राजस्थान में बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में अंतराज्यीय समंवित प्रयासों से मिली सफलता- डॉ. यादव

जयपुर, 26 सितम्बर (कासं)। श्रम एवं नियोजन मंत्री डॉ. जसवंत सिंह यादव ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में स्थानिक बच्चों के अलावा विशेषकर पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश एवं झारखंड के बच्चे कार्यरत पाए गए हैं। अंतर्राज्यीय समन्वित प्रयासों से राज्य सरकार द्वारा गठित टास्कफोर्स के माध्यम से इन बच्चों की नियमित पहचान कर इन्हें अपने गृह राज्य में भेजा गया है। इससे राज्य में बालश्रम उन्मूलन की दिशा में कारगर सफलता मिली है। डां. जसवंत सिंह मंगलवार को नई दिल्ली के प्रवासी भारतीय केन्द्र में आयोजित बालश्रम पर राष्ट्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे। केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में केन्द्रीय श्रम राज्यमंत्री संतोष गंगवार सहित विभिन्न राज्यों के श्रम मंत्रियों ने भाग लिया। सिंह ने कहा कि राजस्थान के दक्षिणी जिलो बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर से काफी संख्या में बच्चें गुजरात में बी.टी. कॉटन की खेती में नियोजित किए जाते थे लेकिन दोनों राज्यों के समन्वित प्रयास से गुजरात जाने वाले बच्चों की संख्या में काफी कमी आई है। इसके लिए दोनों राज्यों की सरकारों द्वारा नियमित बैठकें आयोजित की जाकर संयुक्त प्रयास किए गए हैं। इसी तरह की प्रणाली विकसित करने के लिए बिहार राज्य में भी विचार विमर्श जारी है।डां. सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने 2008 में अपनी एक बाल नीति तैयार की थी। इसका उदेश्य यह सुनिश्चित करना था कि विभिन्न राजकीय विभागों के बीच समन्वय के जरिए विकास के सभी समेकित विकास तथा अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। राज्य में बाल श्रम उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी जिला कलक्टर की अध्यक्षता में बाल श्रम टास्कफोर्स भी गठित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य के सभी 33 जिलों के जिला कलक्टरों को बाल श्रम सर्वे के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। सर्वे की रिपोर्ट आने पर बच्चों को सही स्थिति का पता चल सकेगा और उसी अनुरूप उन बच्चों का पुनवरस कर उन्हें शिक्षा से जोडऩे की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। सम्मेलन में राजस्थान के श्रम एवं नियोजन विभाग के सचिव टी.रविकांत भी उपस्थित थे।

 

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