युवाओं की बोली है हिप हॉप: रणवीर सिंह

बॉलीवुड फिल्में हमेशा से ही नए-नए चलनों के शुरू होने की वजह बनती रही हैं, फिर चाहे ये चलन फैशन से जुड़े रहे हों या किसी अन्य चीज से। इस कड़ी में सबसे ताजातरीन उदाहरण है देश में फलती-फूलती हिप हॉप संस्कृति। रणवीर सिंह की फिल्म ‘गली बॉय की बॉक्स ऑफिस रिलीज के साथ ही यह चलन आम हो गया था। हिप हॉप, जो पहले एक विशेष वर्ग तक ही सीमित हुआ करता था, अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुका है। यह अब आम लोगों में चर्चा का विषय बन गया है।
तलाश हुनर की…फिल्म ‘गली बॉय की सफलता के बाद रणवीर ने एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसके तहत वह एक स्वतंत्र रिकॉर्ड लेबल के जरिये देश भर के हिप हॉप आर्टिस्ट्स को तलाश कर उनके हुनर को निखारने और एक मंच मुहैया कराने का काम कर रहे थे। इस लेबल के जरिये रणवीर देश में रैप और हिप हॉप संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते हैं। जिन पहली तीन प्रतिभाओं को उन्होंने तलाशा है, उनमें काम भारी, स्लो चीता और स्पिटफायर शामिल हैं। रणवीर कहते हैं, ‘देश में चल रहे ‘रैप रिवॉल्यूशन को लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। हिन्दुस्तानी हिप हॉप का दौर आ गया है और देश की म्यूजिक इंडस्ट्री में यह धमाका जरूरी था। हिप हॉप म्यूजिक में एक अलग ही ताजगी होती है। हिप हॉप युवाओं की भाषा बन चुका है। रणवीर हिप हॉप आर्टिस्ट्स को ‘आज की पीढ़ी के कवि मानते हैं।
रैप का जप- यह जानना दिलचस्प है कि जोया अख्तर की फिल्म ‘गली बॉय की रिलीज के बाद से ही हिप हॉप विज्ञापनों, फिल्मों और यहां तक कि चुनाव प्रचार के साधन के रूप में बेहद चर्चित हो गया है। कई कंपनियों ने रैप के जरिये अपने उत्पादों का प्रचार करना शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, ‘आर्टिकल 15 और ‘खानदानी शफाखाना जैसी हालिया फिल्मों ने भी रैप को दर्शकों तक पहुंचने का जरिया बनाया। युवाओं के एक टीवी चैनल ने हाल ही में हिप हॉप की प्रतिभाएं तलाशने के लिए एक टैलेंट हंट शो शुरू किया है। इन प्रतिभाओं के गाने यूट्यूब, टिक टॉक और फेसबुक जैसे लोकप्रिय प्लैटफॉम्र्स पर अपलोड किए जा रहे हैं।

 

 

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