ऐक्ट्रेस न होती तो सफाई कर्मचारी होती दीपिका

दीपिका पादुकोण कहती हैं कि अभिनय के अलावा जो दूसरा काम उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है, वह है साफ-सफाई का काम, वह कहती हैं कि अगर वह ऐक्ट्रेस न होतीं तो जरूर सफाई कर्मचारी होतीं। बॉलिवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक शुक्रवार को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। फिल्म को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री कर दिया गया है। नवभारतटाइम्स डॉट कॉम से हुई बातचीत में दीपिका ने फिल्म के विषय की गंभीरता और सोशल मेसेज को ध्यान में रखते हुए फिल्म के टैक्स फ्री होने पर बात करते हुए कहा कि अगर टैक्स फ्री होने से फिल्म अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचती है तो बहुत खुशी की बात है। पेश है दीपिका से हुई खास बातचीत। दोपहर 12 बजे से तमाम अखबारों और मैगजीन के पत्रकारों को इंटरव्यू देते हुए रात के 10 बज गए, अब इंटरव्यू की बारी हमारे साथ थी। वैसे तो दीपिका बिल्कुल फ्रेश लग रही थीं, लेकिन हमने सोचा कि लगातार बात करते हुए वह थक गई होंगी और हमारे सवालों के जवाब जल्दबाजी में देगीं। इसलिए हमने उनका मन टटोलने के लिए पूछ लिया कि आज तो लगातार इंटरव्यू करके आप थक गई होंगी? जवाब में दीपिका, एकदम चहक कर बोलीं, बिल्कुल भी नहीं थकी, क्या आपको लग रहा है कि मैं थक गई हूं।
अच्छा बताइए, आज आपका दिन कैसा रहा, सुबह से अब तक की दिनचर्या?
वैसे तो हर दिन का काम और शेड्यूल अलग-अलग होता है, अब ऐसा तो नहीं है कि हम लोग रोज ऑफिस जाते हैं और हमारा डेली रूटीन एक जैसा हो। एक ऐक्टर की जिंदगी हर दिन अलग होती है, एक दिन की तुलना दूसरे दिन से नहीं की जा सकती है। आज मैं सुबह उठी और अपने डेली रूटीन के हिसाब से जिम गई, फिर तैयार होकर यहां आई। यहां आकर सबसे पहले फोटोशूट किया और उसके बाद शुरू हुआ मीटिंग्स और इंटरव्यू का सिलसिला, जो अब तक चल रहा है, इस समय आपके साथ मेरा अंतिम इंटरव्यू है।
आप लोगों को एक स्टार की लाइफ खूब आकर्षित करती है, आपने दोनों तरह की जिंदगी देखी है, आम से बहुत खास बन गई हैं?
मैं अपनी जिंदगी को एक सिलेब्रिटी की तरह नहीं देखती हूं। मेरे हिसाब से मेरी जिंदगी भी एक आम जिंदगी हैं। खास कर जब मैं बंगलुरु में अपने परिवार के साथ होती हूं, तब तो एक नार्मल जिंदगी जीती हूं। मैं यह सोच कर कभी काम नहीं करती कि मैं एक सिलेब्रिटी हूं। सिलेब्रिटी होना, मेरे काम का एक हिस्सा है। मैं रोज उठकर खुद को यह याद नहीं दिलाती कि मैं कोई सुपरस्टार हूं, मेरे हिसाब से जैसे सबकी लाइफ हैं वैसे ही मेरी भी है। आप बड़ी स्टार हैं, कुछ ऐसे काम, जो फेमस और नामचीन होने की वजह से नहीं कर पाती हैं, भीड़ भरी सड़क में घुमते हुए पानीपूरी खाना, जैसी तमाम चीजें?
नहीं-नहीं, क्योंकि मुझे जो करना है मैं करती हूं, अब यह अलग बात हैं कि जब मैं बाहर जाती हूं तो परेशान नहीं होती, शायद मेरी मौजूदगी से आसपास के लोग जरूर परेशान हो जाते हैं क्योंकि भीड़ होती है, लोग सेल्फी के लिए आते हैं, अगर किसी रेस्टॉरंट में जाती हूं तो जो साथ में होते हैं उनको परेशानी होती हैं, लेकिन अगर मुझे रास्ते में पानी-पूरी खाना है या किसी रेस्टॉरंट में जाना है, थिअटर में जाकर मूवी देखनी है, तो मैंने कभी अपने आप को रोका नहीं हैं, मैं वह सब करती हूं, जो एक आम लड़की करती है।
आप छुट्टी वाले दिन क्या करती हैं?
छुट्टी वाले दिन मैं पूरे घर की यानी बाथरूम, बेसिन, किचन और घर की अलमारियों की सफाई करती हूं, जितना ज्यादा थकी होती हूं, क्लीनिंग का काम उतना ज्यादा करती हूं और साफ-सफाई के इस काम से मुझे बड़ा सुकून मिलता है, मेरी सारी थकान उतर जाती है।
आपका स्पोर्ट्स से भी गहरा लगाव है, अभिनेत्री न होती तो स्पोर्ट्स खेलतीं या कुछ और करतीं?
सच कहूं तो अगर मैं ऐक्ट्रेस नहीं होती तो 100त्न सफाई कर्मचारी होती, यह बात मैं बिल्कुल भी मजाक में नहीं कर रही हूं, यह बात आप मेरे साथ काम करने वालों से पूछ सकते हैं। मुझे घर-सामान की सफाई बहुत पसंद है।
दीपिका बॉलिवुड में 12 साल पूरे कर लिए हैं, इस सफर को किस तरह देखती हैं?
पिछले दस सालों में मैंने बहुत कुछ सीखा है। हर फिल्म के साथ मैंने आगे बढऩे की कोशिश की है। चाहती हूं आगे आने वाले 10-20 साल भी ऐसे ही रहें। मैं चाहती हूं कि एक व्यक्ति, एक कलाकार के तौर पर मैं हमेशा कुछ ना कुछ सीखती रहूं। मैं हर महीने खुद में कुछ बदलाव देखना चाहती हूं, वरना मैं ऊब जाउंगी। शुरू-शुरू में लोगों ने मुझमें कमियां भी निकाली थीं, लेकिन मैंने उन बातों को नकरात्मक ढंग से नहीं लिया, बल्कि उन बातों को सुना है और अपनी कमियों पर जमकर काम किया।
आलोचनाओं को पॉजिटिव ढंग से लेने की यह आदत क्या स्पोर्ट्स में रहने की वजह से है?
जी बिल्कुल, एक खिलाड़ी का नजरिया काफी अलग होता है, मैं खुद चाहूंगी कि इस देश में जो भी युवा हैं, वह किसी ना किसी खेल से जरूर जुड़ें, खेल से आपके अपने व्यक्तित्व में एक अलग तरह का बदलाव आता है। मैं अपने और इस दौर के बाकी कलाकारों में उनके एटीट्यूड को लेकर फर्क देखती हूं, चाहे आलोचना को लेकर हो या सफलता को लेकर। सफलता को भी सही तरीके से हैंडल करना बहुत जरूरी है। कई मामलों में लोगों को रातों-रात स्टारडम तो जरूर मिला, लेकिन वे उस नेम-फेम को अच्छी तरह हैंडल नहीं कर पाए, स्पोर्ट्स आपको बहुत कुछ सिखाता है।
लक्ष्मी का किरदार निभाना कितना चैलंजिंग रहा?
यह मेरे करियर की सबसे कठिन फिल्म रही है। शायद यह बात मैंने फिल्म पद्मावत के समय भी कही थी, लेकिन मैंने अब तक कई ऐसी फिल्में की हैं, जिसे निभाना इमोशनल स्तर पर आसान नहीं था। किसी किरदार ने इमोशनली मुझ पर ऐसा प्रभाव नहीं छोड़ा, जो एक एसिड अटैक सर्वाइवर के किरदार ने छोड़ा है। बतौर ऐक्टर यह किरदार निभाना मेरे लिए बहुत खुशी की बात थी, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर यह मुश्किल रहा है। एसिड अटैक से जुड़ी बहुत सारी बातें हैं, जो मुझे नहीं पता थी और जिसका अंदाजा भी नहीं था, उतना ही पता था, जितना आम लोग जानते हैं। इस फिल्म ने मुझे कई छोटी-छोटी बातों से अवगत कराया, जागरूक बनाया।
बॉलिवुड की कई हिरोइंस हैं, जो स्क्रीन पर बदसूरत दिखने से बचती हैं, ऐसे में आपका यह कदम बहुत बोल्ड और साहस वाला है, क्या कहेंगी?
मैं इसे बोल्ड कदम तो नहीं मान सकती, क्योंकि ऐसे किरदार ज्यादातर लिखे ही नहीं जाते। मैं ऐसे किरदारों की खोज में रहती हूं, जिसके कोई मायने हो, जो लोगों पर, समाज पर एक प्रभाव छोड़ सकें। फिल्म पीकू, तमाशा वैसी ही फिल्में हैं। यह सच है कि बॉलिवुड की फिल्मों में ज्यादातर अभिनेत्री को खूबसूरत ही दिखाया जाता है, लेकिन मैं मानती हूं कि अब तक ऐसे किरदार ज्यादा लिखे ही नहीं जा रहे थे। मैं मेघना गुलजार का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने इस रोल में मुझे सोचा। हम खुशनसीब हैं कि आज के समय में ऐसे किरदार लिखे जा रहे हैं। यह जरूरी नहीं कि फिल्म सामाजिक संदेश के साथ ही लिखी जाए, छोटी-छोटी बातों से प्रभाव छोड़ा जा सकता है।
इस फिल्म के साथ आपने फिल्म के निर्माण में भी डेब्यू किया है, एक निर्माता के तौर पर क्या-कुछ सीखा?
मैंने काफी कम उम्र से ही पैसे की वैल्यू समझ ली थी, छोटी उम्र में घर चलाना सीख लिया था। मैं सिंपल मिडिल क्लास फैमिली से हूं, मुझे पॉकेट मनी भी नहीं मिलती थी, जब कभी भी मुझे कुछ चाहिए होता था, तो माता-पिता कहते थे कि अच्छे नंबर लेकर आओ तो मिलेगा। जब तक मैंने खुद कमाना शुरू नहीं किया, पैरेंट्स ने हमें पैसों के मामले से दूर रखा। इन दिनों यह देखने को बहुत मिलता है कि बच्चा रोने लग गया तो उसे खिलौना मिल गया, कुछ बच्चे बैठ जाते हैं जमीन पर कि उन्हें वह फलां सामान चाहिए, जिद करने लगते हैं और बच्चे के मम्मी-पापा हारकर वह सामान दिला देते हैं। आज कल तो लगभग हर बच्चों के हाथ में मोबाइल दिखता है, हमारे समय में मैंने अपने खुद के पैसों से मोबाइल लिया था, वह भी कॉलेज खत्म होने के बाद। मेरी यह बात सुनकर हो सकता है कि कुछ लोग मुझ पर भड़कें कि आपको बच्चे नहीं हैं तो कैसे पता, लेकिन मुझे पता कि फैमिली के साथ टाइम बिताना कितना जरूरी है और इसकी आदत बचपन से ही होती है। रही बात बतौर निर्माता सीखने की तो आज मुझे पैसों की अच्छी समझ है। सही जगह पर पैसा खर्च करना भी जरूरी है। हां, मैं बिजनस उतने अच्छे से नहीं समझती हूं, जितना यह बड़े-बड़े स्टूडियो समझते हैं, लेकिन मैं आम चीजों का, क्रू का ख्याल रखती हूं।
क्या आप कार्तिक आर्यन के साथ फिल्म कर रही हैं?
नहीं-नहीं, फिलहाल मैं कार्तिक आर्यन के साथ मैं कोई फिल्म नहीं कर रही हूं। वह तो इंस्टाग्राम पर हमने सिर्फ स्टोरीज शेयर की थी, लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगी कि नए एक्टर्स में कार्तिक की एनर्जी मुझे बहुत पसंद है। कार्तिक, रणवीर और मुझमें एक समानता यह है कि हम किसी बैकिंग या फैमिली कनेक्शन की वजह से बॉलिवुड में नहीं हैं, हमने जीरो से शुरुआत की है, तो जीरो से आकर फिल्म इंडस्ट्री को समझना और यहां काम करने का मौका मिलना हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। इस देश में हर तीसरा व्यक्ति फिल्मों में आना चाहता है, लेकिन उन्हें वह मौका नहीं मिल पाता, हम तीनों कुछ भाग्यशाली लोगों में से हैं। कार्तिक में मुझे काम के प्रति सच्चाई, मेहनत और उत्साह दिखता है। कार्तिक सफल होने के लिए कितनी भी मेहनत करने के लिए तैयार हैं और उसे किसी बात का मलाल नहीं है, वह जो दिखते हैं, वही हैं। उम्मीद करती हूं कि मुझे कार्तिक के साथ काम करने का मौका मिलेगा।

