स्तन कैंसर के उपचार में नहीं होगा दिल को खतरा

 

जयपुर, 15 सितम्बर (एजेन्सी)। पुरूषों में फेफडे, मुख, गले के कैंसर और महिलाओं में गर्भाशय व स्तन कैंसर के रोगी देश में तेजी से बढ रहे है। इन सभी रोगों के उपचार में रेडिएशन थैरेपी चिकित्सा पद्धती महत्वपूर्ण है।
इस थैरेपी की सभी नवीनतम तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा मंथन बिमकॉन-टप् एंड राज-एरोइकॉन में किया गया। एसोसिएशन ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजी ऑफ इंडिया के राजस्थान चैप्टर और भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर जयपुर की ओर से एंटरटेनमेंट पेराडाइज में चल रही इस कॉन्फ्रेंस का समापन रविवार को हुआ। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन पहले सत्र में मुंबई की डॉ शर्मिला अग्रवाल ने बताया बताया कि किस तरह से किसी भी महिला के बाए स्तन में कैंसर की गांठ के उपचार के दौरान उसके महिला के है को रेडिएशन की किरणों से बचाया जा सकता है।कॉन्फ्रेंस की आयोजक सचिव डॉ निधी पाटनी ने बताया कि आईजीआरटी, वीमेट, रेपिड आर्क, एसआरएस, एसआरटी और प्रोटोन थैरेपी के जरिए एडवांस स्टेज के कैंसर को भी ठीक किया जा सकता है। कॉन्फ्रेंस के जॉइंट सेक्रेट्री डॉ तेज प्रकाश सोनी ने बताया कि ज्यादातर मरीज कैंसर के शुरूआती लक्षणों को इग्नोर करते है और जब बीमारी बढने पर समस्या बढती है तब चिकित्सक के पास आते है। डॉ सोनी ने बताया कि नियमित जांच के जरिये इस रोग की पहचान भी शुरूआती अवस्था में की जा सकती है।एसोसिएशन ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजी ऑफ इंडिया, राजस्थान चैप्टर के प्रेसिडेंट डॉ एच एस कुमार और सचिव डॉ शंकर जाखड ने कॉन्फ्रेस के आयोजन को सफल बताया। कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन डॉ सुप्रिया चौपडा ने लीवर कैंसर और डॉ वी मूर्ति ने प्रोस्टेट कैंसर के उपचार में मौजूद वर्तमान अनुसंधान और तकनिकों के बारे में जानकारी दी।कॉन्फ्रेंस का समापन पैनल डिस्कशन के साथ हुआ जिसमें डॉ नरेश जाखोटिया, डॉ दिनेश सिंह सहित देश के नामी चिकित्सा संस्थानों के आठ डॉक्टरों की ओर से प्रोस्टेट कैंसर विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

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