श्रीगंगानगर में समर्पण दिवस पर होगी सत्संग

सन्त निरंकारी मिशन द्वारा आज बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी

श्रीगंगानगर, 12 मई (का.सं.)। संत निरंकारी मिशन द्वारा आज 13 मई, सोमवार को बाबा हरदेव सिंह जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी। इस दिन को ‘समर्पण दिवस का नाम दिया गया है। बाबा जी ने सद्गुरु रूप में संत निरंकारी मिशन का 36 वर्षों तक मार्गदर्शन किया और तीन वर्ष पूर्व इसी दिन अपने साकार रूप का त्याग करके इस निराकार में विलीन हो गये। समर्पण दिवस पर निरंकारी भक्त संसार भर में समागम अथवा विशेष सत्संग कार्यक्रम आयोजित करेंगे और मानवता के आध्यात्मिक तथा सामाजिक कल्याण के लिए बाबा जी की अमूल्य देन को याद करते हुए उनकी शिक्षाओं को संसार के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए अपने आपको पुन: समर्पित करेंगे ताकि अज्ञानता के अंधकार को ब्रह्मज्ञान के प्रकाश द्वारा दूर किया जा सके। समर्पण दिवस का मुख्य समागम दिल्ली में सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की छत्रछाया में आयोजित किया जायेगा।इसी कड़ी में समर्पण दिवस उपलक्ष्य सूरतगढ़ बाईपास स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में सोमवार रात्रि 7 से 9 बजे तक सत्संग का आयोजन किया गया है। गौरतलब है कि बाबा जी के युग में मिशन का अद्वितीय विस्तार हुआ। बाबा जी ने मिशन के संदेश को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए हर प्रकार के संचार साधनों का प्रयोग किया। जहां प्रचारकों की संख्या में वृद्धि हुई, वहीं मिशन की पत्रिकाओं को भी विस्तार रूप दिया गया। इसके अलावा समाचार-पत्रों तथा टी.वी. चैनलों से भी सहायता प्राप्त की।बाबा जी स्वयं भी साल में 200 से अधिक दिनों तक कल्याण यात्रा पर रहते थे, जिसके फलस्वरूप देश के कोने-कोने में सत्संग कार्यक्रम आयोजित किये गये, जहां भक्त दूर-दूर से उमडकऱ आते, हजूर का हर कार्यक्रम एक विशाल समागम का रूप धारण कर लेता। इसी प्रकार दूर देशों में भी मिशन का उल्लेखनीय विकास हुआ। वर्ष 1980 में जब बाबा जी ने सद्गुरु रूप में मिशन की बागडोर संभाली तो भारत के बाहर 17 देशों में मिशन की शाखाएं स्थापित हो चुकी थी, परन्तु बाबा जी के प्रेम व अपनत्व की भावना से यह संख्या बढकऱ 60 हो गयी थी।
बाबा हरदेव सिंह जी ने मिशन के युवा वर्ग को भी उत्साहित किया ताकि वह आगे आएं और बिना अपने वातावरण अथवा रहन-सहन के तरीकों का त्याग किये मिशन की विविध गतिविधियों में भाग लें और कुछ जि़म्मेदारियां निभायें। बाबा जी ने विशेष तौर पर युवा वर्ग को समाज कल्याण के कार्यों में अधिक से आधिक योगदान देने के लिए प्रेरित किया। आज सद्गुरु माता सुदीक्षा जी भी देश तथा दूर देशों में ‘निरंकारी यूथ सिम्पोजिय़म आयोजित कर रहे हैं जिनमें हज़ारों की संख्या में युवा वर्ग भाग ले रहा है और मिशन के संदेश को आगे से आगे पहुंचाने के लिए योगदान दे रहा है। मिशन का पहला रक्तदान शिविर बाबा जी के समय में ही नवम्बर 1986 में आयोजित किया गया और तभी से इन शिविरों की संख्या बढ़ती रही और यह शिविर दूर देशों में भी आयोजित होने लगे। निरंकारी भक्तों द्वारा आज तक 10 लाख से भी अधिक रक्त यूनिटों का योगदान दिया जा चुका है।बाबा जी की रहनुमायी में दिल्ली, आगरा, कोलकाता तथा चेन्नई में चार अस्पताल, देशभर में 137 डिस्पैंसरियां तथा 10 पेथोलोजीकल लेबोरेट्री धर्मार्थ सेवा कर रही थी। इनके अलावा मिशन दो कॉलेज तथा 24 स्कूल चला रहा था जहां ऐसे विद्यार्थियों को भी उत्तम स्तर की शिक्षा दी जाती थी जो आर्थिक रूप से कमज़ोर होने के कारण वंचित रह जाते थे। योग्य विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप भी दिए जाते थे। बाबा जी के समय में ही उनके जन्मदिन 23 फरवरी को 2003 से हर वर्ष देशभर में वृक्षारोपण तथा सफाई अभियान आरम्भ किये गये जिनमें समय-समय पर प्राचीन स्मारकों, सरकारी अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, समुद्र तथा नदियों के तटों एवं पार्कों इत्यादि पर विशेष ध्यान दिया गया। समाज कल्याण की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के लिए बाबा जी ने अप्रैल 2010 में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन का गठन किया। निरंकारी सरोवर परिसर का जो सुंदर रूप बना है, यह भी बाबा हरदेव सिंह जी का ही एक सपना था जो उनके जीवन काल में ही पूरा हुआ। निरंकारी संग्रहालय – दिव्य यात्रा तथा एकत्व का फव्वारा, सरोवर परिसर में ऐसे स्थल हैं जिन्हें देखने हर रोज़ हज़ारों लोग आ रहे हैं।इनके अलावा तीन मंजिला कार्यालय, पुस्तकालय तथा कैफेटेरियां आदि भी सरोवर परिसर की शोभा को चार चांद लगा रहे हैं। दिल्ली में संत निरंकारी हेल्थ सिटी तथा समालखा में संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल बाबा जी के ऐसे सपने है जो उनके जीवनकाल में पूरे न हो सके।  सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज बाबा हरदेव सिंह जी द्वारा दिये गये सत्य, प्रेम और सहनशीलता के सन्देश को विश्व भर में फैलाने का प्रयास कर रहीं हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *