शहरी, रूरल यूजर्स के लिए अलग ब्रैंड रखेंगी वोडा-आइडिया

 

मुंबई। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के मर्जर के बाद दोनों कंपनियां अपने ब्रैंड्स को लेकर सतर्कता बरतेंगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई एंटिटी नया ब्रैंड बनाने में जल्दबाजी नहीं करेगी क्योंकि इससे कस्टमर्स भ्रमित हो सकते हैं। मर्जर को लेकर इन दोनों टेलिकॉम कंपनियों के साथ काम कर रहे एक एनालिस्ट ने कहा, दोनों कंपनियों के नाम को मिलाया जा सकता है, लेकिन शहरी और ग्रामीण कस्टमर्स के लिए अलग ब्रैंड होंगे। शहरी ग्राहकों के लिए पोस्टपेड ऑफर्स एक विशेष ब्रैंडिंग के साथ आएंगे और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक अलग ब्रैंड होगा। डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम ने सोमवार को देश की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी, क्रमश: वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर के मर्जर को शर्तों के साथ मंजूरी दी थी। इन दोनों कंपनियों के मर्जर के बाद देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बनेगी, जिसके पास 43 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर होंगे। अभी भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। नई कंपनी अपने मौजूदा सब्सक्राइबर्स के साथ अपने जुड़ाव में किसी तरह की रुकावट नहीं चाहेगी। नई कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड रखने का प्रपोजल है। यह लिस्टेड बनी रहेगी। ब्रैंड एक्सपर्ट्स का कहना है कि मर्जर में बैकएंड से अधिक जुड़ा होगा। कंपनी का नाम बदल जाएगा, लेकिन मौजूदा प्रॉडक्ट लाइंस जारी रहेंगी। ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर ने कहा, अगर नई कंपनी नए टैरिफ ऑफर्स के साथ आती है तो कस्टमर्स पर असर पड़ेगा।नई कंपनी के साथ सब्सक्राइबर्स को बरकरार रखने के लिए ब्रैंड जैसे बदलाव मर्जर के कई महीनों बाद होने चाहिए।’ ब्रैंड ईगल कंसल्टिंग के फाउंडर, रोनित मित्रा का कहना था, ‘मर्जर के बाद कस्टमर सर्विस, बिलिंग जैसे बैकएंड ऑपरेशंस को लेकर चुनौती हो सकती है, जिससे एक ब्रांड पर असर पड़ता है और नई एंटिटी को इन समस्याओं से बचना होगा।’ इस बारे में दोनों कंपनियों ने ईटी के प्रश्नों के उत्तर नहीं दिए। ब्रिटेन की वोडाफोन की सब्सिडियरी वोडाफोन इंडिया और कुमार मंगलम बिड़ला के मालिकाना हक वाली आइडिया मर्जर के बाद की स्थिति पर विचार कर रही हैं। इन कंपनियों को नए कस्टमर्स को आकर्षित करने के साथ ही मौजूदा सब्सक्राइबर्स को अपने साथ बरकरार रखना होगा।वोडाफोन इंडिया की शहरों में अच्छी पकड़ है। शहरों में अधिकतर कस्टमर्स पोस्टपेड प्लान को पसंद करते हैं। आइडिया की ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक पहुंच हैं, जहां प्री-पेड टैरिफ के सब्सक्राइबर्स अधिक हैं।दोनों कंपनियों ने मार्च 2017 में कहा था कि मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी की ब्रांड स्ट्रैटेजी समय के साथ तैयार की जाएगी और इसमें मौजूदा ब्रैंड्स के साथ एक दशक से कस्टमर्स के जुड़ाव का फायदा उठाया जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *