नागरिक उड्डयन मंत्री: एयर इंडिया के लिये बोली उसके उद्यम मूल्य के आधार पर लगाई जायेगी

नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया के तहत बोली कंपनी के इक्विटी मूल्य नहीं बल्कि उसके उद्यम मूल्य के आधार पर लगाई जायेगी। किसी कंपनी के उद्यम मूल्य में उसके शेयरों का मूल्य, उसका रिण और कंपनी के पास उपलब्ध नकद राशि सब शामिल होता है जबकि इक्विटी मूल्य में केवल कंपनी के शेयरों का मूल्य शामिल होता है। पुरी ने कहा कि हमने तय किया है कि एयर इंडिया के लिये उसके उद्यम मूल्य के मुताबिक बोली लगान को कहा जायेगा।उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने इस अवसर पर सम्मेलन में कहा कि बोलियां उद्यम के मूल्य के मुताबिक होंगी। यानी इसका मतलब यह है कि बोली लगाने वाले को यह बताना होगा कि वह एयर इंडिया के साथ कितना कर्ज अपने ऊपर लेगा।खरोला ने कहा यह फैसला किया गया है कि बोली लगाने वाला निवेशक एयर इंडिया का उद्यम मूल्य लगायेगा, उसका 15 प्रतिशत उसे नकद सरकार को देना होगा और शेष 85 प्रतिशत एयर इंडिया के साथ उसे रिण के रूप में अपने ऊपर लेना होगा। एयर इंडिया पर 31 मार्च 2019 को कुल 58,225 करोड़ रुपये का कर्ज था। बाद में 2019 में इसमें से 29,464 करोड़ रुपये का रिण एयर इंडिया से सरकार के स्वामित्व वाली विशेष उद्देशीय इकाई एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग कंपनी लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया गया। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहीन कांत पांडे ने सम्मेलन में कहा कि 15 प्रतिशत नकद राशि न्यूनतम जरूरत है। यदि उद्यम मूल्य में बोलीकर्ता नकद का अधिक हिस्सा रखता है तो उसमें कर्ज का हिस्सा कम हो जायेगा लेकिन बोली के मूल्यांकन में उसे कोई प्राथमिकता नहीं मिलेगी। पांडे ने कहा कि बोली के मूल्यांकन का विचार करते समय जितने ऊंचे उद्यम मूल्य की बोली होगी उतनी ही बेहतर बोली होगी। सबसे ऊंचा उद्यम मूल्य लगाने वाले को ही यह मिलेगी। राष्ट्रीय विमानन कंपनी के लिये बाली लगाने की समयसीमा को पांचवी बार आगे खिसकाते हुये अब 14 दिसंबर 2020 कर दिया गया है। इससे पहले 25 अगस्त को कोविड- 19 महामारी के बीच इसे चौथी बार आगे बढ़ाकर 30 अक्टूबर किया गया था। एयर इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को इस साल 27 जनवरी को शुरू किया गया था। एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक राजीव बंसल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एयरलाइन को चालू वित्त वर्ष के दौरान संभवत: 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

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