छंटनी पर 5 लाख मंथली सैलरी वाले को 25 लाख दे रही है वोडाफोन

 

नई दिल्ली। वोडाफोन ग्रुप अपने उन कर्मचारियों को अच्छा खासा अमाउंट ऑफर कर रही है, जो कंपनी के लिए सालों से जुड़े हुए हैं लेकिन आइडिया के साथ मर्जर के बाद बनने वाली नई कंपनी में उन्हें नौकरी पर नहीं रखा जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि कंपनी के एग्जिक्यूटिव्स ने जितने साल ब्रिटेन में कंपनी के हेडक्वॉर्टर में बिताए हैं, उसमें उनकी 3 महीने की सैलरी से गुना करके उन्हें रकम ऑफर की जा रही है। इस मामले से वाकिफ एक एग्जिक्यूटिव ने बताया, ‘लेवल 1 से लेवल 4 तक के एंप्लॉयीज को गोल्डेन हैंडशेक दिया जा रहा है। यह काफी अच्छा ऑफर है। यह ग्रुप की सेपरेशन पॉलिसी के मुताबिक भी है।’ लेवल 1 में कंपनी के शीर्ष अधिकारी आते हैं, जबकि सीनियर मैनेजर लेवल 4 कैटिगरी में हैं। अभी तक इन एंप्लॉयीज की संख्या के बारे में पक्की जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि 70 एग्जिक्यूटिव्स को ऐसे ऑफर मिल चुके हैं। गोल्डेन हैंडशेक उस पैकेज को कहते हैं, जिसे कोई कंपनी कर्मचारी को छंटनी के बाद ऑफर करती है। यह सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को दिया जाता है, जिन्होंने कंपनी के लिए शानदार प्रदर्शन किया हो। यह उन टॉप एग्जिक्यूटिव्स को भी दिया जाता है, जिनके ऑफर लेटर में इसका क्लॉज होता है। वोडाफोन के मामले में अगर किसी कर्मचारी ने 5 साल तक काम किया हो और उसकी मंथली इनकम 5 लाख या उससे ज्यादा हो तो, उसे कंपनी से गोल्डेन हैंडशेक के रूप में 25 लाख रुपये मिलेंगे। वोडाफोन ने ईमेल से पूछे गए ईटी के सवालों के जवाब में कहा, ‘एंप्लॉयीज के साथ गरिमा और सम्मान से पेश आना दोनों कंपनियों (वोडाफोन और आइडिया) के डीएनए में है। कंपनी ने बताया, हमने मर्जर के बाद एक नया ऑर्गनाइजेशन बनाने का प्रस्ताव दिया है, जिसमें वोडाफोन इंडिया और आइडिया के सबसे अच्छे एंप्लॉयीज होंगे। नई कंपनी में किसी काम के लिए सर्वाधिक योग्य लोगों को नौकरी मिलेगी। इसके लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और कॉमन प्रोसेस अपनाया जाएगा।फिलहाल दोनों कंपनियों को मर्जर के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) से आखिरी मंजूरी का इंतजार है। मर्जर के बाद बनी नई कंपनी का नाम वोडाफोन आइडिया लिमिटेड होगा। यह देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी होगी, जिसके पास 44 करोड़ सब्सक्राइबर्स और 34.7त्न रेवेन्यू मार्केट शेयर होगा। कंपनी की शुरुआत 60,000 करोड़ की आमदनी और 1,25,000 करोड़ के कर्ज के साथ होगी, जिसमें से 90,000 करोड़ रुपये विभिन्न स्पेक्ट्रम्स की नीलामी के लिए सरकार को चुकाए जाने हैं।

 

 

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