पौने दो करोड़ के पीएनबी लोन घोटाले में तीन और ने सरेंडर किया, अब तक 35 गिरफ्तारियांं

श्रीगंगानगर, 5 मार्च (नि.स.)। पंजाब नेशनल बैंक में हजारों करोड़ के घोटाले उजागर होने पर श्रीगंगानगर जिला पुलिस भी इसी बैंक की एक शाखा में छह-सात वर्ष पहले हुए पौने 2 करोड़ के लोन घोटाले में शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारियों के लिए सक्रिय हो गई है। सोमवार को इस घोटाले के तीन अभियुक्तों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया, जिसमें एक महिला भी है। इन तीनों को कोर्ट में पेश करने पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अन्य मुल्जिम भी आज पुलिस के समक्ष हाजिर हुआ, तो अपने साथ हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के कागजात साथ ही लेकर आया। इस मामले में अब तक 35 मुल्जिमों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें बैंक के दो प्रबंधक तथा तीन अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। अभी भी इस प्रकरण में 15 से अधिक व्यक्तियों की गिरफ्तारियां बाकी हैं। गण घोटाले का यह मामला वर्ष 2012 में पीएनबी के एक मैनेजर पिताम्बरलाल ने रावला थाना में दर्ज करवाया था। यह घोटाला रावला थाना अधीन मंडी 365 हैड शाखा में वर्ष 2010, 11 और 12 में किया गया था। पुलिस के अनुसार इन तीन वर्षांे के दौरान इस बैंक में प्रबंधक के पद पर रहे दो अधिकारियों व तीन अन्य कर्मचारियों के साथ सांठ-गांठ कर तीन-चार शातिर किस्म के व्यक्तियों ने ग्रामीण क्षेत्रों के भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाया। इन लोगों को 10-10 हजार का बिना गारंटी के लोन मिलने का झांसा दिया गया। बैंक में लाकर इनकी तस्वीरें लोन फॉरम पर लगाई गईं, लेकिन नाम-पते तथा आईडी प्रूफ सब फर्जी लगा दिये। इनके नाम पर अधिकतम चार-चार लाख तक का लोन उठाया गया। बदले में सिर्फ 10-10 हजार रुपये दिये गये। घोटाले का भंडाफोड़ वर्ष 2012 में हुई इस शाखा की ऑडिट में हुआ। बैंक द्वारा की गई जांच-पड़ताल में लगभग साठ व्यक्ति इस घोटाले में लिप्त पाये गये। कुल मिलाकर एक करोड़ 61 लाख की राशि यह घोटालेबाज लोन के रूप में मंजूर करवाकर इस बैंक की डकार गये। पुलिस ने बताया कि एक मैनेजर मोहनलाल सहित दो मैनेजर, बैंक के तीन कर्मचारी-जेा लोन पास करने की प्रक्रिया पूरी करते थे, के समेत अब तक 32 गिरफ्तारियां हो चुकी थीं। थानाधिकारी अमरजीत चावला ने बताया कि सोमवार को तीन मुल्जिमों- जसप्रीत कौर पत्नी जसवीर सिंह रामगढिय़ा, अमरीक सिंह व संतोख सिंह निवासी कालियां-श्रीगंगानगर ने सरेंडर कर दिया। इन तीनों को कोर्ट मेें पेश करने पर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इनके अलावा कालियां का ही एक और मुल्जिम आज थाने में आया, लेकिन वह अपने साथ हाईकोर्ट द्वारा मंजूर कर ली गई अग्रिम जमानत की अर्जी के आदेश भी साथ लाया। उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के अनुसार इस मामले में कालियां के इस मुल्जिम सहित चार जनों को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। दो मुल्जिमों की मौत हो गई है। अभी भी 15 से अधिक व्यक्तियों की गिरफ्तारियां बाकी हैं। खास बात ये है कि इतनी गिरफ्तारियां होने के बाद भी डकारी गई एक करोड़ 61 लाख की राशि का थोड़ा-बहुत हिस्सा ही पुलिस बरामद कर सकी है। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों के फर्जी नाम-पतों से लोन मंजूर करवाया गया, वे अस्तित्व में ही नहीं है। जिन लोगों को आगे करके यह लोन उठाया गया था, उन्हें यह पैसा मिला ही नहीं। जिन मुल्जिमों को पैसा मिला, उन्होंने उसे खर्च डाला। लिहाजा बैंक को इस घोटाले से काफी नुकसान हुआ।

 

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