पावन स्वरूप प्रकरण में गिरफ्तार आठ लोगों की जमानत स्वीकार

श्रीगंगानगर , 17 दिसम्बर (का.सं.)। श्री गुरुग्रंथ साहब के पावन स्वरूप के बहुचर्चित प्रकरण में गिरफ्तार किए गए एकनूर खालसा फौज के प्रदेश अध्यक्ष शिवचरणसिंह बुगलियांवाली सहित आठ लोगों की अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। पुलिस ने पावन स्वरूप को उठा ले जाने तथा पुलिसकर्मियों से मारपीट करने के आरोप में एक और युवक को गिरफ्तार किया है। अभी तक 14 व्यक्ति इस मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं। एक महिला सहित कई लोग पकड़ से बाहर हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवचरण बुगलियांवाली सहित आठ लोगों की ओर से जिला सेशन कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई गई,जिसे अनुसूचित जाति जनजाति मामलों की विशेष अदालत में सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। इस अदालत में मंगलवार को शिवचरण बुगलिया और सात अन्य लोगों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव दीक्षित और दूसरे पक्ष की ओर से चरणदास कंबोज एडवोकेट में लगभग साढ़े तीन घंटे तक जमानत की अर्जी पर बहस हुई। न्यायाधीश संदीपकौर ने बहस तथा तर्क वितर्क सुनने के पश्चात फैसला अगले दिन बुधवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया। एडवोकेट संजीव दीक्षित ने बताया कि कल देर शाम को अदालत ने इन सभी 8 लोगों को 80-80 हजार की जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। जमानत की औपचारिकता आज पूरी की जा रही है। यह 8 लोग विगत 2 दिसंबर को बड़े तड़के चुनाव थाना क्षेत्र में पदमपुर मार्ग पर चक 5-जी सहारणावाली के समीप पुलिस की नाकाबंदी में पकड़े गए थे। इससे कुछ देर पहले चक 11-जी छोटी में एक विवादित धार्मिक स्थल में घुसकर 20-25 व्यक्तियों ने वहां तैनात चार पांच पुलिसकर्मियों तथा सेवादारों से मारपीट की। इस स्थल से श्री गुरु ग्रंथ साहब के पावन स्वरूप को लेकर यह लोग कथित रूप से फायरिंग करते हुए निकल गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने नाकाबंदी की और शिवचरण बुगलियावाली सहित आठ को काबू कर लिया। अनेक लोग पावन स्वरूप लेकर भाग जाने में कामयाब हो गए। बाद में इस पावन स्वरूप को पंजाब में बठिंडा के समीप तलवंडी साबो में तख्त श्री दमदमा साहिब को सौंप दिया गया। पावन स्वरूप सौंपने वालों में निर्मलसिंह खरलिया, लवप्रीतसिंह और गोलूवाला की बीबी हरमीतकौर सहित कई लोग अभी फरार हैं। सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के सिंह साहिबान ने इस पावन स्वरूप को विवादित स्थल से तख्त दमदमा साहिब पहुंचाने का हुकमनामा जारी किया था। इस पर कुछ जज्बाती सिखों ने इस घटना को अंजाम दिया। तब से यह मामला सिख समाज के लोगों में काफी गर्म आया हुआ है।

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