखवाड़े में घटकर 7.95 डॉलर प्रति बुशल रह गया। उसके बाद से भाव में हल्का सुधार आया, लेकिन उस स्तर पर ग्राहकी का समर्थन काफी कमजोर है।बहरहाल, कांडला बंदरगाह पर सोया डीओसी के भाव घटकर 32,500 से 33,000 रुपए प्रति टन रह गए, जबकि मई की शुरुआत में इसके भाव 35,000-35,500 रुपए प्रति टन थे। सोयाबीन के भाव मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में 3,700-3,800 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं। सोया रिफाइंड तेल के भाव इंदौर में 755-760 रुपए प्रति 10 किलो बने हुए हैं। अप्रैल में 12,265 टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल अप्रैल में 68,264 टन का निर्यात हुआ था। अप्रैल में सोया डीओसी के भाव बढ़कर घरेलू बंदरगाह पर 460 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि जनवरी में इसका भाव 413 डॉलर प्रति टन था। ब्राजील और अर्जेंटीना के रास्ते सस्ती डीओसी की उपलब्धता का असर भारतीय डीओसी पर देखने को मिल रहा है।सोपा के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सीजन 2018-19 में सोयाबीन का उत्पादन 114.83 लाख टन रहा है, जबकि अक्टूबर 2018 से अप्रैल 2019 तक मंडियों में 81 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है। पिछले साल की समान अवधि में 66.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई थी।उत्पादक मंडियों में 30 लाख टन से ज्यादा सोयाबीन का स्टॉक बचा हुआ है, जबकि जून-जुलाई में बुआई शुरू हो जाएगी। ऐसे में सोयाबीन की कीमतों में तेजी-मंदी मानसूनी की बारिश पर निर्भर करेगी।

 

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