ऊषा बजाज हत्या-लूटपाट कांड की गुत्थी सुलझाने में लगी हैं पुलिस की 21 टीमें

एक महिला सहित 10 व्यक्ति संदेह के घेरे में आये

श्रीगंगानगर, 13 जून (का.सं.)। श्रीगंगानगर अंचल के जनमानस को हिला देने वाले जिले के श्रीबिजयनगर कस्बे में हुए ऊषा बजाज हत्या एवं लूटपाट कांड की गुत्थी सुलझाने और इसके अपराधियों को पकडऩे के लिए 21 पुलिस टीमें लगाई गई हैं रायसिंहनगर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयसिंह तंवर, उपाधीक्षक सीताराम प्रजापति और इनके साथ 10 थानों के प्रभारी व कई अन्य पुलिस अधिकारियों को इन टीमों की कमान देकर अलग-अलग टास्क दिये गये हैं। घटना को आज चार दिन हो गये हैं। पुलिस ने दावा किया है कि कुछ अहम सुराग मिले हैं, जिससे पूरे कांड की कडिय़ों को मिलाते हुए अपराधियों की पहचान की जा रही है। एक महिला सहित दस व्यक्ति संदेह के घेरे में हैं। इनको बार-बार पूछताछ के लिए थाने में लाया जा रहा है। इन सबको कड़ी हिदायत दी गई है कि वे बिना पुलिस की इजाजत के कस्बा छोड़कर नहीं जायेेंगे। अनेक पुलिस अधिकारियों और टीमों के प्रभारियों ने श्रीबिजयनगर थाने में डेरा डाला हुआ है। जिधर से भी कोई छोटी सी जानकारी मिलती है, उधर, पुलिसकर्मियों को दौड़ा दिया जाता है। श्रीबिजयनगर के वार्ड नं. 10 निवासी एवं पेट्रोल पम्प मालिक राजेन्द्र बजाज की पत्नी ऊषा (65) की विगत सोमवार दोपहर को किसी अज्ञात व्यक्ति ने घर में घुसकर हत्या कर दी। घर से दो लाख 53 हजार रुपये और सोने के गहने लेकर फरार हो गया। ऊषा बजाज अमूमन दिन में घर में अकेली रहती थी। उसके पति सुबह पेट्रोल पम्प पर चले जाते थे। ऊषा की दो पुत्रियां हैं, इनमें एक श्रीगंगानगर और दूसरी आगरा में विवाहित है। कल रात यह समझौता हो जाने के बाद आज सुबह पुलिस ने वारदात की गुत्थी सुलझाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 21 टीमेें गठित की गई हैं। यह टीमें जहां अपने मुखबरी तंत्र से सूचनाएं जुटा रही है, वहीं वारदात के समय घटनास्थल के आसपास जितने भी मोबाइल फोन एक्टिव थे, उनके डम्प रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। राजेन्द्र बजाज के घर के पास व्यापार मण्डल अध्यक्ष रामचंद्र दुआ के घर पर सीसी कैमरे लगे हुुए हैं, लेकिन वह काफी समय से खराब पड़े थे। पुलिस ने कस्बे में विभिन्न स्थानों पर लगे हुए सीसी कैमरों की फुटेज को खंगाल रही है। इसी दौरान पुलिस ने पेट्रोल पम्प के पूर्व तथा वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों से भी कड़ी पूछताछ की है। कस्बा निवासी एक महिला को भी पूछताछ के लिए थाने में लाया गया। मृतका ऊषा के भाई निर्मल व उसके पुत्र प्रतीक से भी पुलिस बार-बार सवाल-जवाब कर रही है। सोमवार दोपहर करीब पौने 2 बजे सबसे पहले प्रतीक ने ही अपनी बुआ को घर के अंदर ओंंधे मुंह पड़े हुए देखा था।
मिनट टू मिनट विश्लेषण : ऊषा बजाज की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस सोमवार दोपहर 1 बजे से 1.30 बजे तक के अंतराल का मिनट टू मिनट घटनाक्रम का विश्लेषण कर रही है। पुलिस के मुताबिक घर में रखे हुए 2 लाख 53 हजार के कैश को बैंक में जमा करवाने के लिए पेट्रोल पम्प के मुनीम ने घर आना था। वहीं पम्प के कर्मचारियों के लिए रोजाना की तरह खाने का टिफिन लेकर भी एक कर्मचारी ने आना था। जानकारी के मुताबिक खाने का टिफिन लेकर घर जा रहे कर्मचारी को मुनीम जुगल रास्ते में मिल गया। उसने टिफिन लेकर कर्मचारी को यह कहते हुए वापिस भेज दिया कि वह खाना ले आयेगा। जुगल 1.15 बजे घर पर पहुंचा, तो ऊषा ने दरवाजा खोले बिना 10 मिनट बाद आने के लिए कहा। पुलिस के अनुसार जुगल घर के बाहर दस मिनट तक खड़ा रहा। उसका कहना है कि ऊषा ने दरवाजा नहीं खोला तो टिफिन घर के बाहर रखकर वह वापिस चला गया। घटना हो जाने के बाद पुलिस जब वहां पहुंची तो टिफिन घर के अंदर पड़ा मिला। इस लिहाज से पुलिस फिलहाल ‘यादा शक जुगल पर कर रही है। 1.26 बजे जुगल के चले जाने के दस मिनट बाद ही ऊषा का भाई निर्मल अपने पुत्र प्रतीक के साथ घर आया। ऊषा ने निर्मल को पहले से फोन किया हुआ था कि वह पम्प से जब घर की तरफ आये तो दही दे जाये। निर्मल ने ऊषा के घर के सामने पुत्र प्रतीक को यह कहते हुए मोटरसाइकिल से उतारा कि वह बुआ से पूछ आये कि कोई और सामान तो नहीं लाना। घर से 50 मीटर दूर परचून की दुकान पर निर्मल दही लेने के लिए चला गया। पांच मिनट बाद प्रतीक वहीं दौड़ते हुए आया और बताया कि बुआ फर्श पर गिरी पड़ी है। पुलिस इसी 35-40 मिनट के पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करने मेें लगी है कि कौन कितने बजे आया और गया। यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस दौरान घर मेें कोई था जो ऊषा को धमकाये-डराये हुए था।

