सरकारी बैंकों को मजबूती देने के लिए सरकार देगी पूंजी-अरुण जेटली

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि सरकार ने बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी बैंकों में अधिक पूंजी लगाने की योजना बनाई है। गौरतलब है कि सरकार ने बीते महीने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपए का पैकेज देने की घोषणा की थी, जो कि भारी भरकम एनपीए के बोझ से दबे हैं।पीएसबी मंथन में क्या बोले जेटली: ‘पीएसबी मंथन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुखों से बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बजट में से, बॉन्ड निर्गम और बैंकों की शेयर पूंजी के विस्तार के जरिये बैंकों में और पूंजी डालने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि एक तरह से देखा जाए तो बैंकों की वित्तीय स्थिति बेहतर करने के लिये देश उन्हें पैसा दे रहा है।जेटली ने बैंक प्रमुखों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि आपको यह देखने को नहीं मिलेगा कि हम वाणिज्यिक लेनदेन में हस्तक्षेप कर रहे हैं।लेकिन जब व्यवस्था ये सब बदलाव कर रही है और बैंकों को मजबूत करने के लिये ये सभी मौद्रिक योगदान दिये जा रहे हैं, ऐसे में सरकार चाहती है कि सरकारी बैंकिंग प्रणाली मजबूत हो जाए ताकि आर्थिक वृद्धि का समर्थन करने के लिए आपकी क्षमता भी बढ़ जाए।उन्होंने आगे कहा कि बैंक जिन क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं उसमें एक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (रूस्रूश्व) को समर्थन देना प्रमुखता से शामिल है, क्योंकि ये सेक्टर नौकरियों के सृजन के साथ साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

विदेशी निवेशकों ने नवंबर में अब तक किया 1.5 अरब डॉलर का निवेश: पीएसयू बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपए की पूंजी डालने की सरकार की योजना से उत्साहित विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने घरेलू शेयर बाजारों में इस महीने अबतक 1.5 अरब डॉलर (9,710 करोड़ रुपए) का भारी-भरकम निवेश किया है. इससे पहले अक्टूबर में एफपीआई ने तीन हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया था. उसके पहले अगस्त और सितंबर में उन्होंने 24 हजार करोड़ रुपए से अधिक निकासी की थी. आंकड़ों के मुताबिक, 10 नवंबर तक एफपीआई ने कुल 9,710 करोड़ रुपए का निवेश किया है. हालांकि, उन्होंने इस दौरान बाजार से 780 करोड़ रुपए की निकासी भी की है.बाजार के जानकारों का मानना है कि सरकार के पीएसयू बैंकों के पूंजीकरण तथा सड़क विकास के लिए छह लाख करोड़ रुपए से अधिक के आवंटन की घोषणा के बाद एफपीआई का रुझान बढ़ा है. सरकार की घोषणा के बाद तुरन्त बाद से एफपीआई ने निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है. बैंकों के पूंजीकरण के निर्णय को बैंकों और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा कदम माना जा रहा है।

 

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