साईकिल यात्रा के माध्यम से, पैट्रोल एवं पर्यावरण बचाओ के प्रति जागरूकता अभियान

साईकिल पर हजारों किमी यात्रा कर चुके हैं रासे राजन

अनूपगढ़ , 24 नम्वबर (एजेन्सी)। तमिलनाड़ु राज्य के सेलमसिटी निवासी रासे राजन ने देश भर में हजारों किमी की साईकिल यात्रा आमजन में पैट्रोल एवं पर्यावरण बचाओ अभियान के प्रति जागरूकता का एक मजबूत रास्ता अपनाया है। रासे राजन ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए लगभग 2 वर्ष पूर्व 2 अक्टूबर 2017 को तमिलनाडु से साइकिल पर यात्रा शुरू की थी। जिसका लक्ष्य पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करना था। तमिलनाडु से यात्रा शुरू करने के बाद साईकलिस्ट राज ने आंध्रप्रदेश, छतीसगढ़, उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, झारखंड़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरला, कर्नाटका, गुजरात, राजस्थान, उतरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब तथा पांडीचेरी में लोगों को अपनी साईकिल यात्रा तथा इसके उद्देश्य के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि इन रा’यों के अनेक स्कूलों में विद्यार्थियों को साईकिल चलाने का संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि इस साईकिल यात्रा के दौरान अनेक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। उन्हें हिन्दी भाषा सही तरह से नहीं आने के कारण सबसे बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। उनका संदेश अध्यापकों द्वारा ट्रांसलेट कर विद्याॢथयों को दिया गया। इसके अलावा इस साईकिल यात्रा के दौरान वह 2 बार अत्यधिकबीमार भी हुए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी तथा उनकी साइकिल यात्रा लगातार जारी। उनका लक्ष्य 40 हजार किलोमीटर साईकिल चलाकर लोगों को उनके अभियान के बारे में बताकर पैट्रोल तथा पर्यावरण को बचाने का है। जहां एक तरफ उक्त लाभ होंगे वहीं दूसरी तरफ रोजाना 10 कि मी साईकिल चलाकर अपने आप को मधुमेह तथा मोटापे से होने वाली बीमारियों से निजात पा सकते हैं। हमारे जीवन में दैनिक गतिविधियों के जैसे बाजार, स्कूल, कार्यालय, मंदिर एवं अन्य कई जगहों पर जाने के लिए हमें साईकिल का उपयोग करना चाहिए, साईकिल चलाने से एक तरफ जहां पैट्रोल बचेगा। वहीं दूसरी तरफ यह पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगा। उन्होंने बताया कि जनवरी 2020 में उनकी 40 हजार किलोमीटर यात्रा पूरी होने के बाद उनका नाम गिनीज वल्र्ड बुक ऑफ रिकार्डस में दर्ज हो जाएगा। वह अपनी यात्रा को प्रमाणित करने के लिए हर शहर में पहुंचने पर वह वहां के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड़ या अन्य किसी स्थान पर पहुंचने पर वहां पहुंचने का लिखित सबूत भी लेते है। रास्ते के ज्ञान के लिए उन्होंने जी.पी.एस. को दर्शाने वाली घड़ी भी पहनी है। उन्होंने एक दिन में सबसे अधिक 217 किलोमीटर साईकिल चलाई है, जबकि औसतन 50 से 150 किलोमीटर साईकिल चलाते है। रासे राजन ने बताया कि इस बात को जब उन्होंने परिवार के लोगों के बीच रखा तो उन्हें परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा था, लेकिन फिर उन्होंने अपने घर वालों को मना लिया। 41 वर्षीय राजसे राज अविवाहित है तथा अब फोन पर वह अपने घर वालों से सम्पर्क करते हैं, उनके घर वाले उसके इस कार्य के प्रति संतुष्ट है। इस साईकिल यात्रा के 40 हजार लक्ष्य की प्राप्ति के बाद वह कुछ समय तक घर रूकने के बाद दुबारा नए जोश के साथ साईकिल यात्रा शुरू कर बाकी रहे स्थानों पर अपने संदेश को देंगे। इस यात्रा के दौरान साईकलिस्ट रासे राजन के अनूपगढ़ पहुंचने पर जागरूक नागरिकों राजकुमार छाबड़ा, रतन कुमार छाबड़ा, रोहित छाबड़ा, महेंद्र कुमार यादव, विक्रम सिह, राजवीर तथा राकेश सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया तथा फूल मालाएं पहनाकर आगामी यात्रा के लिए रवाना किया। रासे राजन ने यहां के लोगों को अपनी यात्रा के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि उनके द्वारा भ्रमण किए गए सभी रा’यों में दिल्ली में सबसे अधिक प्रदूषण है, ऐसा प्रदूषण आपके आसपास नहीं हो, उसके लिए सभी को साईकिल चलाने के लिए प्रेरित करें।

 

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