एक अनुमान के अनुसार भारत में हर एक मिनट में तीन लोग होते हैं स्ट्रोक से पीडित

जयपुर, 29 अक्टूबर (एजेन्सी)। वल्र्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर ईएचसीसी हॉस्पिटल के कन्सलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने इस बात पर जोर दिया कि स्ट्रोक के खतरों के बारे में आज हमें जागरूकता कायम करने की जरूरत है साथ ही ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाही करना आवश्यक है ताकि किसी जीवन को बचाया जा सके। इस वर्ष विश्व स्ट्रोक दिवस की थीम रुअप अगेनआफ्टर स्ट्रोक रखी गई हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए ईएचसीसी हॉस्पिटल के कन्सलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रविन्द्र सिंह राव ने जयपुर मे इस बात के लिए जोर दिया है कि ऐसे रोगियों को समर्थन एवं मदद मिलना जरूरी है ताकि वे स्ट्रोक के बाद अपने पांवों से चल कर अपने घर पहुंच सके तथा अपना सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। एक व्यक्ति को स्ट्रोक होता है जब मस्तिष्क में रक्त के थक्के या रक्त वाहिका को फटने के कारण मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त का प्रवाह कट जाता है, यदि यह कुछ सेकंड से अधिक समय तक होता है, तो मस्तिष्क पोषक तत्वों और ऑक्सीजन से वंचित होता है, जिससे मस्तिष्क कोशिकाएं मर जाती हैं जिससे अपरिवर्तनीय क्षति होती है।

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