हिंदी फिल्म में काम,बाहर जाकर काम करने जैसा है अमृता

अमृता खानविलकर मराठी सिनेमा का बहुचर्चित चेहरा हैं। जल्द ही वह फिल्म राजी’ में आलिया भट्ट की जेठानी का किरदार निभाती नजर आएंगी। अपने फिल्म करियर और निजी जिंदगी के बारे में अमृता ने यहां खुलकर बातचीत की:
फिल्म राजी से आपका जुडऩा कैसे हुआ और अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?
इंडस्ट्री के फेमस कास्टिंग डायरेक्टर जोगी, जिन्होंने पिंक, अक्टूबर जैसी फिल्मों की कास्टिंग की है, मैं एक दिन ऑडिशन के लिए उनके पास गई थी। जिस दोपहर को ऑडिशन दिया, ठीक उसी रात को मुझे फोन आया कि कल जाकर डायरेक्टर मेघना गुलजार से मिलना है। मैं अगले दिन मेघना जी से मिली। उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें मेरा ऑडिशन बहुत पसंद आया। तो इस तरह मुझे यह फिल्म मिली। इस फिल्म में मैं पाकिस्तानी मुस्लिम लड़की का किरदार निभा रही हूं। यह फिल्म 70 के दशक की है, तो फिर इसका लहजा, बात करने का तरीका और फिर कपड़े पहनने का ढंग, हर चीज बहुत अलग है। इस फिल्म में काफी उर्दू लहजे का प्रयोग किया गया है। इसलिए फिल्म करने में मुझे काफी मजा आया क्योंकि एक ऐक्टर के तौर पर मेरे लिए यह काफी अलग था।
आलिया संग काम करने का अनुभव कैसा रहा?
आलिया संग काम करने का एक्सपीरियंस काफी अच्छा रहा। मैं आलिया की ऐक्टिंग की कायल रही हूं। मेरे ज्यादातर सीन उनके साथ ही थे, हर सीन में काफी मजा आया। शूटिंग के दौरान आलिया का भी काफी सपॉर्ट रहा। आलिया काफी सिक्योर ऐक्टर हैं। छोटी उम्र में इतना स्टारडम होने के बावजूद वह जमीन से जुड़ी हुई हैं। उनके साथ बिताए हर पल मेरे लिए यादगार थे। फिल्म में एक सीन है, जहां आलिया और मेरी कोई बातचीत नहीं होती है। कहते हैं जब दो बेहतरीन ऐक्टर एक साथ आते हैं, तो कुछ मैजिकल सा हो जाता है। वह सीन मेरे लिए मैजिकल मोमेंट की तरह ही था। हमने बिना कुछ कहे ही, बस इमोशन से भरा वह सीन शूट कर लिया था।
बॉलिवुड फिल्म और मराठी फिल्मों में क्या अंतर है। आप किसमें ज्यादा सहज हैं?
बॉलिवुड फिल्म और मराठी फिल्मों में सिर्फ भाषा का फर्क है। अब तो वह भी खत्म हो गया है। इसका उदाहरण ‘सैराट’ की रीमेक ‘धड़क’ है। एक कलाकार हिंदी, मराठी, साउथ, बंगाली कहीं भी काम करे, वह अपना काम अच्छे से ही करता है। रही बात सहजता कि, तो मराठी फिल्मों में काम करना घर में काम करने जैसा होता है। और हिंदी फिल्मों में काम करना, बाहर जाकर काम करने जैसा है। बस इतना ही अंतर है।
फैमिली और पति हिमांशु ने कितना साथ दिया?
मेरी मां ने मेरा सबसे ज्यादा साथ दिया है। उसके बाद पति हिमांशु ने मेरा काफी साथ दिया है। हिमांशु तो दिन रात मेरी तारीफ करते हैं। वह कहते हैं कि घर की बेहतरीन ऐक्टर मैं हूं। मैं कभी उनके बारे में ज्यादा शेयर नहीं करती पर वह मुझसे बहुत प्यार करते है। अगर कहा जाए तो जैसे आप बच्चे के लिए कहते हैं न कि मेरा बच्चा सबसे सुंदर और सबसे बेहतर है।
अपनी जर्नी को कितना आसान व कितना मुश्किल भरा मानती हैं आप?
संघर्ष की बात करें तो वह अभी भी चालू है। राजी के बाद मेरी फिल्म ‘सत्यमेव जयते आएगी जिसमें मैं मनोज बाजपेयी के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हूं। कोई भी फिल्म मिलने और लोगों तक पहुंचने में भी एक अलग तरह का संघर्ष होता है। मेरे हिसाब से आप एक ऐक्टर हो या नॉन ऐक्टर, हर किसी की जिंदगी में हर रोज एक अलग तरह का संघर्ष होता है क्योंकि आप हमेशा कुछ न कुछ अच्छा करना चाहते हैं, जैसे कि जो आपने पिछली फिल्म में किया है, उससे बेहतर आने वाली फिल्मों में करना चाहते हैं। मुझे लगता है कि आप जिस दिन भी ऐसा बोलने लगेंगे कि अब मुझे कुछ नहीं करना, अब घर में बैठना है, तो आसी भावना जब आपके अंदर आए, तब संघर्ष खत्म होता है। लेकिन ऐसा भी नहीं होता है क्योंकि हर छोटी चीज में संघर्ष है।

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