डब्ल्यूजीसी का सुझाव,भारत में बुलियन बैंकिंग सिस्टम शुरू करे सरकार

 

कोलकाता। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने सरकार को देश में चरणबद्ध तरीके से देश में बुलियन बैंकिंग शुरू करने की सलाह दी है। काउंसिल ने लोकल गोल्ड मार्केट को संगठित और पारदर्शी बनाने के मकसद से यह सुझाव दिया है। भारत दुनिया में गोल्ड का दूसरा सबसे बड़ा कन्ज्यूमर है। WGC  के मैनेजिंग डायरेक्टर (इंडिया) पी आर सोमसुंदरम ने कहा, भारतीय गोल्ड मार्केट के सामने कई चुनौतियां हैं जैसे- क्वॉलिटी अश्योरेंस का न होना, मार्केट की असंगठित हालत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोर स्थिति। इन समस्याओं से निपटने के लिए बुलियन बैंकिंग मुख्य स्तंभों में से एक है। इसके जरिए भारत प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय बाजारों में अपनी जगह बना पाएगा। यहां सालाना लगभग 850-900 टन गोल्ड की खपत होती है।
कभी भी हो सकती है ‘गोल्ड बैंकिंग’ की शुरुआत -बुलियन बैंकिंग की शुरुआत गोल्ड पॉलिसी का एक अहम हिस्सा है। सरकार काफी समय से इसे लाने की तैयारी कर रही है और वह कभी भी इसे शुरू कर सकती है। सरकार देश में गोल्ड को ऐसेट क्लास बनाने के मकसद से इस नीति को लाने पर विचार कर रही है। WGC   ने भारत में बुलियन बैंकिंग की आवश्यकता पर एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की है। वह जल्द ही इसे वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सिक्यॉरिटीज ऐंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया को सौंप सकती है।
चीन में आया बुलियन को लेकर बड़ा बदलाव –गोल्ड को दुनियाभर के सबसे अच्छे लिक्विड ऐसेट क्लास (आसानी से कैश में भुनाए जा सकने वाले ऐसेट) में से एक माना जाता है। अमेरिका, यूके, चीन और स्विट्जरलैंड समेत कई देशों में बुलियन मार्केट पूरी तरह कामकाजी और ऑर्गनाइज्ड है। इन देशों में प्रतिभागी बुलियन बैंकों के जरिए बुलियन मार्केट में पहुंचते हैं। पारंपरिक तौर पर बुलियन मार्केट पर यूके और अमेरिका का दबदबा था। यहां मुख्य रूप से ग्लोबल बैंक ये सेवाएं देते थे। हालांकि चीन में ऑर्गनाइज्ड मार्केट के उभरने से सिस्टम में एक नया बदलाव आया है। चीन में गोल्ड की सबसे अधिक खपत होती है। आज चीनी बैंकों की बड़ी तादात बुलियन मार्केट में भी हिस्सा लेती है।
भारत में सीमित है सर्राफा बैंकिंग –दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड मार्केट होने से भारत के पास काफी बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन बेस है। इतना बड़ा मार्केट साइज होने के बावजूद भारत में सर्राफा बैंकिंग अभी अपने शुरुआती स्तर पर ही है और सीमित सेवाएं ही देता है। इसमें कन्साइनमेंट सेल्स, गोल्ड कॉइन सेल्स और आभूषण के बदले कर्ज जैसी सर्विसेज ही शामिल हैं। ये सेवाएं मुख्यधारा की बुलियन बैंकिंग इंडस्ट्री में नॉन-कोर सर्विस में गिनी जाती हैं।
कैसे काम करते हैं सर्राफा बैंक -WGC  के सुझाव के मुताबिक पहले चरण में सर्राफा बैंक 1-2 सालों तक वैल्यू-जेनरेटिंग प्रॉडक्ट्स के सीमित रेंज ऑफर कर सकते हैं। इनमें गोल्ड मेटल लोन, डोर फाइनैंसिंग, गोल्ड डिपॉजिट प्रॉडक्ट्स, गोल्ड बैक इंश्योरेंस, ब्रोकरेज और क्लियरिंग जैसे सर्विसेज शामिल किए जा सकते हैं।दूसरे चरण में 2-5 साल की अवधि में बैंक स्पॉट और डेरिवेटिव, दोनों मार्केट के लिए मार्केट मेकिंग सर्विसेज ला सकते हैं। साथ ही खुदरा और संस्थागत निवेशकों के लिए इनोवेटिव इनवेस्टमेंट प्रॉडक्ट भी ऑफर कर सकते हैं। इसके बाद अगले पांच सालों में सराफा बैंक ग्लोबल बुलियन मार्केट में विस्तार कर सकते हैं।

 

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