कुख्यात अपराधी आमीन खान के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने वाला गिरफ्तार

 

श्रीगंगानगर, 27 जून (का.सं.)। कोतवाली पुलिस ने कुख्यात अपराधी आमीन खान को जेल से पैरोल मंजूर करवाने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवा कर देने वाले शख्स को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि वसीम अकरम पुत्र शेर मोहम्मद निवासी गैरसरियों का मोहगा बीकानेर को गिरफ्तार कर आज कोर्ट में पेश किया। वसीम अकरम को न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए गए। कुख्यात हथियार तस्कर और हार्डकोर क्रिमिनल आमीन खान विगत फरवरी माह में 7 दिन की पैरोल मंजूर होने पर श्रीगंगानगर जिला कारागृह से फरार हो गया था। पुलिस के अनुसार पैरोल अवधि समाप्त होने पर आमिर खान को 26 फरवरी की शाम 5 बजे जिला कारागृह में उपस्थित होना था। लेकिन वह नहीं आया। जेल के एक कर्मचारी विष्णु जांगिड़ की रिपोर्ट पर आमीन खान कमला कॉलोनी बीकानेर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मुकदमे में जेल प्रशासन ने पैरोल के लिए जमानत देने के वाली आमीन खान की पत्नी मेहरून्निसा और एक अन्य व्यक्ति देवेंद्र भाटी को भी नामजद किया था। इस मामले की जांच कर रहे सहायक उप निरीक्षक लाल बहादुर ने आज बताया कि पूर्व में दो व्यक्तियों को इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। आमीन खान ने अपने एक बच्चे के गुर्दा रोग से पीडि़त होने का मेडिकल सर्टिफिकेट पेश कर उसका इलाज करवाने के लिए 7 दिन की पैरोल मंजूर करवाई थी। जांच पड़ताल में पुलिस ने पाया कि मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी है। आमीन खान के लिए यह फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट वसीम अकरम ने एक डॉक्टर से बनवा कर दिया था। अब पुलिस ने इस पर भी शिकंजा कस दिया है। वसीम को आज कोर्ट में पेश किया गया तो उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आमीन खान जहां अवैध हथियारों की तस्करी में लिप्त है, वहीं बीकानेर के बहुचर्चित कांग्रेस नेता रामकिशन हत्याकांड के हमलावरों को हथियार उपलब्ध करवाने के जुर्म में उम्र कैद की सजा भुगत रहा था। वह अभी तक फरार है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आमीन खान ने पैरोल मंजूर करवाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने बीकानेर जिला कलेक्टर को इस संबंध में निर्देश दिए थे। यही नहीं आमीन खान को जब किसी हाई सिक्योरिटी जेल में रखने के आदेश दिए गए तो उसने इस आदेश के खिलाफ भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि आमीन खान को बीकानेर संभाग में ही किसी जेल में रखा जाए। तब उसे श्रीगंगानगर जिला कारागृह में स्थानांतरित किया गया था।

 

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