Asthma के मरीजों को क्यों नहीं करनी चाहिए स्मोकिंग? जानें खतरे

सिगरेट वैसे तो शरीर पर कई तरह से नुकसान पहुंचाता है लेकिन यह खासतौर से अस्थमा के लक्षणों को बढ़ावा देता है। आइए, आपको बताते हैं कि स्मोकिंग किस तरह अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकती है।बढ़ते प्रदूषण के साथ ही इन दिनों अस्थमा के मरीजों की संख्या में भी काफी इजाफा हो रहा है। क्या बच्चे और क्या बुजुर्ग हर कोई इस बीमारी की चपेट में आ रहा है। ऐसे में लोगों की स्मोकिंग की लत इस बीमारी को और भी खतरनाक बना रही है। बीते दिनों ऐक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की स्मोक करती हुई एक तस्वीर वायरल हुई जिसके लिए उन्हें काफी ट्रोल किया गया। प्रियंका पहले बता चुकी हैं कि वह अस्थमा से पीडि़त हैं। इसलिए स्मोक करने पर फैन्स उनपर भड़क गए। आइए, आपको बताते हैं कि स्मोकिंग किस तरह अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। सिगरेट वैसे तो शरीर पर कई तरह से नुकसान पहुंचाता है लेकिन यह खासतौर से अस्थमा के लक्षणों को बढ़ावा देता है। जब आप तंबाकू इनहेल करते हैं तो इसके कण सांस की नली में नमी के साथ चिपक जाते हैं। इन कणों की वजह से मरीज को बार-बार अस्थमा का अटैक आता है।सांस की नली में बाहरी कणों को रोकने के लिए छोटे-छोटे रेशे होते हैं। इन्हें सीलिया कहते हैं। तंबाकू सीलिया को भी नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में बाहरी प्रदूषक तत्व आसानी से सांस की नली से लंग्स में पहुंच जाते हैं।  सेकंड हैंड स्मोकिंग/पैसिव स्मोकिंग-अगर सिगरेट पीते हुए किसी और व्यक्ति के बगल में आप खड़े होते हैं तो उसका धुआं आप भी लेते हैं। इसे पैसिव स्मोकिंग या सेकंड हैंड स्मोकिंग कहते हैं। वास्तव में पैसिव स्मोकिंग और भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें स्मोकर द्वारा छोड़े गए धुएं को आप अंदर लेते हैं। इसमें अंदर लिए गए धुएं से ज्यादा खतरनाक तत्व मौजूद होते हैं। जिसे पहले से अस्थमा है, उसके लिए यह खासा नुकसानदेह होता है। इससे अस्थमा अटैक बढ़ सकता है और मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

 

 

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