सम्भवत: उसी के कहने पर वह दरवाजा न खोलकर अंदर से ही जवाब दे रही थी। जल्दबाजी में थे अपराधी पुलिस सूत्रों के अनुसार वारदात करते समय अपराधी बहुत जल्दबाजी में था। हत्या करने के बाद अपराधियों ने घर में सामान से कुछ ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की। सुबह पम्प पर जाते समय राजेन्द्र बजाज बैंक में जमा करवाने के लिए एक बैग में दो लाख 53 हजार रुपये छोड़ गये थे। इस बैग के अलावा घर में और भी कैश पड़ा था। सिर्फ यह बैग गायब है। ऊषा बजाज के गले में सोने की चैन, कानों से बालियां व हाथों से चूडिय़ां भी गायब हैं, परंतु अंगुलियों में पहनी हुई तीन अंगूठियां सुरक्षित थीं। घर में और भी गहने रखे हुए थे। कोई ज्यादा सामान बिखरा हुआ नहीं मिला। हत्या व लूटपाट आनन-फानन में ही की गई। उगेखनीय है कि घर वालों को शुरू में लगा कि ऊषा की मौत उसकी रक्तचाप की बीमारी के चलते ब्रेन हैमरेज से हुई है। लिहाजा उन्होंने ऊषा के नाक व कान से निकले हुए खून को ही नहीं, बल्कि फर्श पर गिरी हुई बूंदों को भी साफ कर दिया था। करीब डेढ़-दो घंटे बाद तब शक हुआ, जब ऊषा की सोने की चैन, चूडिय़ां और बालियां गायब देखी गईं। लगभग साढ़े 3 बजे पुलिस को घटना की सूचना दी गई।
पुलिस के पास अब तीन दिन बचे : इस हत्याकांड के अपराधियों को शीघ्रता से पकडऩे और ढीली-ढाली कार्यशैली के कारण थानाप्रभारी फूलचंद शर्मा सहित समूचे थाना स्टाफ को बदलने की मांग को लेकर थाने के सामने दो दिन तक धरना चला। कल बुधवार देर रात रायसिंहनगर के विधायक बलवीर लूथरा व कई अन्य जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में श्रीबिजयनगर थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ वार्ता हुई, जिसमें एक एएसआई सहित पांच पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने पर सहमति हुई। थानाप्रभारी फूलचंद के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए अधिकारियों ने तीस जून तक का समय मांगा। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आगामी सोमवार तक अपराधियों को पकड़ लिया जायेगा। शिष्टमण्डल ने चेताया कि अगर अपराधी नहीं पकड़े गये तो सोमवार से फिर धरना शुरू कर दिया जायेगा।

 

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