आपने सलमान खान और आमिर खान के साथ भी अब तक फिल्म नहीं की है, दर्शक कब देखेंगे आपकी जोड़ी सलमान और आमिर के साथ?
( यह सवाल सुन दीपिका चहक उठती हैं, हंसने भी लगती हैं ) मैं यह जानती हूं कि मेरे फैंस चाहते हैं कि मैं सलमान खान और आमिर खान के साथ फिल्म करूं। मैं खुद भी यह चाहती हूं, लेकिन मुझे लगता है कि यह भी जरूरी है कि हम सही फिल्म के लिए साथ आएं। अच्छी कहानी और स्क्रिप्ट मिल जाए तभी संभव है। हमने हमेशा सलमान को एक अलग तरह की फिल्मों में देखा है। मैं फिल्म हम दिल दे चुके सनम की बहुत बड़ी फैन रही हूं और मैं सलमान को उस तरह से रोल में फिर से देखना चाहती हूं या जो वह कर चुके हैं, उससे कुछ अलग। फिलहाल हमें किसी ने एक साथ फिल्म के लिए ऑफर भी नहीं किया है, यदि सही स्क्रिप्ट मिले तो क्यों नहीं।

आपके पर्स में वह चीजें, जो हमेशा साथ रखती हैं?
सुई-धागा और बटन का पाऊच क्योंकि कभी भी कुछ भी हो सकता है, जरूरी दवाइयां, स्टेन रिमूवर, बैंडिड और ऐसी चीजें जो फर्स्ट-ऐड वाली होती हैं, कहने का मतलब है इमरजेंसी में अगर आपको कोई जरूरी सामान चाहिए तो वह मेरे हैंड-बैग में मिल जाएगी।

 

 

 

 

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