दो युवकों को अपने साथ ले जाना पडा महंगा

 

श्रीगंगानगर, 30 दिसम्बर (नि.स.)। सूरतगढ़ में एक ग्वारगम फैक्टरी के मालिक और व्यापार मण्डल के पूर्व अध्यक्ष दीपक भाटिया को तीर्थस्थलों पर जाते हुए दो युवकों को अपने साथ ले जाना महंगा पड़ गया। इस तीर्थाटन के दौरान इन युवकों को पता चला कि दीपक भाटिया के पास खूब प्रोपर्टी और पैसा है। घूम-फिरकर आने के बाद यह दोनों युवक मंसूबे बनाने लगे कि कैसे इस सेठ से रुपये वसूले जायें। इन युवकों के हाथ चोरी का मोबाइल फोन लगा। उसी मोबाइल फोन में अलग-अलग नम्बर के सिम कार्ड डालकर दीपक भाटिया को 10 लाख की रंगदारी (फिरौती) देने के लिए धमकियां देने लगे। यह खुलासा हुआ है पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये गांव भोपालपुरा निवासी दिनेश पुत्र हनुमान बिश्रोई तथा पवन पुत्र राजाराम नाई से। इन दोनों को पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में पेश किया। पूछताछ तथा कुछ बरामदगियों के लिए इनका दो दिन का रिमांड मिला है। बता दें कि दीपक भाटिया पुत्र सीताराम की रिपेार्ट पर पुलिस ने परसों गुरुवार को अज्ञात जनों के खिलाफ धारा 384 व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। हालांकि दीपक ने विगत 29 नवम्बर को रंगदारी के लिए पहली बार धमकी भरा फोन आने पर पुलिस को सूचना दे दी थी।इसके बाद उसे 22 दिसम्बर तक धमकियां मिलती रहीं कि अगर 10 लाख रुपये नहीं दिये, तो उसे मौत के घाट उतार दिया जायेगा। पुृलिस ने गुप्त रूप से उन सभी नम्बरों की जांच-पड़ताल की, जिनसे धमकी भरे फोन किये गये थे। पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद यह मामला दर्ज किया गया। इस बीच पुलिस ने यह पता लगाया कि जिस सिम नम्बर से यह फोन कॉल किये गये हैं, वह जोधपुर के एक व्यक्ति के गुम हुए मोबाइल फोन में डालकर किये गये हैं। पुलिस ने इस व्यक्ति को भी कल सूरतगढ़ में बुला लिया। पुलिस के मुताबिक महज 5-7 सौ रुपये वाला यह फोन इस व्यक्ति का दो अढ़ाई महीने पहले सूरतगढ़ में ही चोरी हो गया था या गुम हो गया था। यह फोन पवन और दिनेश के हाथ लग गया, जिसमेें वे सिम कार्ड डालकर धमकियां देने लगे। पवन सूरतगढ़ में पीजी हॉस्टल चलाता है। दिनेश बिश्रोई उसका दोस्त है। इन दोनों को कुछ समय पहले दीपक भाटिया अपने साथ सालासर व कुछ अन्य तीर्थ स्थलों पर घुमाने-फिराने के लिए ले गया था। इस दौरान रास्ते में हुई बातचीत से इन दोनों को अंदाजा हो गया कि दीपक के पास खूब प्रोपर्टी और पैसा है। घूम-फिरकर आने के बाद यह दोनों उससे रकम ऐंठने के मंसूबे बनाने लगे। कोई और रास्ता दिखाई नहीं दिया तो धमकी भरे फोन करके रुपयों की मांग करने लगे। अब पुलिस इनसे यह जानने में लगी है कि उनके पास वह फोन कहां से आया, जिससे वे धमकियां दे रहे थे।

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