संविधान प्रदत्त कर्तव्यों को आचरण में लाएं : राज्यपाल

गोविन्द गुरु जनजाति विश्वविद्यालय का प्रथम दीक्षान्त समारोह

जयपुर, 23 दिसम्बर (का.सं.)। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने युवा पीढ़ी का आह्वान किया है कि सामाजिक एवं राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति जागरुक रहकर राष्ट्र निर्माण में महती भूमिका निभाएं। संविधान में प्रदत्त कर्तव्यों को आचरण में लायें। यदि सभी ने ऐसा प्रयास किया तो निश्चित तौर पर भारत देश को आगे बढ़ाने और स्वयं के जीवन को प्रोन्नत करने में यह कदम बेहतर साबित होगा। राज्यपाल मिश्र सोमवार को बांसवाड़ा में गोविन्द गुरु जनजाति विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने छात्र – छात्राओं को उपाधियां प्रदान की। राज्यपाल मिश्र ने मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को संविधान का प्रमुख स्तम्भ निरूपित करते हुए कहा कि संविधान हमारा मार्गदर्शक मूल ग्रन्थ है। इसकी प्रस्तावना में राष्ट्र की मूल भावना का उल्लेख है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिये हैं। संविधान के अनुच्छेद 51 (क) में हमारे द्वारा किये जाने वाले कर्तव्यों को सुस्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।
आमजन के लिए जरूरी है संविधान की जानकारी : राज्यपाल एवं कुलाधिपति मिश्र ने कहा कि आमजन को संविधान की जानकारी होना आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व सामाजिक समरसता के लिए मूल कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में युवाओं को मूल कर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए अभियान चलाया जाये ताकि देश की युवा पीढी को मूल कर्तव्यों के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51 क पर विचार-विमर्श करने के लिए गोष्ठियां व सेमीनार आयोजित करने की जरूरत बताते हुए समस्त पदक व उपाधि प्राप्तकर्ताओं को बधाई दी। सुनहरे भविष्य की शुभकामनाएँ प्रेषित की।
जनजाति विश्वविद्यालय है अपूर्व सौगात : राज्यपाल ने वागड़-कांठल की पावन धरा को सदियों तक शैक्षिक पिछड़ेपन से मुक्त करने की दिशा में गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय को अभूतपूर्व सौगात बताते हुए कहा कि अभावों में भी यहां के जनजाति एवं अन्य वर्ग अपनी सांस्कृतिक पहचान एवं स्वाभिमान को सहेज कर रखे हुए हैं। माही सरोवर ने यहां के प्राकृतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय यहां के शैक्षणिक एवं बौद्धिक पर्यावरण को नये आयाम प्रदान कर रहा है। यहाँ का सांस्कृतिक वैभव, प्राकृतिक सौन्दर्य, नयनाभिराम अरावली की श्रृंखला के मध्य माही सरोवर की हिलोरें इस क्षेत्र को विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि वागड़़ की यह धरती बहुत ही पवितर््ज्ञ एवं ऐतिहासिक है। यहां की जनजाति संस्कृति का अपना विशिष्ट महत्व है। इस धरती पर माँ त्रिपुरा सुंदरी का शक्तिपीठ अपने भक्तों को भरपूर शक्ति एवं ऊर्जा प्रदान करता है। इस पावन भूमि को संत मावजी एवं पूज्य गोविन्द गुरु ने अपनी तपस्या, त्याग से समृद्ध किया है।
ज्ञान गंगोत्री के उद्भव ने जगायी प्रेरणा : उन्होंने कहा कि वीर बाला कालीबाई एवं नाना भाई ने शिक्षा एवं ज्ञान की गंगोत्री का उद्भव इस भू-भाग पर करके आने वाली पीढिय़ों के लिये प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है। इस धरती के सपूत स्वर्गीय हरिदेव जोशी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद को सुशोभित करते हुए यहां का गौरव बढ़ाया है। प्रखर जनजाति राजनेता भीखा भाई ने लम्बे समय तक राज्य सरकार के मंत्री रहकर जन-जन की सेवा की है तथा मामा बालेश्वर दयाल ने भी जनजाति वर्ग की जागृति में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राज्यपाल मिश्र ने कहा कि ऐसे अनेक महापुरुषों के कर्मयोग का ही परिणाम है कि आज यहां प्रखर समाज सेवी एवं स्वतंत्रता सेनानी पूज्य गोविन्द गुरु के नाम से गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षान्त समारोह में शामिल होकर मैं स्वयं को धन्य महसूस कर रहा हूँ। यह विश्वविद्यालय यहां के युवा वर्ग को उच्च शिक्षा की एक बहुत बड़ी सौगात है जो उनके सपनों को सफलता की नई बुलन्दियों तक पहुंचायेगा। उन्होंने जनजाति विश्वविद्यालय द्वारा इतने कम समय में दीक्षांत समारोह का आयोजन करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यही नहीं विश्वविद्यालय ने अपने छोटे से कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण आयोजन किए हैं। राज्यपाल ने दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं में छात्रों की अपेक्षा छात्राओं की संख्या अधिक होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि बालिकाओं ने छात्रोंं की अपेक्षा अधिक संख्या में उपाधि अर्जित की है यह बालिका शिक्षा के क्षेत्र में एक सुखद एवं सराहनीय पहल है।
युवा पीढ़ी सजगता से निभाए दायित्व-समारोह में इन्दिरा गांधी खुला : विश्वविद्यालय(इग्नु) के प्रोफेसर डॉ. नागेश्वर राव ने कहा कि विद्यार्थियों को आचरण की शुद्धता पर ध्यान देने की जरूरत है। राव ने कहा कि सभ्य एवं सुनियोजित समाज के निर्माण का दायित्व आज की युवा पीढ़ी का है, जिसे पूरी सजगता के साथ निभाएं। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति कैलाश सोडानी ने स्वागत उद्बोधन किया।

 

 

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