कैग ने कहा, जीएसटी के पूरे लाभ के लिए कारोबारियों के बिलों का मिलान अहम

 

नई दिल्ली। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने मंगलवार को कहा कि कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जैसी सुधारवादी कर प्रणाली के पूरे लाभ के लिए कारोबारियों के बिलों (बीजक) के मिलान की सुचारु व्यवस्था जरूरी है। संसद में प्रस्तुत कैग की ताजा रपट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जीएसटी लागू किये जाने के दो वर्ष बाद भी ‘बिल मिलान के माध्यम से ‘इन-पुट टैक्स क्रेडिट देने की व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकी है।रपट में बीजक मिलान की व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि इसी से प्रमुख कर सुधार के पूरा लाभ प्राप्त हो पाएगा। वर्ष 2018…19 के दौरान लेखा परीक्षा के आधार पर जीएसटी संबंधी कैग के इस प्रतिवेदन में कहा गया है कि जीएसटी में कर के भुगतान और निपटान की व्यवस्था की अभिकल्पना बिलों के शत प्रतिशत मिलान पर आधारित है। साथ ही यह इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ देने के साथ-साथ बीजक मिलान के साथ आईजीएसटी के निपटान पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों में अभी तक कुछ भी संभव नहीं हुआ है। बिल मिलान प्रणाली को शुरू नहीं किया गया है। प्रतिवेदन में कहा गया है कि बीजक मिलान से ही ‘इस प्रमुख कर सुधार के पूरे लाभ प्राप्त होंगे और इससे केंद्र और राज्य दोनों के कर राजस्व की रक्षा होगी तथा आईजीएसटी के उचित निपटान की ओर बढ़ा जा सकेगा। रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी से देश भर में कर दरों के साथ साथ पंजीकरण फार्म, प्रतिदाय और बिल के प्रारूपों में एकरूपता बढी है। ई..वे बिलों ने अधिकतर मानवीय चेक पोस्ट को बदल दिया है।

 

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