किसान संगठनों और सरकार की 8वें दौर की बैठक भी रही बेनतीजा

नई दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किसानों संगठन और केंद्र सरकार के बीच आठवें दौर की वार्ता खत्म हो गयी है। किसानों और सरकार के बीच शुक्रवार की बैठक बेनतीजा रहा। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जानकारी देते हुए बताया कि किसान नेताओं के साथ बातचीत में शुक्रवार को कोई हल नहीं निकला। 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे फिर से बैठक होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से विकल्प मांगा था। लेकिन, किसान नेता विकल्प नहीं दे पाये।बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सोमप्रकाश मौजूद रहें। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार कि बैठक में कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से कहा कि ये कानून पूरे देश के लिए हैं और उनको पंजाब-हरियाणा के अलावा पूरे देश के बारे में सोचना चाहिए। वहीं, किसान नेता राजेवाल ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से कहा कि कानून वापस लिए जाए और राज्यों को कानूनों पर फैसला करने दिया जाना चाहिए।किसान नेता राजेवाल ने नये कृषि कानूनों में संशोधनों को रिजेक्ट करते हुए कहा कि सरकार के पास कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। सरकार को अपनी कानूनी टीम से बात कर बताना चाहिए कि वे कानून वापस ले सकते हैं या नहीं। साफ बता दें कि कानून वापस नहीं लिए जा सकते हैं तो हम वार्ता छोड़कर चले जाएंगे।वहीं, मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि आज सरकार के साथ बैठक के दौरान किसान नेता लंच के लिए मीटिंग हॉल से बाहर नहीं हुए हैं। केवल केंद्रीय मंत्री बाहर गये हैं। साथ ही किसानों ने प्लेकार्ड लहराए। इन प्लेकार्ड में पंजाबी में लिखा था, या तो मरेंगे या जीतेंगे और कानून वापस तो घर वापस। उधर, जंतर-मंतर पर केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस के सांसद और नेता आज राहुल गांधी के आवास पर पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से मिलने पहुंचे। केंद्र सरकार के साथ होने वाली 8वें दौर की वार्ता से पहले भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उम्मीद जताते हुए कहा था कि सरकार कुछ न कुछ हल निकाल लेगी। इससे पहले प्रदर्शनकारी किसानों ने तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ ट्रैक्टर रैलियां निकाली और नये कानून को रद्द करने की मांग दुहराई। जबकि, केंद्र सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि वह इन कानूनों वापस लेने के अलावा हर प्रस्ताव पर विचार के लिए तैयार है। ऐसे में सबकी नजर आज होने वाली बैठक पर जा टिकी थी।
उल्लेखनीय है कि गुरुवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने साफ कर दिया था कि कहा कि वे फिलहाल यह नहीं बता सकते कि आठ जनवरी को किसान संगठनों के नेताओं के साथ होने वाली बैठक का क्या नतीजा निकलेगा। किसानों की ट्रैक्टर रैली पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि कि आज हमारे किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर ट्रेनिंग ली है, ताकि 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर रैली की परेड निकाली जा सके। 26 जनवरी के दिन ट्रैक्टर और टैंक एकसाथ चलेंगे। ट्रैक्टर 2 लाइन में चलेंगे और टैंक एक लाइन में चलेगा।बता दें कि केंद्र और किसान संगठनों के बीज अब तक सात दौर की बातचीत हो चुकी है। लेकिन, अभी तक बातचीत को कोई सार्थक हल नहीं निकल पाया है। एक तरफ सरकार अड़ी हुई है कि किसान बिल वापस लेने के अलावा किसी भी प्रस्ताव पर बात कर सकते हैं। इससे पहले सरकार ने 30 दिसंबर को छठे दौर की बातचीत के दौरान किसानों की बिजली सब्सिडी और पराली जलाने संबंधी दो मांगों को मान लिया था।

नहीं मिला कोई विकल्प : केन्द्रीय कृषि मंत्री तोमर
No option found: Union Agriculture Minister Tomar
No option found: Union Agriculture Minister Tomar

नई दिल्ली (एजेंसी)। नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच शुक्रवार को हुई 8वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही। बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान यूनियन के साथ तीनों कृषि क़ानूनों पर चर्चा होती रही परन्तु कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से कहा गया कि क़ानूनों को वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प दिया जाए, परन्तु कोई विकल्प नहीं मिला। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने बार-बार कहा है कि किसान यूनियन अगर क़ानून वापिस लेने के अलावा कोई विकल्प देंगी तो हम बात करने को तैयार हैं। आंदोलन कर रहे लोगों का मानना है कि इन क़ानूनों को वापिस लिया जाए। परन्तु देश में बहुत से लोग इन क़ानूनों के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि किसान यूनियन और सरकार ने 15 जनवरी को दोपहर 12 बजे बैठक का निर्णय लिया है। मुझे आशा है कि तब कोई समाधान निकलेगा।क्या सरकार कृषि क़ानूनों का समर्थन कर रहे किसान संगठनों को बैठक में शामिल करेगी या नहीं? इस सवाल के जवाब में नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि अभी इस प्रकार का कोई विचार नहीं है, अभी हम आंदोलन कर रहे पक्ष से बात कर रहे हैं, परन्तु अगर आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में सरकार इसपर विचार कर सकती है।वहीं, बैठक के बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि तारीख पर तारीख चल रही है। बैठक में सभी किसान नेताओं ने एक आवाज़ में बिल रद्द करने की मांग की। हम चाहते हैं बिल वापस हो, सरकार चाहती है संशोधन हो। सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हमने भी सरकार की बात नहीं मानी। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव ने कहा कि सरकान ने हमें कहा कि कोर्ट में चलो। हम ये नहीं कह रहे कि ये नए कृषि क़ानून गैर-क़ानूनी है। हम इसके खिलाफ हैं। इन्हें सरकार वापिस ले। हम कोर्ट में नहीं जाएंगे। हम अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।गौरतलब है कि इससे पहले चार जनवरी को हुई वार्ता भी बेनतीजा रही थी क्योंकि किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर डटे रहे, वहीं सरकार ‘समस्या’ वाले प्रावधानों या गतिरोध दूर करने के लिए अन्य विकल्पों पर ही बात करना चाहती है।बता दें कि किसानों ने 7 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली थी और 26 जनवरी को फिर से ट्रैक्टर मार्च निकालने का प्लान है। किसानों का कहना है कि अगर उनकी बातें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को दोबारा ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा।

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