डेटा स्टोरेज पर अमेरिकी कंपनियों और पेटीएम के बीच छिड़ी जंग

नई दिल्ली। अमेरिकी पेमेंट फर्म्स भारत को डेटा स्टोरेज के नियमों में बदलाव को लेकर सहमत करती दिख रही हैं। हालांकि अमेरिकी कंपनियों की लॉबिंग के चलते स्थानीय पेमेंट कंपनी पेटीएम के साथ उनका विवाद बढ़ता दिख रहा है। सूत्रों एवं मामले से संबंधित डॉक्युमेंट्स से यह बात पता चलती है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अप्रैल में पेमेंट फर्म्स को आदेश दिया था कि वे डेटा को स्थानीय स्तर पर ही स्टोर करें ताकि निरंकुश सुपरवाइजरी एक्सेस की स्थिति न हो सके। केंद्रीय बैंक के इस आदेश के चलते वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कंपनियों को लाखों डॉलर का नुकसान हो सकता था और ग्लोबल फ्रॉड डिटेक्शन को नुकसान पहुंचेगा। हालांकि इन नियमों के चलते स्वदेशी पेमेंट्स कंपनी पेटीएम को बढ़त मिली और चीन की अलीबाबा को भी इससे फायदा हुआ, जो पहले से ही भारत में अपने डेटा की स्टोरेज करती हैं। कंपनी ने इस प्रस्ताव का खुले तौर पर समर्थन किया और दरवाजे के पीछे से उन कंपनियों के प्रयासों से निपटने की कोशिश की। जून में अधिकारियों और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के बीच मीटिंग में पेटीएम ने विदेशी कंपनियों के एग्जिक्युटिव्स से बातचीत में बताया था कि स्थानीय स्तर पर डेटा स्टोरेज के क्या फायदे हैं और कैसे ये नियम राष्ट्र हित में हैं। पूरे मामले में से जुड़े तीन लोगों ने यह बात बताई। इस मीटिंग में भारत के आर्थिक मामलों के सचिव एस.सी गर्ग भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक मीटिंग के दौरान गर्ग ने पेटीएम से कहा कि वह इस पूरी बातचीत में राष्ट्रहित की बात को डिबेट में न लाए। इस पूरी बात से यह माना जा रहा है कि भारत सरकार अमेरिकी कंपनियों के दबाव आगे नियमों में बदलाव को लेकर राजी हो सकती है।

 

 

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