डीनोटिफाइड राजकीय महाविद्यालयों के परीक्षण के लिए दो दलों का गठन, निर्णय सुनवाई के बाद गुणावगुण के आधार पर-भाटी

जयपुर, 11 फरवरी (का.सं.)। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री भंवर सिंह भाटी ने विधानसभा में कहा है कि पूर्व में जिन 8 राजकीय महाविद्यालयों को डीनोटिफाई किया गया था उनके सम्बन्ध में माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार निर्णय किए जाने हेतु दो दलों का गठन किया गया है। ये दल इन महाविद्यायों के भूमि, स्टाफ एवं संसाधनोंं की जांच के बाद सात दिवस में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस रिपोर्ट और महाविद्यालयों का पक्ष सुनने के बाद गुणावगुण के आधार पर निर्णय किया जाएगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री भाटी सोमवार को सदन में प्रश्नकाल में इस सम्बन्ध में विधायकों द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। इससे पूर्व विधायक गुरदीप सिंह के मूल प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि निजी महाविद्यालय मीरा कन्या कालेज, संगरिया (हनुमानगढ) का राज्याधीन किये जाने का आदेश दिनांक 31 अगस्त 2013 को किया गया था, उन्होंने इसके विवरण की प्रति सदन में रखी। उन्होंने कहा कि गत सरकार द्वारा दिनांक 26 सितम्बर 2014 के आदेश द्वारा मीरा कन्या कालेज, संगरिया (हनुमानगढ) को डि-नोटिफाई निरस्त किया गया था। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने इसकी प्रति भी सदन के पटल पर रखी। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जिन विभिन्न निजी महाविद्यालयों को राज्याधीन करने के आदेश वर्ष 2013 में जारी किये गये थे एवं जिन्हें उपरोक्तानुसार वर्ष 2014 में डि-नोटिफाई कर दिया गया, उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएं दायर की गई। उपरोक्त रिट याचिकाओं में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उपरोक्त समेकित निर्णय दिनांक 02.04.2018 की अनुपालना में उपरोक्त महाविद्यालयों से जवाब प्राप्त किया जाकर एवं उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाकर अंतिम निर्णय किया जाना है। वर्तमान में उपरोक्तानुसार प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जिन विभिन्न निजी महाविद्यालयों को राज्याधीन करने के आदेश वर्ष 2013 में जारी किये गये थे एवं जिन्हें उपरोक्तानुसार वर्ष 2014 में डि-नोटिफाई कर दिया गया, उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएं दायर की गई। उपरोक्त रिट याचिकाओं में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उपरोक्त समेकित निर्णय दिनांक 02.04.2018 की अनुपालना में उपरोक्त महाविद्यालयों से जवाब प्राप्त किया जाकर एवं उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाकर अंतिम निर्णय किया जाना है। वर्तमान में उपरोक्तानुसार प्रक्रिया जारी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *