न्यूक्लियर सांइस में बी.टेक शुरू करें – राज्यपाल

Start B.Tech in Nuclear Science - Governor
कोटा भारतीय मानचित्र पर परमाणु ऊर्जा का केन्द्र

जयपुर, 27 सितम्बर (का.सं.)। राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति कल्याण सिंह ने राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को न्यूक्लियर सांइस एण्ड टेक्नोलॉजी या न्यूक्लियर सांइस एण्ड इंजीनियरिंग में बी.टेक पाठ्यक्रम शुरू करने के निर्देश दिये हैं। कुलाधिपति सिंह ने इस कोर्स का ब्लू प्रिंट एक माह में तैयार करने के लिए कुलपति को कहा है। राज्यपाल ने कहा है कि वे इस संबध में भारत सरकार के सम्बन्धित मंत्रालय को भी वे पत्र लिखेंगे। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सिंह ने कोटा के राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह पर छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकगण और विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। दीक्षांत समारोह में भेजे शुभकामना संदेश में सिंह ने कहा है कि राजस्थान भारत की परमाणु शक्ति का प्रतीक है।
पोकरण ने विश्व में भारत की धाक जमायी है – राज्यपाल कल्याण सिंह ने कहा कि राजस्थान भारत की परमाणु शक्ति का प्रतीक है। राजस्थान के रावतभाटा मेें परमाणु ऊर्जा स्टेशन होने के साथ ही पोकरण में हुए तीन परमाणु परीक्षणों ने विश्व में भारत की धाक स्थापित की है। कोटा और पोकरण, राजस्थान में परमाणु शक्ति की संभावनाओं के लिए एक मजबूत आधार है। राजस्थान को इस दिशा में ओर आगे बढऩे की जरूरत है। विश्वविद्यालय को इस क्षेत्र में पहल करनी चाहिए।
न्यूक्लियर सांइस आवश्यक है – राज्यपाल एवं कुलाधिपति सिंह ने कहा राजस्थान में न्यूक्लियर साइंस के अध्ययन, अध्यापन का अभाव, कोटा और पोकरण की उपलब्धियों से साम्य नहीं रखता है। इस विषय का पाठ्यक्रम आरम्भ होना आवश्यक है। यह प्रयास भविष्य के लिए प्रांसगिक होगा।
आदर्श इंसान बनें – राज्यपाल एवं कुलाधिपति सिंह ने कहा है कि छात्रों व छात्राओं को देश कीे विकास यात्रा मे कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। युवाओं को विकास के क्षेत्र में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ – साथ छात्र-छात्राओं को मानवीय मूल्यों की शिक्षा देना आवश्यक है। ताकि इंजिनियर के साथ-साथ युवा आदर्श इंसान भी बने।
नये पाठ्यकमों में समुचित योगदान दें – कुलाधिपति कल्याण सिंह ने शिक्षकों से अपेक्षा की है कि मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत नए पाठ्यक्रमों को सार्थकता प्रदान करने में समुचित योगदान दें। पाठ्यकमों को वर्तमान व भविष्य की प्रासंगिकता के अनुरूप तैयार करें ताकि युवाओं का भविष्य सुदृढ़ हो सके।

 

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