देश की 82 फीसदी आबादी जबरदस्त तनाव से घिरी हुई : सर्वे

मुंबई, 1 अप्रैल(एजेन्सी)। अमरीका आधारित सिग्ना कॉर्पोरेशन और भारतीय साथी समूह टीटीके ग्रुप और मणिपाल ग्रुप के बीच एक संयुक्त उद्यम सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस ने अपने 2019 सिग्ना 360 वेल-बीइंग सर्वे-वेल एंड बियॉन्ड के परिणाम जारी किए। सर्वेक्षण से पता चलता है कि यूएसए, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य विकसित और उभरते देशों की तुलना में भारत में तनाव का स्तर बहुत अधिक है। भारत की लगभग 82 प्रतिशत आबादी तनाव से पीडि़त है और सैंडविच पीढ़ी (35-49 वर्ष की आयु वाले) लगभग 89 फीसदी लोग तनाव से सबसे अधिक प्रभावित हैं। देश में तनाव के प्रमुख कारण काम, स्वास्थ्य, और वित्त से जुड़े मुद्दे हैं। 2019 सिग्ना 360 वेल-बीइंग सर्वे अब अपने पांचवें वर्ष में आ पहुंचा है, जिसमें पांच प्रमुख इंडेक्स-फिजिकल, फैमिली, सोशल, फाइनेंशियल और और वर्क में लोगों की वेल-बीइंग या खुशहाली की परख करना है। कई स्वास्थ्य संबंधी विषयों के अलावा यह सिग्ना का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण है। इस साल के सर्वेक्षण में भारत के वर्कप्लेस वेलनैस प्रोग्राम्स पर रोशनी डाली गई है, जो बहुत व्यापह है और अन्य मार्केट्स की तुलना में इनमें भागीदारी दर उच्च है। सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ प्रसून सिकदर कहते हैं कि यह बेहद चिंताजनक है कि 3 में से 1 व्यक्ति को नहीं लगता कि उच्च रक्तचाप के मामले में जीवनशैली के साथ बदलाव करते हुए इसे ठीक किया जाना चाहिए, इस मामले में अनुपचारित रहने परघातक दिल का दौरा या स्ट्रोक पड़ सकता है। चिंता का एक प्रमुख कारण यह है कि भारत ने पिछले 25 वर्षों में हृदय रोग और स्ट्रोक की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखी है। इस प्रकार, मौजूदा स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों के लिए हृदय रोग के जोखिम को कम करने और स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए ही नहीं बल्कि हर किसी के लिए हृदय को स्वस्थ रखने वाली जीवन शैली के बारे में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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