सरकार-किसान नेताओं में आज शाम होगी वार्ता

प्रदेश में कई जिला मुख्यालयों पर बेमियादी पड़ाव
श्रीगंगानगर, 11 सितम्बर (नि.स.)। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू किये जाने तथा किसानों को कर्ज से मुक्ति दिये जाने की दो मुख्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा व अन्य कतिपय किसान संगठनों के समर्थन से प्रदेशभर में चल रहे किसानों के आंदोलन को देखते हुए आखिरकार राज्य सरकार ने वार्ता का निमंत्रण दिया है। यह वार्ता मंगलवार शाम 5 बजे जयपुर में कृषि भवन में होगी। किसान नेताओं से राज्य सरकार के तीन मंत्री इन दो मुख्य मांंगों के साथ-साथ जिला स्तर की स्थानीय मांगों पर बातचीत करेंगे। बीकानेर सम्भाग में चारों जिला मुख्यालयों पर इन किसान संगठनों द्वारा अनिश्चितकालीन पड़ाव डाला जा रहा है। आज हनुमानगढ़ में भी कलक्ट्रेट पर धरना आरम्भ हो गया। श्रीगंगानगर मेें किसान सभा का 10 दिन से अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। किसान संघर्ष समिति और ऐटा-सिंगरासर नहर निर्माण समिति इसका समर्थन कर रही हैं। आज किसान सभा ने प्रशासन ठप का ऐलान किया, जिसके मद्देनजर सैकड़ों की तादाद में किसान जिला कलक्ट्रेट पर आ डटे। दिनभर कलक्ट्रेट के बाहर महाराजा गंगासिंह चौक में किसानों की सभा चली, जिसमें अनेक किसान नेताओं ने सम्बोधित किया। इस दौरान किसान सभा के स्थानीय नेता सीकर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमराराम और रा’यध्यक्ष पेमाराम के सम्पर्क में रहे। शाम करीब 5 बजे सूचना प्राप्त हुई कि सरकार के साथ कल शाम 5 बजे वार्ता होगी। इधर, किसान सभा के स्थानीय नेताओं ने जिला कलक्टर ज्ञानाराम व अन्य अधिकारियों के साथ स्थानीय स्तर की मांंगों के बारे में वार्ता की। इनमें मुख्य मांग फिरोजपुर नहर फीडर के जीर्णाेद्धार की है। मांग पत्र मेें अखिल भारतीय स्तर की दो मांगों के अलावा आठ और मांगे भी शामिल हैं। किसान सभा की राष्ट्रीय कांैसिल के सदस्य श्योपतराम मेघवाल ने देर शाम बताया कि यह वार्ता भी विफल हो गई है। लिहाजा आये हुए सैकड़ों किसान रातभर कलक्ट्रेट पर ही धरना देंगे। यह धरना कल शाम जयपुर में राज्य सरकार से प्रस्तावित वार्ता में क्या नतीजा रहता है, तब तक जारी रहेगा। पड़ाव में शामिल हुए किसानों के लिए लंगर-पानी की व्यवस्था कर दी गई है। स्वयं श्योपतराम मेघवाल सरकार से बातचीत मेें शामिल होने वाले किसान सभा के प्रतिनिधिमण्डल मेें भाग लेने के लिए कल सुबह जयपुर रवाना होंगे। यहां पीछे प्रशासन ठप की कमान माकपा के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल और अन्य किसान नेता सम्भालेंगे। जानकारी के अनुसार सरकार-किसान सभा में बातचीत कल रविवार देर शाम को जयपुर में होनी थी। इसके लिए सीकर से अमराराम व पेमाराम आदि रवाना भी हो गये थे, लेकिन देर रात को यह शिष्टमण्डल वापिस सीकर आ गया। आज सुबह फिर से राज्य सरकार की ओर से बातचीत के प्रयास शुरू किये गये। देर शाम निर्णय हुआ कि वार्ता मंगलवार शाम 5 बजे की जायेगी। जानकारी के अनुसार वार्ता में विधायक हनुमान बेनीवाल और डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भी शामिल होंगे। इस वार्ता के नतीजे के अनुसार किसान सभा व समर्थन कर रहे किसान संगठन फैसला करेंगे कि पड़ाव खत्म किया जाये या नहीं। किसान सभा के सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से किसानों को कर्जमुक्ति सबंंधी कोई महत्वपूर्ण घोषणा की जा सकती है।

