छत्तीसगढ़ की ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा आऊ बाड़ी योजनाओं के अध्ययन के लिए समिति गठित

 

जयपुर, 27 जून (का.सं.)। जल एवं पशुधन संरक्षण सहित कृषि के समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य में चलाई जा रही योजनाओं को राजस्थान में लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए कृषि विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पवन कुमार गोयल की अध्यक्षता में गुरुवार को शासन सचिवालय में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। अतिरिक्त मुख्य सचिव गोयल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने ‘नरवा, गरूवा, घुरूवा अऊ बाड़ी पर आधारित चार सूत्री योजना शुरू की है। इसके अन्तर्गत जल स्रोतों का संवर्धन (नरवा), पशुधन संरक्षण (गरूवा), जैव अवशिष्ट का संवर्धन एवं जैविक खाद का उपयोग (घुरूवा) तथा बाड़ी विकास (बाड़ी) का कार्य किया जा रहा है। साथ ही फसलों को जानवरों से बचाने के लिए ग्राम स्तर पर ”गौठान योजना बनाई गई है। छत्तीसगढ़ के कृषि अधिकारियों ने गत फरवरी माह में जयपुर में राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कृषि एवं संबद्ध विभागों के प्रशासनिक सचिवों की बैठक में इन योजनाओं की संकल्पना, क्रियान्विति एवं फायदों के बारे में विस्तार से बताया था। गोयल ने बताया कि इन योजनाओं की प्रदेश में क्रियान्विति के संबंध में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ चर्चा की गई है। यह योजना छत्तीसगढ़ में अभी आरंभिक चरण में है और इसके नतीजे आना शेष है। इसे राजस्थान में लागू करने की संभावना का अध्ययन करने के लिए कृषि विभाग के आयुक्त की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है। समिति में आरएसीपी, उद्यानिकी, गोपालन, पशुपालन, स्वच्छ भारत मिशन, वाटरशेड के निदेशक एवं कृषि विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति इन क्षेत्रों में राजस्थान में हो रहे कार्यों और छत्तीसगढ़ में हो रहे नवाचारों का अध्ययन कर राज्य में लागू करने के संबंध में अपनी रिपोर्ट देगी। बैठक में राजस्थान कृषि प्रतिस्पद्र्धात्मक परियोजना (आरएसीपी) निदेशक डॉ. ओमप्रकाश, उद्यानिकी विभाग के निदेशक मोहनलाल यादव सहित भू-जल, कृषि, उद्यान, पशुपालन एवं गोपालन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।

 

 

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