इस हफ्ते तय हो सकता है जेपी के होमबायर्स का भविष्य

 

नोएडा। जेपी के बायर्स के लिए यह पूरा सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण है। आज एनबीसीसी अपना संशोधित प्रस्ताव सीओसी (कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स) को सौंपेगा। इसमें वह प्रमुख रूप से यह बताएगा कि जेपी के प्रॉजेक्ट पूरे करने के लिए फंड की व्यवस्था कैसे होगी। अगर आज एनबीसीसी मजबूत रिपोर्ट सौंप देता है तो कल यानी 14 मई को होने वाली सीओसी की मीटिंग में एनबीसीसी के पक्ष में वोटिंग प्रक्रिया का फैसला लिया जा सकता है। उसी के रिजल्ट के आधार पर 21 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली जेपी ग्रुप की सुनवाई बायर्स का आगे का भविष्य तय करेगी। कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स में बैंक, बायर्स और कोर्ट के प्रतिनिधि शामिल हैं। पिछले दिनों एनबीसीसी और सुरक्षा एजेंसी, दोनों के प्रपोजल में से एनबीसीसी का प्रपोजल रिजेक्ट हो गया था। उसके बाद सुरक्षा एजेंसी को मात्र 22 पर्सेंट बायर्स की वोटिंग होने की वजह से रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बावजूद एनबीसीसी के प्रति बायर्स का भरोसा बना हुआ है। इसी के चलते सीओसी ने फिर से रिवाइज्ड प्रपोजल मांगा है जिसकी सोमवार को सीओसी को सौंपने की अंतिम तारीख है। यदि सबकुछ सकारात्मक रूप से आगे बढ़ा तो 16 से 19 मई के बीच का समय एनबीसीसी के लिए वोटिंग करने का तय हो सकता है और 21 को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में इसका रिजल्ट रखा जाएगा। यदि एनबीसीसी अपना रिवाइज्ड प्रपोजल उतना मजबूत नहीं दे पाती तो ज्यादा संभावना यही है कि जेपी बिल्डर को ही प्रॉजेक्ट पूरे करने का मौका भविष्य में फिर से दिया जाएगा। बायर्स की लड़ाई में शामिल प्रमोद कुमार ने बताया कि वोटिंग की प्रक्रिया तो जेपी ग्रुप को लाने के लिए भी की जाएगी और इसमें चुनौती यह है कि 90 पर्सेंट वोटिंग होगी तभी जेपी ग्रुप को प्रॉजेक्ट पूरे करने का मौका मिल पाएगा। वहीं एनबीसीसी के लिए मात्र 66 पर्सेंट वोटिंग की जरूरत होगी। अब पूरा दारोमदार आज एनबीसीसी के रिवाइज्ड प्रपोजल पर निर्भर करता है।

 

 

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