कोई भी सरकार किसानों की हमदर्द नहीं : यादव
जय किसान आंदोलन के संस्थापक, प्रख्यात राजनीतिक-चुनाव विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार योगेन्द्र यादव ने श्रीगंगानगर में जिला प्रशासन को आज पूर्णत: ठप किये हुए किसानों की विशाल सभा में कहा कि केन्द्र में चाहे किसी भी पार्टी की सरकार रही हो, वह किसानों की हमदर्द नहीं रही है। यही कारण है कि आज देश में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। मजदूरों और व्यापारियों को भी कोई राहत नहीं है। श्री यादव ने कहा कि देश के किसानों पर 15 से 20 लाख करोड़ का कर्जा है। बैंकों की रिपोर्ट उजागर करती है कि बैंकों ने किसानों से साढ़े 13 लाख करोड़ रुपये लेने है। यादव ने कहा कि अगस्त 2007 में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होनी थी। 10 वर्ष बीतने के बाद भी यह रिपोर्ट इसलिए किसी भी सरकार ने लागू नहीें की, क्योंकि इसके लागू हो जाने पर सरकारों को सभी कृषि जिन्स न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने पड़ते। अभी कुछ ही जिन्स एमएसपी पर खरीदे जाते हंै। इसके खरीद मूल्य में हर वर्ष मामूली वृद्धि कर दी जाती है। इससे किसानों को कोई राहत नहीं मिलती। योगेन्द्र यादव ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू की गई नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी पूरी तरह से बेकार साबित हुई है। इस योजना से सिर्फ इंश्योरेंस कम्पनियों को ही फायदा हुआ है। यह कम्पनियां पांच सौ रुपये प्रति बीघा तक प्रीमियम वसूल करती हैं और जब क्लेम देना पड़ता है, तो किसानों को 100-200 के चैक दे दिये जाते हैं। मौजूदा सरकार की नीतियां अडानी-अम्बानी व टाटा जैसे बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं। देश में ऐसे बड़े उद्योगपतियों को 12 लाख करोड़ का कर्जा दिया हुआ है। विजय माल्या जैसा शराब कारोबारी 9 हजार करोड़ का कर्जा छोड़कर देश छोड़ गया। यह सरकार उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाई। ऐसी विरोधी नीतियों के कारण ही देशभर के किसान सड़कों पर उतरे हुए हैं।
इन्होंने भी किया सम्बोधित
पड़ाव स्थल पर पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल, श्योपतराम मेघवाल, किसान सभा के जिलाध्यक्ष कालूराम थोरी, किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता सुभाष सहगल एडवोकेट, जिला परिषद डायरेक्टर डूंगरराम गेदर, पूर्व विधायक पवन दुग्गल, पंचायत समिति घड़साना की प्रधान रानी दुग्गल, किसान संघर्ष समिति के अमर सिंह बिश्रोई, हरजीत सिंह लॉटरी, किसान नेता रवीन्द्र तरखान, भूमि विकास बैंक रायसिंहनगर के पूर्व अध्यक्ष राकेश ठोलिया, जिला परिषद के पूर्व डायरेक्टर सुनील गोदारा, लक्ष्मण सिंह, मा. केवल सिंह, हरबंस सिंह संगराना, रिछपाल पन्नू, रामेश्वर भादू, खेतपाल सिहाग, गोपाल मेघवाल, दूलीचंद मेघवाल, अमरचंद पूनिया, ऐटा-सिंगरासर नहर संघर्ष समिति के संयोजक राकेश बिश्रोई, ओम राजपुरोहित, बृजेश लेखा, रघुवीर ताखर, अनिल गोदारा, रमन रंधावा, आईडीपी पार्टी के राजेश भारत, हरविन्द्र सिंह, एडवोकेट गगन मान, राजस्थान बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष नवरंग सिंह चौधरी, एडवोकेट विजय रेवाड़, गंगकैनाल प्रोजेक्ट के पूर्व चेयरमैन गुरबलपाल सिंह संधू, नायब सिंह हेयर, दलबीर सिंह, रणजीत सिंह मलकाना, श्रवण सिंगाठिया, हरजिन्द्र सिंह गब्बर, राजाराम गोदारा, शोभासिंह ढिगों, रवि मालिया, मुकेश मोहनपुरिया, मनप्रीत हीर, छात्रसंघ अध्यक्ष जशनप्रीत, व्यापारी नेता हरीश कपूर, जसराम बुगालिया, आरबी नहर अध्यक्ष मेजर सिंह, जनवादी महिला समिति की वरिष्ठ नेत्री दुर्गा स्वामी, खेत मजदूर यूनियन के पालाराम नायक, सोहन सिंह मंडेर आदि ने सम्बोधित किया। सभा में कृष्ण सहारण लाधुवाला, जगदीश ंिसह हांडा, पलविन्द्र सिंह गिल, देवेन्द्र भुगर और जसवीर सिंह चक 9 डीडी के मण्डल ने अध्यक्षता की।

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