‘पोषण-2’ अभियान में 7 हजार से अधिक बच्चे हुए कुपोषण मुक्त

 

जयपुर, 3 अक्टूबर (का.सं.)। प्रदेश के 20 जिलों के चयनित 739 उपस्वास्थ्य केन्द्रों एवं 4 हजार 686 आंगनबाड़ी केन्द्रों में पिछले वर्ष संचालित किया गया ‘पोषण’-2′ समेकित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम में 7 हजार 712 बच्चे कुपोषण मुक्त हो गये हैं। इन बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों से जोड़कर निगरानी में रखा गया है। एनएचएम, यूनिसेफ, गेन, एसीएफ व टाटा ट्रस्ट डवलपमेंट पार्टनरों ने पूरी सकल्पबद्धता के साथ ‘पोषण-2’ कार्यक्रम क्रियान्वित किया। महिला एवं बाल विकास विभाग के शासन सचिव श्री के.के.पाठक ने गुरूवार को स्थानीय होटल हिल्टन में यूनिसेफ द्वारा आयोजित समेकित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम ‘पोषण-2’ की अनुभव साझा कार्यशाला में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश को कुपोषण मुक्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। प्रकृति ने मानव बहुत कुछ चीजे दी हैं। उन्होनें कहा कि हमें पोषाहार के रूप में नवीन शोध करने की आवश्यकता है साथ ही कुपोषण प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के और अधिक प्रयास करने होंगे। मिशन निदेशक एनएचएम श्री नरेश कुमार ठकराल ने कहा कि हमारे समक्ष बच्चों में कुपोषण एक गंभीर समस्या है और यथासमय कारगर निदान कुपोषण का प्रबंधन कर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पोषण-2 कार्यक्रम में 3 लाख 75 हजार बच्चों की हैल्थ स्क्रीनिंग की गयी एवं अतिगंभीर कुपोषित पाये गये 10 हजार 344 बच्चों को कार्यक्रम से जोड़ा गया। इन अतिकुपोषित बच्चों में से 7 हजार 412 विशेष निगरानी में रखकर पोषण अमृत खिलाया गया। आज यह बच्चे पूर्ण स्वस्थ्य है एवं स्थानीय आंगनबाड़ी केन्द्रों से इन्हें जोड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसी प्रकार पूर्व में सीमेम कार्यक्रम प्रदेश के 13 जिलों में चलाया गया था। इसके तहत 2 लाख 34 हजार बच्चों की स्क्रीनिंग की गयी थी जिनमें से 11 हजार 236 अतिगंभीर कुपोषित बच्चे थे जिनमें से 9 हजार 640 को कुपोषण से मुक्त किया गया था। ठकराल ने बताया कि प्रदेश में पोषण निवारण में ए.एन.एम. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशासहयोगिनियों एवं डवलपमेंट पार्टनर संस्थानों के सहयोग से सफलतापूर्वक संचालन किया गया है जिसके परिणामस्वरूप 70 प्रतिशत बच्चे कुपोषण की श्रेणी से बाहर आये हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी मशीनरी एवं समुदाय की सहभागिता बढ़ाकर कुपोषण प्रबंधन सुनिश्चित करने को हम संकल्पबद्ध हैं। महाराष्ट्र के महिला बाल विकास विभाग की आयुक्त मिस इन्दिरा मालू ने महाराष्ट्र में कुपोषण से मुक्ति हेतु किये जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान में बच्चों के कुपोषण के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास सराहनीय है।उन्होंने बाल संजीवनी के माध्यम से महाराष्ट्र में कुपोषण मुक्त करने के प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी। यूनिसेफ की प्रदेश हैड मिस इजाबेल बारडेम ने राजस्थान में पोषण कार्यक्रम के दोनों चरणों में किये गये कार्यों की सराहना ही। उनहोंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा विभाग एवं डपलपमेंट पार्टनर ने एकजुट होकर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है और इसकी सराहना देशभर में की जा रही है। कार्यशाला में कुपोषण-2 कार्यक्रम के डवलपमेंट पार्टनर संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं फील्ड कार्मिकों ने अपने अनुभव साझा किये। इस कार्यक्रम में उल्लेखनीय सहयोग करने वाले स्वास्थ्य कार्मिकों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया है। कार्यशाला में निदेशक आरसीएच डॉ.आर.एस.छीपी, अतिरिक्त निदेशक आरसीएच डॉ.ओ.पी.थाकन, सीफू निदेशक डॉ.रवि प्रकाश शर्मा, संबंधित जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी व स्वास्थ्य कार्मिक तथा डवलपमेंट पार्टनर के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।

 

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