आर्टिफीशियल इन्टेलिजेन्स मानव संसाधन का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी बने : सचिव

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

जयपुर,11 अक्टूबर (का.सं.)। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि आर्टिफीशियल इंटेलीजेन्स आने वाला कल है और मानव और मशीन एक साथ मिलकर किस तरह काम कर सकते हैं, यह आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि मशीनों को मानव संसाधन का विकल्प नहीं बनना चाहिये, बल्कि अधिक उत्पादन के लिए श्रम शक्ति बढ़ाने की तरह काम करना चाहिये। शर्मा शुक्रवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित विज्ञान नवाचार व्याख्यान माला के अन्तर्गत आर्टिफीशियल इंटेलिजेन्स विषय पर मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भविष्य में संचार, डेटा, डिसीजन मेकिंग और सेंसर के कन्वरजेन्स से हर क्षेत्र में ऑटोमेशन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि डिसिजन मेकिंग का काम आने वाले समय में मानव की बजाय मशीनों के हाथ में होगा। उन्होंने कहा कि डेटा आज के समय की सबसे बड़ी ताकत है और भारत जैसे विविधता वाले देश में इसका महत्त्व और भी ज्यादा है। उन्होंने इस डेटा को कच्चे माल की तरह उपयोग करने के लिए कहा, जिससे रोजगार और व्यवसाय के नए आयाम खुलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि हम उपलब्ध डेटा से कोई फायदेमंद और महत्त्वपूर्ण समाधान प्राप्त नहीं कर सकते, तो इसका कोई फायदा नहीं है। इस अवसर पर आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. शान्तनु चौधरी आर्टिफीशियल इंटेलिजेन्स ऑफ थिंग्स के बारे में बताते हुए कहा कि यह एनेलिसिस और डिसीजन मेकिंग सिस्टम है। इसका पूरा उपयोग 5जी नेटवर्क आने के बाद होगी। इससे रियल टाइम डिसिजन मेकिंग में सुधार होगा और उद्योगों, हेल्थ केयर, प्रदूषण, ड्राइवर लैस कार, आपदा प्रबंधन में नई क्रान्ति आयेगी। इस अवसर पर बिड़ला विज्ञान एवं शोध संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रो. पी घोष ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के अंत में राजस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अतिरिक्त सदस्य सचिव श्री मनु सिकरवार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रोफेसर तथा विद्यार्थी उपस्थित थे।.4

 

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