झुग्गी बस्ती में रहने वाली महिलाओं का समाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण किया

हनुमानगढ़, 10 दिसम्बर (एजेन्सी)। नागरिक सुरक्षा मंच व व्यापार मंडल शिक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में विश्व मानवाधिकार दिवस पर महाविध्यालय की 32 छात्राओं द्वारा टाउन रेलवे स्टेशन के सामने स्थित झुग्गी बस्ती में रहने वाली महिलाओं का समाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण किया गया । सर्वेक्षण के दौरान एकत्रित किए गए आंकड़ो व तथ्यों के अनुसार बस्ती में 250 से अधिक परिवार निवास कर रहे है । अधिकतर लोग तम्बू या कच्चे मकानों में रह रहे है । घरों में शौचालय की व्यवस्था नही है , घरों के बाहर नालियां नही है गन्दा पानी घरों के बाहर ही इकठ्ठा होता रहता है जिसे बाल्टियों से खाली करना पड़ता है । हालही में सरकार द्वारा एक सामुदायिक शौचालय खोला गया है, 250 परिवारों पर महिलाओं व पुरुषों के लिए 6-6 शौचालय बनाए गए है लेकिन वो सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुलता है । कहीं कहीं घरों के बीच में मात्र दो चार फीट चौड़ी गली ही है जिसमे खुली नाली बह रही है । एक-एक परिवार में तीन चार शादीशुदा जोड़े है लेकिन कमरा एक ही है । कमरों व स्नानघरों में दरवाजे नही है सिर्फ पर्दे है । कम उम्र में शादी कर दी जाती है । लड़के की चाह में पांच छरू बच्चे पैदा करने में हिचकिचाहट नही करते । बच्चों में एक साल से भी कम समय का अंतर पाया गया । परिवार नियोजन में कोई विश्वास नही है । महिलाओं का खान पान इस दृष्टि से बिलकुल भी संतोषजनक नही है । बच्चों की खुराक में दूध जैसे पौष्टिक तत्व शामिल ही नही है । अधिकतर बच्चे स्कूल नही जाते है जो जाते है वो नियमित नही है । कुछ बच्चों ने बताया की उनकी पढने में रूचि है लेकिन माँ बाप उनसे काम करवाना चाहते है । ज्यादातर महिलाएं एवं बच्चे कचरा बीनने का काम करते है । स्वच्छता का विपरीत क्या होता है वहाँ देखा जा सकता है इन्सान और पशु एक साथ रह रहे है । घरों के बाहर ही बच्चे शौच कर देते है ।
अधिकतर पुरुष हर रोज शराब का सेवन करते है , कुछ महिलाएं भी धूम्रपान या गुटका का सेवन करती है । घरों में हिंसात्मक घटनाएँ भी होती रहती है । 21 वर्ष की कांता जिसके पास दो बेटियां है बताती है कि उसका पति रोज शराब पीकर मारपीट करता था फिर उसे घर से बाहर निकाल दिया, अब कांता अपने माँ बाप के पास रहती है । अधिकतर लोगों के आधार कार्ड नही बने है जिससे उन्हें राशन भी नही मिल रहा है । बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र आदि नही बने है । महिलाओं को अपनी उम्र तक नही पता है । कुछ अपाहिज भी है जिन्हें पेंशन एवं व्हील चेयर की आवश्यकता है । मानवाधिकारों का सर्वेक्षण करने आई छात्राओं ने पाया कि यहाँ तो मानवीय जीवन स्तर ही नही है यहाँ अधिकारों की बात करना तो बिलकुल बेमानी है । इन लोगों के जीवन स्तर को सुधारने की कोशिश की जानी चाहिए । छात्राओं की संवेदनाओं को समझते हुए व्यापार मंडल शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष बालकृष्ण गोल्यान ने बस्ती की सभी बच्चियों को निशुल्क शिक्षा देने की घोषणा की और कहा कि जल्द ही इन्ही छात्राओं द्वारा एक अन्य सर्वेक्षण करके निशुल्क शिक्षा हेतु बच्चियों को चिन्हित किया जाएगा ।नागरिक सुरक्षा मंच के अध्यक्ष शंकर सोनी ने कहा कि ये छात्र छात्राएं ही देश के कर्णधार है, आज उन्हें देश की वास्तविकताओं से रूबरू करवाया जाना हमारा कर्तव्य है ताकि राष्ट्रनिर्माण में इनकी भूमिका सुनिश्चित हो । भविष्य में अन्य शिक्षण संस्थाओं को साथ लेकर इसी तरह के सर्वेक्षण करवाकर जमीनी हकीकत समाज व सरकार के समक्ष पेश कर समस्याओं का समाधान ढूढने के प्रयास किए जाएंगे । मंच के अमित माहेश्वरी, रामकुमार चौधरी, पुष्पेन्द्र शेखावत, अतुल कौशिक, रोहित सोनी आदि ने सर्वेक्षण में सहयोग किया । इस अवसर पर व्यापार मंडल महिला महाविध्यालय की निर्देशक निर्मला नागपाल, राष्ट्रीय सेवा योजना प्रभारी ‘योति यादव, सुमन मिश्रा, अन्नू गोयल एवं सुधीर चौधरी भी उपस्थित रहे । अमित माहेश्वरी द्वारा इस सर्वेक्षण की समेकित रिपोर्ट तैयार करके जिला, रा’य एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी जाएगी ।

 

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