बसंत पंचमी पर संगोष्ठी आयोजित

श्रीगंगानगर, 11 फरवरी (का.सं.)। पंजाबी सभ्यचारक सोसायटी की ओर से अमरिंदर सिंह शिल्पी के निवास पर रविवार को महक पंजाबी दी कार्यक्रम के तहत काव्य गोष्ठी व कवि दरबार का आयोजन किया गया। गोष्ठी की शुरुआत में पंजाबी सभ्याचारक सोसायटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह शिल्पी ने कहा कि सोसाइटी का उद्देश्य पंजाबी साहित्य कला और संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसके बाद कवि कुलदीप सिंह ने सच्चा इश्क कोई नहीं करदा और कवि मुंशीराम कंबोज ने पंजवानी पंजाबी धरती कविता प्रस्तुत की। कवयित्री नेहा अरोड़ा ने बंद पिंजरे का पंछी हां में, मै बिंब और प्रतीकों के माध्यम से जीवन के मर्म को उकेरा। इसके अलावा भी नेहा ने मार्मिक कविताएं प्रस्तुत की। कवित्री परमजीत कौर रीत ने शीश झुका हाथ जोड़ के और धंधा ने बदल दी थी सूरज दी तस्वीर कविता से ध्यान आकर्षित किया। पंजाबी कवि कोकी अहलूवालिया ने मैं बढ़ाई मेरी मूरत, मूरत मैनूही नींदड़ बागी जैसी सशक्त कविता के माध्यम से इंसानी फितरत को बयां किया। कवियत्री मीनाक्षी आहूजा ने किसे दे भावा द मूल और किसे दे बंद लाके लगदा दरिया जैसी कविताओं से गोष्ठी में समा बांधा। सोसायटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह शिल्पी ने सुन सुन ससे से सस्वर पंजाबी गीत सुनाया। नाटककार नीरू छाबड़ा, हरीश छाबड़ा, सनी, प्रोफेसर जितेंद्र बुट्टर, चित्रकार डॉ वीना बंसल विशेष रूप से मौजूद रहे। गोष्ठी की अध्यक्षता मीनाक्षी आहूजा ने की। संचालन साहित्यकार सुभाष संगठन द्वारा किया गया।

 

 

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