पिछले साल सिविल सर्विसेस एग्जाम में लास्ट अटेंप्ट कर चुके कैंडिडेट्स को एक और मौका मिलेगा, बशर्ते एज लिमिट पार न हुई हो

यूपीएससी पर केंद्र का फैसला

नई दिल्ली (एजेंसी)। पिछले साल यूपीएससी की परीक्षा में लास्ट अटेंप्ट करने वाले कैंडिडेट्स को इस साल एक मौका और मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई में यूपीएससी ने यह बात कही। इससे उन कैंडिडेट्स को फायदा होगा, जो पिछली बार की परीक्षा में लास्ट अटेंप्ट कर चुके हैं।
यूपीएससी की सिविल सर्विसेस परीक्षा में कोई भी कैंडिडेट अधिकतम चार बार ही शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में चौथी बार परीक्षा देना ही लास्ट अटेंप्ट कहलाता है। यूपीएससी की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (सीएसइ-2020) में लास्ट अटेंप्ट करने वाले कैंडिडेट्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें अतिरिक्त मौका देने की मांग की गई थी।
कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि सिविल सर्विस परीक्षा 2020 में लास्ट अटेंप्ट यानी आखिरी कोशिश करने वाले कैंडिडेट्स को शर्तों के साथ एक बार मौका दिया जा सकता है। शर्त यह है कि ऐसे कैंडिडेट एज बार्ड न हों यानी वे परीक्षा में बैठने की उम्र पार न कर चुके हों। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि लास्ट अटेंप्ट वाले कैंडिडेट्स को यह छूट केवल एक बार 2021 की परीक्षा के लिए दी जाएगी। इस फैसले को आधार बनाकर भविष्य में इस तरह की छूट के लिए दावेदारी नहीं की जा सकेगी।
पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूपीएससी से पूछा था कि कोरोना की वजह से परीक्षा से वंचित रह गए कैंडिडेट्स को एक और मौका क्यों नहीं दिया जा सकता? कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि पहले कितनी बार परीक्षा के लिए कैंडिडेट्स को अतिरिक्त मौके दिए गए हैं। इससे पहले केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे वकील ने कहा था कि सरकार ऐसे कैंडिडेट्स को एक और मौका देने के लिए राजी नहीं है और हलफनामे में इसकी वजह बताई गई है। इस पर याचिकाकर्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए 27 जनवरी तक का समय मांगा था। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि जब तक इस मामले में फैसला नहीं होता, तब तक नए साल के लिए कोई नोटिफिकेशन जारी न किया जाए।

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