दिल्ली की लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं

मैं सबसे पहले दिल्ली की लड़कियों से यह कहना चाहती हूं कि हमारा स्टाइल और दूसरी कुछ चीजें सबसे जुदा होती हैं और हम कुछ भी कर सकती हैं। मैंने मुंबई में अपने दम पर पहचान बनाई है। आज तमाम लोग वहां मुझे जानते हैं, तो इसकी वजह यही है कि मैंने कभी अपनी दिल्ली की लड़की की पहचान नहीं खोई। मैं दिल्ली की लड़कियों से यह भी कहूंगी कि आप कभी अपनी पहचान मत खोना। इसकी बजाय आप अपनी यूनीक चीजों को आगे बढऩे के लिए इस्तेमाल करो। मैं मुंबई में बेहद गर्व से कहती हूं कि मैं दिल्ली की लड़की हूं और लोग भी शायद मेरे मुंह खोलते ही समझ जाते हैं कि मैं दिल्ली की लड़की हूं।
सफलता के इस सफर में आपको किसी की मदद भी मिली?
मैं उनसे यह भी कहना चाहूंगी कि आपको अपने दम पर आगे बढऩा सीखना होगा। अगर आप सोचती हैं कि कोई आपकद्ध आगे आकर मदद करेगा, तो यह उम्मीद बिल्कुल छोड़ दो। अपने हीरो खुद बनना सीखो। मैं सब लड़कियों से यही कहती हूं कि हमें अपना हीरो खुद बनने की जरूरत है। वरना आप जो फिल्मों में देखते हो कि कोई हीरो आपको आकर बचाता है, तो ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है।
आपको दिल्ली आकर कैसा लगता है?
मैं जब भी किसी काम से दिल्ली आती हूं, तो हमेशा ऐसा लगता है कि अपने घर लौट आई हूं और घर से ही काम कर रही हूं। आपको बता दूं कि वैसे तो मुझे स्टार वाली फीलिंग मुश्किल से ही आती है और जब मैं दिल्ली आती हूं, तो बची-खुची स्टार वाली फीलिंग भी चली जाती है। दिल्ली में मेरे अच्छे एक्सपीरियंस भी रहे हैं और बुरे भी। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मुझे दिल्ली पसंद नहीं है। मैं आपको बताना चाहूंगी कि अगर आप मुझे देशभर में कहीं पर भी रहने का ऑप्शन देंगे, तो मैं दिल्ली में ही आकर बसना चाहूंगी। मुझे जो कुछ सिखाया है, वह दिल्ली ने ही सिखाया है और आज मैं जो कुछ हूं, वह दिल्ली की वजह से ही हूं। इसलिए मुझे मेरे अपने शहर से गिला-शिकवा नहीं है।
आपकी फिल्में लगातार अच्छा कर रही हैं। फिर स्टार वाली फीलिंग क्यों नहीं आती?
मुझे कतई नहीं लगता कि मैं कोई स्टार हूं। मेरे हिसाब से स्टार वह होता है, जिसके नाम पर जनता किसी फिल्म को देखने थिएटर पहुंच जाए। उस पर विश्वास करके लोग फिल्म के टिकट खरीद लेते हैं कि फलां एक्टर ने फिल्म की है, तो आप उसे देखने थिएटर जा सकते हैं। जिस दिन मेरे साथ ऐसा कुछ होगा, तो शायद मुझे स्टार वाली फीलिंग आ जाएगी। ठीक है कि लोग मेरे लीड रोल वाली फिल्म नाम शबाना देखने गए थे और शायद मुझे देखने ही गए थे, लेकिन फिर भी मैं यही कहूंगी कि वह फिल्म बेबी की फ्रेंचाइजी थी। उसके साथ डायरेक्टर नीरज पांडे और अक्षय कुमार जैसे बड़े-बड़े नाम जुड़े थे। इसलिए नाम शबाना का क्रेडिट मुझे देना ठीक नहीं होगा और मैं यह भी नहीं कहूंगी कि किसी ने मेरा क्रेडिट ले लिया। मेरा सिर्फ यही कहना है कि मैं अभी बहुत शुरुआती स्टेज में हूं। मेरी प्रफेशनल लाइफ का गोल स्टार बनना है और जिस मुझे वाकई ऐसा लगेगा, तो मैं खुद को स्टार मानने लगूंगी।

 

मैं सबसे पहले दिल्ली की लड़कियों से यह कहना चाहती हूं कि हमारा स्टाइल और दूसरी कुछ चीजें सबसे जुदा होती हैं और हम कुछ भी कर सकती हैं। मैंने मुंबई में अपने दम पर पहचान बनाई है। आज तमाम लोग वहां मुझे जानते हैं, तो इसकी वजह यही है कि मैंने कभी अपनी दिल्ली की लड़की की पहचान नहीं खोई। मैं दिल्ली की लड़कियों से यह भी कहूंगी कि आप कभी अपनी पहचान मत खोना। इसकी बजाय आप अपनी यूनीक चीजों को आगे बढऩे के लिए इस्तेमाल करो। मैं मुंबई में बेहद गर्व से कहती हूं कि मैं दिल्ली की लड़की हूं और लोग भी शायद मेरे मुंह खोलते ही समझ जाते हैं कि मैं दिल्ली की लड़की हूं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *