भारतीय चिकित्सा उपकरण उद्योग का फोकस ‘प्रीसिशन मैन्यूफै क्चरिंग पर

नई दिल्ली, 19 जून(एजेन्सी)। नब्बे के दशक के आखिर में भारत में परिशुद्ध शल्य चिकित्सा उपकरणों का एक बडा बाजार तेजी से बढ़ रहा था। इस दौरान भारत शल्य चिकित्सा उपकरणों का आयात करने वाले एशिया के शीर्ष देशों में से एक बन गया था। इधर, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक और पुनर्निर्माण सर्जरी, वुंड क्लोजर, ओबस्टेट्रिक्स और स्त्री रोग, कार्डियोवैस्कुलर, आर्थोपेडिक और अन्य बहुत सारी सर्जरी के दौरान ऐसे सटीक उपकरणों का अधिक प्रयोग होने लगा। विभिन्न नवाचार और नए अनुप्रयोग इस उद्योग की गतिशीलता को दिन-प्रतिदिन बदल रहे हैं। भारतीय चिकित्सा उपकरणों का उद्योग वर्तमान में लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है जो कि 72.6 बिलियन अमरीकी डालर वाली एशिया/पेसिफिक इंडस्ट्री के कुल आकार का 6.9 प्रतिशत हिस्सा है। भारत में हैल्थकेयर इंडस्ट्री का कुल मूल्य 160 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसके 2020 तक 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इस तरह उम्मीद की जा सकती है कि भारत के चिकित्सा उपकरण उद्योग, शल्य चिकित्सा उपकरण और दवा उद्योग में आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय तेजी आ सकती है और ये उद्योग पूरी दुनिया के लिए लागत प्रभावी आपूर्तिकर्ता बन सकते हैं। देश में लगभग 1800 घरेलू फर्म हैं, मुख्य रूप से एमएसएमई जो निम्न से मध्यम प्रौद्योगिकी उत्पादों की श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आईटीए मेडिकल डिवाइसेज टॉप मार्केट्स रिपोर्ट 2016 के मुताबिक चिकित्सा उपकरणों क वैश्विक बाजार के 2020 तक 435.8 बिलियन अमरीकी डालर के मूल्य तक पहुंचने की उम्मीद है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, इसके सालाना 7.8 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढऩे की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्जरी की संख्या बढऩे से बाजार में और तेजी की उम्मीद की जा सकती है। बढती सड़क दुर्घटनाएं, पुरानी बीमारियों का इलाज, प्लास्टिक सर्जरी की बढ़ती प्रवृत्ति इत्यादि कारणों से सर्जिकल उपकरणों की मांग में तेजी से बढोतरी हो सकती है। आरयूजे और एसआरएम के चेयरमैन स्विट्जरलैंड बेस्ड वैज्ञानिक डॉ राजेन्द्र जोशी कहते हैं कि भारत के सामने इस बात की बडी संभावना है कि वह सर्जिकल उपकरणों के बाजार में कारोबार पर निर्भर रहने के स्थान पर अभिनव और सटीक विनिर्माण इकाई के रूप में खुद को बदल सकता है। आयात कम करते हुए और लागत प्रभावी हाई एंड प्रोडक्ट्स का उत्पादन करके, देश स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च होने वाली एक बड़ी राशि को बचाने में सक्षम हो जाएगा।

 

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